Rajasthan: रेतीले धोरों में वैभव, विरासत, कला और संस्कृति का अनूठा संगम है 'गोल्डन सिटी' जैसलमेर
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Rajasthan: रेतीले धोरों में वैभव, विरासत, कला और संस्कृति का अनूठा संगम है 'गोल्डन सिटी' जैसलमेर
जैसलमेर का यह सोनार किला शहर के मध्य में स्थित है. शहर की एक चौथाई आबादी इस किले के अंदर रहती है.

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर (India-Pakistan International Border) पर स्थित जैसलमेर ऐतिहासिक महत्व (historical significance) का वह जिला है जहां विरासत के साथ-साथ आधुनिक भारत (Modern india) का बेदह अहम पहलू जुड़ा हुआ है.

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जैसलमेर. पश्चिमी राजस्थान में रेतीले धोरों के बीच स्थित जैसलमेर वैभव, कला और संस्कृति का बेहतरीन संगम है. प्राचीन काल में 'माडधरा' अथवा 'वल्लभमण्डल' के नाम से प्रसिद्ध रहा यह शहर आज विश्वभर में गोल्डन सिटी के नाम से प्रसिद्ध है. लोक कला, संस्कृति और अपने अद्भूत इतिहास को समेटे हुये जैसलमेर देश-दुनिया का बेहद खूबसूरत और शांत ट्यूरिस्ट स्पॉट होने के साथ ही राजस्थान की लोक कला की हद्य स्थली भी है. यहां के कलाकारों ने मरुधरा की लोक कला और संस्कृति को विश्व के कोने-कोने में फैलाया है. यहां की मिट्टी के कण-कण में सादगी और भोलापन है. जैसलमेर का सोनार किला वर्ल्ड हेरिटेज साइट है. यही वजह है कि यह देसी और विदेशी ट्यूरिस्टों की पहली पसंद है.

भाटी राजा जैसल ने की थी इसकी स्थापना
मरू शहर जैसलमेर की स्थापना 1156 ई. में भाटी राजा जैसल ने की थी. यहां का सोनार किला राजस्थान के श्रेष्ठ धान्वन दुर्गों में माना जाता है. जैसलमेर के इस सोनार किले का निर्माण 1156 में किया गया था. यह राजस्‍थान का दूसरा सबसे पुराना राज्‍य माना जाता है. ढाई सौ फीट ऊंचा और सेंट स्‍टोन के विशाल खण्‍डों से बने 30 फीट ऊंची दीवार वाले इस किले में 99 प्राचीरें हैं. इनमें से 92 का निर्माण 1633 और 1647 के बीच कराया गया था. इस किले के अंदर मौजूद कुंए पानी का निरंतर स्रोत प्रदान करते हैं.

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एक चौथाई आबादी किले के अंदर रहती है


रावल जैसल द्वारा निर्मित यह किला 80 मीटर ऊंची त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है. इसमें महलों की बाहरी दीवारें, घर और मंदिर कोमल पीले सेंट स्‍टोन से बने हैं. इसकी संकरी गलियां और चार विशाल प्रवेश द्वार हैं जिनमें से अंतिम एक द्वार मुख्‍य चौक की ओर जाता है. वहां पर महाराजा का पुराना महल है. जैसलमेर जिले की लगभग एक चौथाई आबादी इसी किले के अंदर रहती है. यहां अखे पोल, गणेश पोल, सूरज पोल, और हवा पोल के जरिए पहुंचा जा सकता है. यहां अनेक सुंदर हवेलियां और जैन मंदिरों के समूह हैं जो 12वीं से 15वीं शताब्‍दी के बीच बनाए गए थे.

ऐतिहासिक महत्व के ये स्पॉट इसे बनाते हैं खास
गोल्डन सिटी का केवल किला ही नहीं, बल्कि शहर और इसके बाहर भी बहुत से ऐसे स्पॉट है जो इसे दूसरे ट्यूरिस्ट स्पॉट से अलग करते हैं. राजस्थान पर्यटन के त्रिकोणीय सर्किट के इस अहम शहर जैसलमेर को मरुधरा में आने वाला हर देसी और विदेशी अपनी विजिट में शामिल करता है. जैसलमेर शहर में स्थित नथमल की हवेली, सालिम सिंह की हवेली और पटवों की हवेली यहां की समद्ध वास्तुकला की परिचायक हैं. गोल्डन सिटी का मंदिर पैलेस, गड़ी सागर तालाब, अमर सागर लेक, वॉर म्यूजियम और जैन मंदिर जैसलमेर को बेहद खास बनाते हैं. शहर से बाहर डेजर्ट पार्क, बड़ा बाग, सम के धोरे, कुलधरा, प्रसिद्ध तनोट माताजी का मंदिर, रामदेवरा (बाबा रामदेव का मंदिर) और लोगोंवाला वॉर म्यूजियम को देखने के लिये सात समंदर पार से भी लोग आते हैं.

