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बदलाव की बयार: टूट रही हैं जातीय सरहदें, जयपुर में बढ़े अंतरजातीय विवाह
Jaipur News in Hindi

Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: December 28, 2019, 3:43 PM IST
बदलाव की बयार: टूट रही हैं जातीय सरहदें, जयपुर में बढ़े अंतरजातीय विवाह
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मोहब्बत जाति (Cast) की दीवार तोड़ देती है. सरहदों का फासला मिटा देती है. गरीबी अमीरी की खाई को खत्म कर देती है. यही वजह है कि इस बदलते दौर में राजस्थान (Rajasthan) में अंतरजातीय विवाहों (Interracial marriages) में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है.

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जयपुर. मोहब्बत जाति (Cast) की दीवार तोड़ देती है. सरहदों का फासला मिटा देती है. गरीबी अमीरी की खाई को खत्म कर देती है. यही वजह है कि इस बदलते दौर में राजस्थान (Rajasthan) में अंतरजातीय विवाहों (Interracial marriages) में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है. युवाओं ने जातीय बंधनों को तोड़ते हुए अंतरजातीय विवाह को काफी बढ़ाया दिया है. अकेले जयपुर जिले में ही इस वर्ष करीब 100 प्रेमी जोड़े (Lover couple) विवाह बंधन में बंधे हैं. यह बात दीगर है कि कइयों को विवाद के बाद रूठे परिजनों का आशीर्वाद मिल गया है और कइयों को अभी उसका इंतजार है.

खुले विचारों ने अब युवाओं को हिम्मत और हौंसला दे दिया है
ऐसा नहीं है कि अब प्यार की राह में कोई बाधा नहीं है. वो बाधाएं आज भी हैं. बस इतना है कि खुले विचारों ने अब युवाओं को हिम्मत और हौंसला दे दिया है. जयपुर की पायल और हिमांशु को जाति की दीवार तोड़कर विवाह बंधन में बंधने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. दोनों की जाति अलग अलग थी. दोनों जयपुर में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में साथ साथ काम करते थे. दोनों की पसंद एक जैसी थी. धर्म और अध्यात्म के प्रति जुड़ाव उन्हें और करीब ले आया.

राजस्थान जैसे प्रदेश में अभी भी काफी दिक्कतें हैं



दोस्ती आहिस्ता-आहिस्ता प्यार में तब्दील हो गई. दोनों ने शादी का मन बनाया, लेकिन जातीय बंधन आड़े आ गया. पायल सवर्ण तो हिमांशु दलित वर्ग से है. दोनों को अपने-अपने परिजनों को समझाने में काफी वक्त लगा. जब दोनों परिवार रजामंद हुए तो आखिरकार कोर्ट मैरिज भी हो गई. बकौल पायल अब भी लड़कियों को अपनी पसंद के शख्स से शादी करना राजस्थान जैसे प्रदेश में कोई आसान काम नहीं है.



खाप पंचायतें और पंच पटेल दिखाते हैं जातीय बहिष्कार का रौब
धर्म और जाति के बंधन की दीवार तोड़कर विवाह बंधन में बंधे अधिकांश जोड़ों के घरवाले बाद में राजी हो गए, लेकिन कइयों को अब भी माता पिता के आशीर्वाद का इंतजार है. समाज में बदलाव की इस बयार में युवा घरवालों की हर बात मानने को तैयार हैं, लेकिन अधिकांश शादी अपनी पसंद से करना चाहते हैं. कई बार घर वाले मान जाते हैं, लेकिन अधिकांश जगह परिवार अब भी प्यार के पंछियों के विरोध पर उतारू हो जाते हैं. रही सही कसर खाप पंचायतें और पंच पटेल जातीय बहिष्कार का रौब दिखाकर पूरी कर देते हैं. यही चिंता युवा जोड़ों को परेशान कर रही है.

 

नवयुवकों का बड़ा योगदान है
जयपुर एडीएम अशोक कुमार कहते हैं कि जातिगत बंधन टूट रहे हैं. नवयुवकों का बड़ा योगदान है. परिजन अब इसे स्वीकार करने लगे हैं. यह एक सुखद संकेत हैं. इसका अच्छा परिणाम होगा.

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First published: December 28, 2019, 3:40 PM IST
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