चारागाह भूमि पर अतिक्रमण मामले में हाई कोर्ट ने दिए यथास्थिति के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट.
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मामलें में पैरवी करने वाले अधिवक्ता अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी चारागाह भूमि के किसी के भी नाम नामांतरण नहीं खोला जा सकता है.

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राजस्थान हाई कोर्ट ने करीब 53 साल पहले हुए चारागाह भूमि के आवंटन के मामले में आज यथास्थिति के आदेश दे दिए हैं. जस्टिस के.एस झवेरी की खंडपीठ ने गोविंदगढ़ पंचायत समिति के सदस्य नरेंद्र शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.

दरसअसल नरेंद्र शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि गांव की 75 बीघा जमीन 1964 में एक सरकारी कर्मचारी मोहन सिंह तथा अन्य के नाम की गई थी. इसके बाद नामांतरण तत्कालीन विधायक भैरो सिंह शेखावत की पत्नी सूरज कंवर के नाम खोल दिया गया.

उन्होंने बताया कि अब इस जमीन का कुछ भाग विधायक नरपत सिंह राजवी और उनके परिजनों ने किसी फर्म को बेच दिया जोकि जमीन पर निर्माण कार्य करवा रही है. वहीं मामलें में पैरवी करने वाले अधिवक्ता अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी चारागाह भूमि के किसी के भी नाम नामांतरण नहीं खोला जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह कानूनी रूप से अवैध है लिहाजा हमने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी है.



 
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