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निकाय चुनाव से पहले BJP ने क्यों दिया RLP के हनुमान बेनीवाल को झटका ? यह रही बड़ी वजह

Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: October 29, 2019, 5:55 PM IST
निकाय चुनाव से पहले BJP ने क्यों दिया RLP के हनुमान बेनीवाल को झटका ? यह रही बड़ी वजह
नागौर सीट पर हनुमान के साथ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ा और उन्हें करीब दो लाख वोटों से चुनाव जीतने में सफल हो गए. फाइल फोटो

विधानसभा उपचुनाव (Assembly by-election) के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सर्वेसर्वा नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Nagaur MP Hanuman Beniwal) की ओर से बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं (Senior leaders) पर की गई टीका-टिप्पणियों (comments) से पार्टी उनसे सख्त नाराज (Angry) हो गई.

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जयपुर. विधानसभा उपचुनाव (Assembly by-election) के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सर्वेसर्वा नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Nagaur MP Hanuman Beniwal) की ओर से बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं (Senior leaders) पर की गई टीका-टिप्पणियों (comments) से पार्टी उनसे सख्त नाराज (Angry) हो गई है. यही वजह है कि बीजेपी ने स्थानीय निकाय चुनाव (Local body elections) से पहले आरएलपी से किनारा कर लिया है. मंगलवार को आरएलपी जब अपने पहले स्थापना दिवस (Foundation Day) की खुशियां मना रही थी उसी समय बीजेपी ने उससे किनारा कर तगड़ा झटका (Shock) दे डाला. निकाय चुनाव के कुछ समय बाद होने वाले पंचायत चुनाव (Panchayat Election)  में बीजेपी आरएलपी को साथ लेगी या नहीं इस पर अभी तक बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish punia) ने पत्ते नहीं खोले हैं.

जिद का पक्का और जूझारू नेता माना जाता है बेनीवाल को
हनुमान बेनीवाल को जिद का पक्का और जूझारू नेता माना जाता है. 2003 में हनुमान ने बीजेपी से मूंडवा सीट (वर्तमान खींवसर सीट) के लिए टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें नहीं मिला. इस पर बेनीवाल ने इंडियन नेशनल लोकदल की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और करीब 2500 मतों के मामूली अंतर से हार गए. उसके बाद हनुमान फिर बीजेपी में चले गए. 2008 में हनुमान ने बीजेपी की टिकट पर खींवसर विधानसभा सीट से जीत तो हासिल की, लेकिन उनकी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से बात बिगड़ गई. इस पर वे फिर पार्टी से अलग हो गए.

विधानसभा चुनाव में बेनीवाल की पार्टी को करीब 8 लाख वोट मिले

2013 का चुनाव हनुमान ने अपने दम पर खींवसर से निर्दलीय मैदान में उतरकर फिर जीता. 2018 के चुनाव से ठीक पहले हनुमान ने अपनी पार्टी आरएलपी बनाई और बोतल के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरे. उनकी पार्टी ने नागौर की खींवसर और मेड़ता तथा जोधपुर की भोपालगढ़ विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की. आरएलपी पार्टी के उम्मीदवारों ने आधा दर्जन सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस के गणित को बिगाड़ दिया. चुनाव में बेनीवाल की पार्टी को करीब 8 लाख वोट मिले.

बीजेपी ने गठबंधन धर्म निभाया
हनुमान की इसी ताकत के कारण बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में आरएलपी से गठबंधन किया. नागौर सीट पर हनुमान के साथ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ा और उन्हें करीब दो लाख वोटों से चुनाव जीतने में सफल हो गए. फिर हाल ही में संपन्न हुए उपचुनाव में बीजेपी ने गठबंधन धर्म निभाया. खींवसर की सीट हनुमान को दे दी. हनुमान के भाई नारायण कड़े मुकाबले में कांग्रेस के हरेन्द्र मिर्धा पर भारी पड़े और करीब पौने पांच हजार मतों से चुनाव जीतने में कामयाब रहे.
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बेनीवाल की टिप्पणियों से नाराज हुई बीजेपी
उसके बाद हनुमान ने जब पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं पर जो टीका टिप्पणियां की उससे पार्टी के नेता सख्त नाराज हो गए. बेनीवाल की ओर से उपचुनाव के बाद बीजेपी नेताओं पर लगाए गए आरोपों पर प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी मंगलवार को कहा कि हमने साफ तौर पर हनुमान को कहा है कि वे पार्टी नेताओं के प्रति मर्यादित भाषा का प्रयोग करें. बकौल पूनिया बीजेपी ने पूरी ताकत से खींवसर में काम किया.

अब कब जुड़ेगा साथ
इसका परिणाम यह हुआ कि बीजेपी ने निकाय चुनाव में उनसे किनारा कर लिया है, अब ये तो वक्त ही बताएगा कि आखिर हनुमान और बीजेपी का फिलहाल टूटा हुआ साथ आगे कब जाकर जुड़ेगा.

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First published: October 29, 2019, 5:51 PM IST
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