OPINION : राजस्थान में कहां है पुलिस, लॉकडाउन में अपराधियों का यह हाल तो अनलॉक में क्या होगा?

राजस्थान में लॉकडाउन के दौरान बढ़ते अपराध से पुलिस कार्यशैली पर उठे सवाल.

राजस्थान में लॉकडाउन के दौरान बढ़ते अपराध से पुलिस कार्यशैली पर उठे सवाल.

Crime in Rajasthan: राजस्थान में कोरोना की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान भरतपुर में डॉक्टर दंपति की हत्या और जिले की भाजपा सांसद पर आपराधिक हमले से पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल.

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अजब दुर्योग है. कोरोनाकाल में राजस्थान अनलॉक की ओर बढ़ रहा है. अभी अनलॉक हुआ नहीं है, इससे पहले ही प्रदेश में अपराध और अपराधी अनलॉक होने लगे हैं. अराजकता ऐसी कि सरेआम डॉक्टर दम्पति को गोलियों से भून दिया. सांसद तक पर असामाजिक तत्वों ने हमला बोला. अपराधों का शमन करने की जिम्मेदारी जिस पुलिस पर है, वह भी सुस्त पड़ी है. कहां है पुलिस? किसके लिए लगा हुआ है लॉकडाउन? क्या अपराधियों के लिए लॉकडाउन के कोई मायने नहीं हैं?

पहले बात भरतपुर की. जमानत पर छूटे डाॅक्टर दम्पति की सरेराह दो युवकों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी. खटारा बाइक पर आए हत्यारे इतने बेखौफ थे कि न मास्क लगाया और न हेलमेट पहना. कथित इंतकाम लेकर रॉन्ग साइड से लौट गए. लॉकडाउन के बावजूद किसी नाकाबंदी पर उन्हें किसी ने नहीं रोका. हत्या के दो घंटे बाद पहचान होने के बावजूद वे अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने भरतपुर में पुलिस अधिकारियों की बैठक लेने के बाद कहा, 'हर गलती सजा मांगती है.' यानी डॉक्टर दम्पति को उनकी गलती की सजा मिली. अब इन आरोपियों को भी सजा मिलेगी. सवाल यह उठता है कि सजा देने का अधिकार बेखौफ युवकों को किसने दिया? पुलिस यदि अपना काम पूरी ईमानदारी और शिद्दत से करती तो कथित हत्यारे डाक्टर दम्पति को जमानत ही न मिलती!

असामाजिक तत्व इतने बेखौफ हैं कि राजधानी जयपुर में सात माह की गर्भवती की भी अस्मत लूटने से बाज नहीं आए! विपक्षी भाजपा ने इसे लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला कि वह सिर्फ केंद्र सरकार को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर रही. महिला तहसीलदार को उसके विधायक अपशब्द कह रहे हैं और अलंबरदार मुंह में दही जमाए बैठे हैं. भाजपा की ही भरतपुर से सांसद रंजीता कोली की गाड़ी पर हमला असामाजिक तत्वों के बुलंद हौसलों की बानगी है. आधी रात को हमलावरों ने पत्थरों-सरियों से हमला बोल दिया. गाड़ी का शीशा टूटा और रंजीता बाल-बाल बचीं. भाजपा ने राज्य सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर हैशटेग ट्रेंड कराया. जनप्रतिनिधि पर हमले के बावजूद हमलावर आजाद हैं तो आम आदमी के साथ पुलिस कितना न्याय ​करेगी?

आम आदमी के साथ क्या होगा? इसका अंदाजा सवाई माधोपुर जिले में हिरासत में अधेड़ की मौत से हो जाता है. दो भाइयों के जमीनी विवाद में पुलिस ने हिरासत में लेकर एक भाई को इस कदर मारा कि उसकी मौत ही हो गई. जैसा कि होता है, पहले पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिश हुई और जब मामला बढ़ गया तो थानाधिकारी समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए. एसपी को स्वीकार करना पड़ा कि मृतक के सिर पर थाने में चोट लगी. सवाल फिर नश्तर बन रहे हैं​ कि ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलम्बन जैसी मामूली कार्रवाई से क्या होगा ? क्यों नहीं इनके खिलाफ इरादतन हत्या का केस दर्ज कर मुकदमा चलाया जाता है?
बेहद अफसोसनाक तथ्य है कि ये सारी आपराधिक वारदातें लॉकडाउन के दौरान ही हो रही हैं. लोगों को अनावश्यक बाहर निकलने पर पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन आजाद घूमते अपराधी उसकी पकड़ से बाहर हैं. अब जबकि प्रदेश के कई जिले अनलॉक होने के मुहाने पर हैं. एक जून से वे 21 जिले अनलॉक हो सकते हैं, जिनकी संक्रमण दर 5 फीसदी से नीचे है. सरकार इनके लिए गाइडलाइन जारी करेगी. क्या अपराधियों के संक्रमण को रोकने की भी कोई तैयारी है? क्या पुलिस के लिए भी कोई ऐसी गाइडलाइन जारी होगी, जिसमें वे तय समय में ही अपराधियों की धरपकड़ करें? कम से कम खुद अपराध और भष्टाचार करने वाले खाकी वर्दीधारियों के लिए तो कोई सख्त गाइडलाइन जारी होनी ही चाहिए! वरना अपने ही थाने से पुलिस वर्दी में इंसास राइफल चुराने जैसी घटनाएं भी सामने आती रहेंगी.

(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

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