रिश्वत के बदले अस्मत मांगने का मामला: गहलोत सरकार ACP कैलाश चंद बोहरा को क्यों नहीं कर सकी बर्खास्त, जानें वजह

गृह विभाग जन प्रकोष्ठ द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि गंभीर कदाचार के आरोपी आरपीएस कैलाशचंद बोहरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है.

गृह विभाग जन प्रकोष्ठ द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि गंभीर कदाचार के आरोपी आरपीएस कैलाशचंद बोहरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है.

यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल (UDH Minister Shanti Dhariwal) ने विधानसभा में कैलाश चंद्र बोहरा को बर्खास्त करने का ऐलान किया था.

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जयपुर. रिश्वत के बदले अस्मत मांगने वाले आरपीएस कैलाश चंद्र बोहरा (RPS Kailash Chandra Bohra) को सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है. कैलाश चंद्र बोहरा दूसरे पुलिस अधिकारी है, जिन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दी गई है. बोहरा से पहले केंद्र सरकार ने आईपीएस इंदु भूषण को जबरन सेवानिवृत्ति दी थी. अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने से आरपीएस कैलाश चंद बोहरा की सिर्फ नौकरी गई है. बोहरा को फायदे और लाभ सभी मिलते रहेंगे. यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल (UDH Minister Shanti Dhariwal) ने विधानसभा में कैलाश चंद्र बोहरा को बर्खास्त करने का ऐलान किया था.

सरकार ने यह वजह बताई

अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पश्चात सीसीए नियमों में कार्यवाही जारी कर नियमों के तहत बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी. चूंकि बोहरा ने 24 वर्ष 7 माह की सेवा पूर्ण की है एवं 52 वर्ष की आयु भी पूरी कर चुके हैं. अतः ऐसी परिस्थिति में अनिवार्य सेवानिवृत्ति होने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू होगी. उल्लेखनीय है कि संविधान के आर्टिकल 311 में प्रत्येक राजकीय कर्मचारी को सेवा से पृथक करने से पूर्व सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है.

गृह विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण
राज्य सरकार ने दुष्कर्म के आरोपी कैलाश चंद गौरव को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने पर स्पष्टीकरण जारी किया है. गृह विभाग जन प्रकोष्ठ द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि गंभीर कदाचार के आरोपी आरपीएस कैलाशचंद बोहरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है. राजस्थान पेंशन नियम 1996 के नियम 53(1) अन्तर्गत 15 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अथवा 50 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके राजकीय कार्मिक को उसकी अक्षमता के आधार पर लोकहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिये जाने का प्रावधान है. इस प्रावधान में बोहरा को तत्काल अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है. बोहरा के इस प्रकरण को समग्र रूप से देखते हुए सीसीए नियम 19 की कार्यवाही विचाराधीन रखते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है.

पहले भी हुए हैं पुलिस अधिकारी बर्खास्त

राज्य में महिला से दुराचार के मामले में फरार आईपीएस मधुकर टंडन को बर्खास्त किया गया था. फरारी के बाद टंडन को पुलिस तलाश नहीं कर पाई थी. मधुकर टंडन के बाद पंकज चौधरी दूसरे आईपीएस हैं जिन्हें बर्खास्त किया गया था. हालांकि, पंकज चौधरी को कैट से राहत मिली है और कैट ने बहाल करने के आदेश दिए हैं. फिलहाल पंकज चौधरी की बहाली नहीं हुई है.
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