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जयपुर में युवा ने शुरू की 'मेरी पाठशाला', शिक्षा से जुड़े फुटपाथ पर कटोरा लेकर घूमने वाले बच्चे

जयपुर में मेरी पाठशाला में गरीब परिवार के बच्चे शिक्षा ले रहे हैं.

जयपुर में मेरी पाठशाला में गरीब परिवार के बच्चे शिक्षा ले रहे हैं.

कहते हैं जहां चाह है वहां राह है. राजस्थान के जयपुर की कच्ची बस्तियों में रहने वाले बच्चों की जिंदगी में शिक्षा की रोशन ...अधिक पढ़ें

    लोकेश कुमार ओला/जयपुर. झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे मोहम्मद आरिफ खान की ‘मेरी पाठशाला’ से बच्चे लगातार जुड़ते चले जा रहे हैं. जयपुर में रहने वाले मोहम्मद आरिफ ने चार माह पहले फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए फुटपाथ पर ही अपनी पाठशाला शुरू की थी. झुग्गी झोपड़ियों के पास ही वे रोजाना बच्चों की क्लास लेते हैं. कच्ची बस्तियों में रहने वाले इन बच्चों को पढ़ाने का सपना देखने वाले मोहम्मद आरिफ ने इन बच्चों और इनके माता पिता की आंखों में ढेरों सपने भर दिए है. इनके पास पढ़ने वाला हर बच्चा अब एक नई जिंदगी जीने का सपना देख रहा है.

    झुंझुनू जिले के तहसील नवलगढ़ के गोथरा गांव के रहने वाले मोहम्मद ने अपने दादा से प्रेरणा लेकर झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीब बच्चों का भविष्य संवारने का काम कर रहे हैं. मोहम्मद मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के नीचे बसी कच्ची बस्ती के बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं. बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह नहीं मिलने पर मोहम्मद ने बस्ती के पास फुटपाथ पर ही बच्चों की पाठशाला लगानी शुरू कर दी. आज वह 80 से ज्यादा गरीब बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं.

    फुटपाथ पर शुरू की पाठशाला
    जयपुर में नौकरी करने आये मोहम्मद ने गरीब बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने की ठानी. सुबह शाम ऑफिस आते-जाते समय बच्चों की स्थिति देखने पर बच्चों का भविष्य संवारने के काम शुरू किया. उन्होंने कई दिन लगातार बस्ती में जाकर लोगो को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जागरूक किया. लेकिन अधिकांश परिवार घुमन्तू परिवार होने के कारण स्कूल नहीं मिलने की बात कही. बच्चों में पढ़ाई की लगन को देखते हुए मोहम्मद आरिफ ने फुटपाथ पर ही स्कूल शुरू कर दी.

    बच्चों के परिजन पाठशाला के लिए झोपड़ी बनाएंगे
    मोहम्मद ने बताया कि जब उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई जगह नहीं मिली तो फुटपाथ पर ही पढ़ाना शुरू कर दिया. उसकी यह पाठशाला खुले आसमान के नीचे चल रही है. ऐसे में धूप और बारिश में काफी परेशानी होती है. अपने ही स्तर पर मोहम्मद इन बच्चों को पढ़ने के लिए किताबें-कॉपी और पेंसिल उपलब्ध करवा रहे हैं. इन बच्चों को नई किताबें, पेंसिल और कॉपी दी जाती है तो इनके चेहरे की खुशी देखते ही बनती है. इन बच्चों में पढ़ने की ललक भी दिखाई देती है. बच्चों की इस ललक को देखते हुए अब इनके अभिभावक भी पढ़ाने के लिए तैयार हो गए है. पढ़ाने की जगह नहीं होने के कारण जो समस्या आ रही है उसे दूर करने का काम कर रहे है. बांस से झोपड़ी बनाने का काम कर रहे परिजनों के बताया कि बच्चे पढ़ते समय परेशान होते है. इसके लिए झोपड़ी बनाई जाएगी. उसका खर्चा भी वे लोग ही उठाएंगे.

    शिक्षा से जुड़ेंगे तो बनेगा भविष्य
    मोहम्मद ने बताया किइन गरीब बच्चों को पढ़ा कर उन्हें बहुत सुकून मिलता है. वह प्राइवेट कम्पनी में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर काम करते है. दादा ने पढ़ा लिखाकर इस काबिल बनाया है. कुछ बेहतर करने के लिए अच्छी और पॉजिटिव सोच होना जरूरी है. यही सोचकर इन बच्चों की जिम्मेदारी उठाई है. शुरू में जब मैं स्लम एरिया में बच्चों को पढ़ाने आया था तो उन्हें न रहने का सलीका था और न कपड़े पहनने का. बच्चे रोज नहाते तक नहीं थे, लेकिन आज बच्चे रोज नहाकर पाठशाला आते हैं. सुबह 8 बजे से 10 बजे तक क्लास लेते है. उसके बाद शाम को 7 बजे से रात 10 बजे तक क्लास होती है. जिसमे एक घण्टे डांस और अन्य एक्टिविटी कराई जाती है.

    Tags: Jaipur news, Rajasthan news

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