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पायलट सरनेम की पीछे की क्या है कहानी? Sachin Pilot ने खुद किया खुलासा

पायलट सरनेम की पीछे की क्या है कहानी? Sachin Pilot ने खुद किया खुलासा

Rajasthan News: पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने अपने नाम के पीछे 'पायलट' सरनेम की कहानी का खुलासा किया है.

Rajasthan News: पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने अपने नाम के पीछे 'पायलट' सरनेम की कहानी का खुलासा किया है.

Sachin Pilot News: राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने अपने नाम के पीछे 'पायलट' सरनेम की कहानी का खुलासा किया है. पायलट के मुताबिक, उनके पिता राजेश पायलट एयरफोर्स में थे और 1980 में नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में आए थे. इंदिरा गांधी ने उन्हें भरतपुर से चुनावी मैदान में उतारा था. पायलट का कहना है कि जब पहली बार उनके पिता नामांकन फॉर्म भरने कलेक्ट्र पहुंचे तो रिटर्निंग अधिकारी ने उनको अपने नाम के आगे पायलट लगाने का सुझाव दिया था. तब उनके पिता ने शपथपत्र देकर अपने नाम के आगे पायलट सरनेम जोड़ लिया.

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जयपुर. राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) को कांग्रेस आलाकमान ने फिलहाल रणनीति के तहत यूपी चुनाव में पार्टी के लिए काम करने के निर्देश दिए हैं. मेरठ, गाजियाबाद और कन्नौज समेत यूपी के एक दर्जन से अधिक जिले ऐसे हैं जहां गुर्जर वोट हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. कांग्रेस आलाकमान चाहता है कि पायलट की छवि का लाभ पार्टी प्रत्याशियों को मिले. इसी बीच, सचिन पायलट ने ‘माय एफम’ के आरजे कार्तिक को दिए इंटरव्यू में अपने नाम के पीछे ‘पायलट’ सरनेम की कहानी बताई है. उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर बात की.

पायलट ने बताया कि उनके पिता एयरफोर्स में थे और करीब डेढ़ दशक तक फाइटर पायलट में कार्यरत रहे. 1980 में नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में आए. इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया और भरतपुर से चुनावी मैदान में उतारा. पायलट बताते हैं, “पहली बार जब मेरे पिताजी चुनाव का नामांकन फॉर्म भरने कलेक्ट्र पहुंचे तो रिटर्निंग अधिकारी ने उनको अपने नाम के आगे पायलट लगाने का सुझाव दिया. तब पिताजी शपथपत्र देकर अपने नाम के आगे पायलट सरनेम जोड़ लिया. चुनाव के बाद उनका नाम आधिकारिक तौर पर राजेश पायलट हो गया. जब स्कूल में मेरा और मेरी बहन का दाखिला कराया गया तो पायलट सरनेम जोड़ा गया.”

राजेश पायलट (Rajesh Pilot)) का वास्तविक नाम राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी था. बताया जाता है कि पूर्वी राजस्थान में भरतपुर का चुनाव लड़ने से पहले जब वह ग्रामीण इलाकों के दौरे पर गये तो वहां यह चर्चा थी कि ‘कोई पायलट आने वाला है’. बस उसके बाद उन्होंने अपना नाम राजेश पायलट कर लिया था. राजनीति में आने के बाद 1980 के दशक में गांधी परिवार के साथ राजेश पायलट की नजदीकियां बढ़ती गईं और उसके बाद वे राजीव गांधी सरकार में मंत्री बने. राजेश पायलट पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेहद करीब थे.

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शामिल रहे राजेश पायलट अपने करीबी लोगों के बीच अपने अतीत को याद करते हुए खुद को ‘दूधवाला’ बताया करते थे. वर्ष 1997 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए जब रेस हुई तो राजेश पायलट पूरे दमखम के साथ सीताराम केसरी के साथ भिड़ने को तैयार हुए थे. जबकि सीताराम केसरी का अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था. राजेश पायलट की किसान वर्ग में जबर्दस्त पैठ थी.

गौरतलब है कि पिता राजेश पायलट की मौत (11 जून, 2000) के बाद सचिन पायलट राजनीति में आए थे. 2003 में उन्होंने कांग्रेस ज्वॉइन की और दौसा से पहली बार सांसद चुने गए. यह वही सीट थी, जिससे उनके पिता पांच बार सांसद बने. सचिन पायलट की मां रमा पायलट भी दौसा से सांसद रह चुकी हैं. सचिन पायलट महज 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने.

सचिन पायलट ने राजनीति में आने से पहले बीबीसी में कुछ समय के लिए काम किया था. उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में भी काम किया है. फिर राजनीति में आए. पायलट ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि राजनीति में जो मन में है वो जुबान पर कभी नहीं आना चाहिए, यही इसका उसूल है. पायलट ने स्वीकार किया कि उन्हें कम उम्र में बहुत कुछ मिल गया है. उन्होंने यह भी कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी है कि अगली पीढ़ी को अपने अनुभव से परिचित कराएं.

Tags: Ashok Gehlot Vs Sachin Pilot, Rajasthan news, Sachin pilot

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