Rajasthan: कांग्रेस को क्यों चाहिए पायलट? सुलह के पीछे ये हैं 4 बड़ी वजह, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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Rajasthan: कांग्रेस को क्यों चाहिए पायलट? सुलह के पीछे ये हैं 4 बड़ी वजह, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
कांग्रेस के लिये पायलट केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी है.

Rajasthan Crisis: कांग्रेस संगठन और सरकार से बगावत करने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) की पार्टी में वापसी की राह बनाने में चार कारण बेहद अहम रहे हैं. ये वो कारण हैं जो अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार को बचाने से ज्यादा पार्टी के लिए काफी अहमियत रखते हैं.

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जयपुर. कांग्रेस पार्टी और सरकार से बगावत के बाद एकबारगी दरकिनार हुए सचिन पायलट (Sachin Pilot) की वापसी को तय करने में गुर्जर वोट बैंक, फारुक अब्दुल्ला परिवार का दबाव औऱ कांग्रेस की युवा ब्रिगेड ने अहम भूमिका निभाई है. पायलट की इस वापसी की सूत्रधार बनी प्रियंका गांधी. प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने ही कांग्रेस की जरूरत और रणनीति के लिहाज से सचिन पायलट की वापसी की इबारत लिखी, न कि गहलोत सरकार को बचाने या सहानूभूति या फिर सिर्फ पुराना संबध निभाने के लिए.

2022 और 2024 के लिए है जरूरत

राजस्थान में भले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) पायलट की वापसी न चाहते हों, लेकिन सचिन पायलट की जरूरत कांग्रेस को सिर्फ राजस्थान में नहीं, देश में भी है. क्योंकि कांग्रेस को पायलट चाहिए 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव की जंग के लिए. कांग्रेस को पायलट चाहिए 2024 में लोकसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए. प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस की 2022 के लिए जमीन तैयार करने के लिए मेहनत कर रही हैं. यूपी की 55 विधानसभा सीटों और 15 लोकसभा सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं.



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सबसे अहम गुर्जर वोट बैंक

पायलट के कांग्रेस को अलविदा कहने का मतलब 2022 और 2024 के चुनाव में कांग्रेस का गुर्जर-बहुल सीटों पर सीधा नुकसान होना भी है. सिर्फ यूपी ही नहीं, मध्य प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों पर पर भी गुर्जर वोट बैंक निर्णायक भूमिका में है. हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली समेत उतर भारत में गुर्जर मतदाता असरकारी भूमिका में हैं. राजस्थान में पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान की 30 सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक हैं. 2018 में राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता में आने की एक वजह 7 फीसदी गुर्जर वोट बैंक का कांग्रेस के पक्ष में आना भी रहा. पायलट की राजस्थान ही नहीं, देशभर में गुर्जर नेताओं पर पकड़ है. प्रियंका गांधी के सामने कांग्रेस के एक रणनीतिकार ने जब ये आंकड़े रखे तो प्रियंका गांधी ने पायलट की वापसी दिशा में एक सप्ताह पहले ही काम करना शुरू कर दिया था.

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फारुख अब्दुल्ला ने बनाई रणनीति

सचिन पायलट की घर-वापसी के पीछे दूसरी बड़ी वजह हैं फारुक अब्दुल्ला परिवार. फारुक अब्दुल्ला परिवार के गांधी परिवार और कांग्रेस नेताओं से रिश्ते अच्छे हैं. कश्मीर की सियासत में भी कांग्रेस अब्दुल्ला परिवार का साथ देती आई. फारुक और उमर अब्दुल्ला ने गुलाब नबी आजाद तथा अहमद पटेल के जरिए सचिन पायलट की वापसी की कोशिश शुरू की, जो देर से ही सही, लेकिन कामयाब हुई.

युवा ब्रिगेड ने प्रियंका को बताया भविष्य

तीसरी और अहम वजह है राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस की युवा ब्रिगेड. इस ब्रिगेड ने पायलट की वापसी के लिए गांधी परिवार पर दबाब बनाया. दीपेंद्र हुड्डा और भंवर जितेंद्र सिंह सचिन पायलट तथा प्रियंका गांधी के बीच बातचीत का जरिया बने. युवा ब्रिग्रेड ने दबाव बनाया कि अगर पायलट कांग्रेस छोड़ते हैं तो फिर कांग्रेस की बची-खुची युवा ब्रिगेड के किनारे होने से पार्टी की मुश्किल बढ़ सकती है. कांग्रेस सिर्फ बुजर्ग नेताओं की पार्टी रह जाएगी. ये राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों के लिए भविष्य की राजनीति के लिए ठीक नहीं.

यह भी रही है बड़ी वजह

पायलट के कांग्रेस में लौट आने के पीछे एक और वजह रही है. वह है कांग्रेस में एक लॉबी की गहलोत से नाराजगी. दिल्ली में संगठन महासचिव रहते गहलोत के 'शिकार' रहे नेता और राजस्थान के नेताओं की टोली ने गांधी परिवार को ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि गहलोत पर अति विश्वास और निर्भरता कांग्रेस के ज्यादा हित में नहीं.
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