राजस्थान के नौ जिले सूखे की चपेट में, पानी पर ताला लगाकर देना पड़ रहा है पहरा

राजस्थान के ये नौ जिले जैसलमेर, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर, चूरू और पाली सूखे की चपेट में आ चुके हैं.

स्‍वतंत्र मिश्र | News18 Rajasthan
Updated: June 6, 2019, 7:07 PM IST
स्‍वतंत्र मिश्र | News18 Rajasthan
Updated: June 6, 2019, 7:07 PM IST
राजस्थान के चुरू का तापमान इस साल 50 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया जा चुका है. चुरू देश का सबसे गर्म शहर बन गया है. हमने दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषित शहरों की सूची में अपना नाम बहुत धमाकेदार तरीके से पहले ही दर्ज करा लिया है. अब हम इस इंतजार में हैं कि कुछ सालों में सबसे गर्म शहरों में अपना नाम पहले नंबर पर दर्ज हो जाए. वैसे, दुनिया के 15 सर्वाधिक गर्म शहरों की सूची में 8 शहर भारत के ही हैं. गर्मी की बढ़ रही भयावहता के चलते पानी की किल्लत भी तेजी से बढ़ रही है. राजस्थान के ये नौ जिले जैसलमेर, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर, चूरू और पाली सूखे की चपेट में आ चुके हैं. इन जिलों में बोरवेल, नलकूप, कुएं, ताल और तलैये पूरी तरह से निपट चुके हैं. राजस्थान के इन नौ जिलों के 8 शहरों और 3,161 ढाणियों (गांव) में चार दिन में एक बार पानी मिल पा रहा है. इन शहरों, कस्बों और ढाणियों में पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए 5 से 10 किमी दूर से पानी पहुंचाया जा रहा है.

इन शहरों में इतने-इतने दिन में एक बार ही आता है पानी

प्रदेश के बांदीकुई, बलोतरा, डेगाना व गुलाबपुरा, सिवाना, समदरी, भीनमाल, जालोर ऐसे शहर-कस्बे हैं, जहां चार दिन में एक बार पानी आ रहा है. राजस्थान के 31 शहर और कस्बे ऐसे हैं, जहां तीन दिन में एक बार पानी मिल रहा है. इन शहरों में अजमेर, पुष्कर, मकराना, पाली, सिरोही, माउंट आबू भी शामिल हैं. राज्य के 60 कस्बे ऐसे हैं, जहां दो दिन में एक बार पानी मिल पाता है.

यहां पानी का महत्व सोने से ज्यादा है तभी ताले में सहेजकर रखते हैं

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कई गांवों में पानी की चोरी रोकने के लिए ड्रम या पानी की हौज में पानी इकट्ठा करके उसे ताले में बंद करके रखते हैं. भीलवाड़ा के लोगों का कहना है कि यहां पानी के टैंकर 10-12 दिनों के अंतराल पर आते हैं. पानी का इस इलाके में भारी किल्लत है इसलिए यहां रात के समय में पानी चोरी की घटना को अंजाम दिया जाता है. ऐसे में इनके लिए पानी का महत्व सोने और चांदी से ज्यादा है.

यहां प्यास के चलते मर चुके हैं 300 से ज्यादा जानवर

जोधपुर के जाजीवाल गांव में दो वर्षों से पानी का घोर संकट है. पानी की कमी के चलते इस गांव में अबतक 300 से ज्यादा जानवरों के प्राण पखेरू हो चुके हैं.
पानी के मारे जंगलों में भी पशु-पक्षी हो रहे बेहाल

रणथम्भौर नेशनल पार्क में राजबाग पद्म तालाब समेत कई झीलों का पानी तीन-चौथाई खत्म हो चुका है. पानी के मारे रणथम्भौर के वन्य जीव-जंतु अपनी प्यास बुझाने के लिए आसपास के गांव और शहरों तक भटकते हुए पहुंच रहे हैं.

रणथम्भौर नेशनल पार्क को 10 जोन में बांटा गया है. इनमें से महज 3 और 4 नंबर जोन में ही वन्यजीवों के लिये थोड़ा बहुत झीलों में पानी बचा रह गया है. इसके अलावा आठ जोन में विचरण करने वाले वन्यजीव पानी की समस्या से बुरी तरह त्रस्त हैं. वन विभाग जानवरों की प्यास बुझाने के इंतजामों का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन सच यह है कि ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं.

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