Rajasthan: रेतीले धोरों में वैभव, विरासत, कला और संस्कृति का संगम है 'गोल्डन सिटी' जैसलमेर Rajasthan- Jaisalmer 'Golden City' is a confluence of splendor-heritage- art and culture in the sandy areas- Turism- Tourist Circuit- Forts-Havelis- Temples
यहां के लोग बेहद सीधे साधे और लोककला को संरक्षित करने वाले हैं.


दुनियाभर में प्रसिद्ध है जैसलमेर का डेटर्ज फेस्टिवल
जैसलमेर का डेटर्ज फेस्टिवल दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यह जनवरी और फरवरी में आयोजित होता है. इसे देखने के लिये विदेशी पर्यटक काफी ललायित रहते हैं. वहीं अगस्त माह में आने वाली भादवे की बीज पर यहां रामदेवरा में लोकदेवता बाबा रामदेव का मेला भरता है. इस मेले में प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों से भी लोग शामिल होने के लिये आते हैं. इसके लिये पदयात्रायें की जाती है. जैसलमेर देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों से बस, ट्रेन और हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है. पर्यटकों के लिये लग्जरी 5 स्टार होटल और तमाम तरह की दूसरी सुविधायें मौजूद हैं.

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सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है
यह जिला देश के लिये सामरिक दृष्टि से काफी अहम है. भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित जैसलमेर एयरफोर्स का बड़ा स्टेशन है. धोरों में सैंकड़ों मील में फैले बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) का कड़ा पहरा रहता है. दूर-दूर तक रेतीले धोरों में फैले इस बॉडर्र की चौकसी के लिये बीएसएफ के जवान रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंट पर गश्त करते हैं. यह बीएसएफ और सेना को बड़ा स्टेशन है. यहां चांधण फायरिंग रेंज सेना ही अहम रेंज हैं. भारत के चिर परिचित प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को देखते हुये यहां तमाम बड़ी और अहम सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहती हैं.

पोकरण ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
जैसलमेर विरासत ही नहीं आधुनिक भारत के निर्माण में भी अहम भूमिका रखता है. इस जिले के धोरों में स्थित पोकरण ही वह स्थान है जहां भारत ने परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था. परमाणु नगरी के रूप में पहचान रखने वाले पोकरण में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में 18 मई 1974 में किया गया था. उसके बाद 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में दूसरी बार परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अंचभे में डाल दिया था.

जैसलमेर का सोनार किला पर्यटकों को काफी लुभाता है.


केर-सांगरी की सब्जी और बाजरे की रोटी के दीवाने हैं यहां के बाशिंदे
कलात्मकता और भव्यता की धनी धोरों की धरती जैसलमेर का खान-पान भी बेहद निराला है. मरुप्रदेश की विषम परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाले बांशिदें जहां केर-सांगरी की सब्जी और बाजरे की रोटी के दीवाने हैं. वहीं सरहदी जिले की प्रसिद्ध घोटुआं मिठाई की मिठास भी बेहद अनोखी है. बूंदी को कूटकर बनाई जाने वाली इस स्वादिष्ट मिठाई का कोई सानी नहीं है. बेसन व घी से बनने वाली मिठाई की स्वादिष्टता को कोई मुकाबला नहीं है.

सीधा-साधा देसी पहनावा यहां की सादगी को दर्शाता है
सरहदी इस जिले में जहां पुरुषों का पहनावा धोती-कुर्ता और साफा है, वहीं महिलाओं में घाघरा, कुर्ती, कांचली और ओढ़नी का प्रचलन है। यहां की मुस्लिम आबादी चांदी के गहने पहनती हैं वहीं अन्य लोगा सोने और चांदी के आभूषणों का उपयोग करते हैं। आभूषणों में मुख्यया गले में पहने जाने वाली हंसली, पैरों कड़े, नाक में नथ और हाथों में अंगुठियों धारण करते हैं.
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