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पोकरण: पानी को तरसते इलाके में फकीर बनाम योगी के जरिए हिंदू-मुस्लिम का तड़का

पोकरण: पानी को तरसते इलाके में फकीर बनाम योगी के जरिए हिंदू-मुस्लिम का तड़का

भारत पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के जैसलमेर जिले की पोकरण सीट पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी है.

    राजस्थान की पोकरण विधानसभा का रण इस बार सियासत से ज्यादा धर्म के रंगा में रंगा है. देश के शक्ति परीक्षण की धरती के केंद्र राजस्थान में चुनावी गर्मी से पारा चढ़ा हुआ है. पोकरण कांग्रेस और बीजेपी के शक्ति परीक्षण की भूमि बन चुका है. इसी धरती ने तीन परमाणु परीक्षण से भारत का नाम बुलंद किया. इस बार पोकरण तय करेगा कि हिन्दू राष्ट्रवाद की हवा इस धरती से बहेगी या नहीं. पोकरण की प्रयोगशाला में इस बार सियासत का रसायन है हिन्दू राष्ट्रवाद और कांग्रेस का मुस्लिम ध्रुवीकरण का दांव. पोकरण विधानसभा की चुनावी लड़ाई संत बनाम फकीर हो गई है.

    भारत पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के जैसलमेर जिले की पोकरण सीट पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी है. बीजेपी ने इस सीट से नाथ संप्रदाय के प्रसिद्ध तारतरा मठ के महंत प्रतापपुरी महाराज को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने सिंधी मुस्लिम धर्मगुरु गाजी फकीर के बेटे सालेह मोहम्मद को टिकट दिया है.

    बीजेपी प्रतापपुरी को मारवाड़ यानी पश्चिम राजस्थान के योगी के रुप में पेश कर रही है. सवाल ये कि क्या बीजेपी प्रतापपुरी के जरिए सत्ता विरोधी लहर पर राष्ट्रवाद की लहर को हावी कर पाएगी.

    नाथ संप्रदाय के नामी संन्यासी प्रतापपुरी के चुनावी रण में कूदने के साथ ही पोकरण चुनाव का रंग बदलने लगा है. पोकरण से करीब चालीस किलोमीटर दूर मेवड़ा गांव में जब रिपोर्टर पहुंचता है तो देखता है कि प्रतापपुरी रैली के लिए आने वाले हैं. महंत के इंतज़ार में सजा धजा एक घोड़ा तैयार है. नगाड़े बज रहे हैं और देशप्रेम के नारे फिजा में चुनावी रंग घोल रहे हैं. चुनावी उम्मीदवारों का स्वागत मालाओं से होता है, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार प्रतापपुरी जब इलाके में पहुंचते हैं तो लोग श्रद्धा से झुक जाते हैं और चरणों गिर जाते हैं.

    प्रतापपुरी इसके बाद घोड़ा पर बैठते हैं और किसी लड़ाके की तरह लगाम खींचते हैं. मारवाड़ यानी पश्चिम राजस्थान में घोड़ा शक्ति का प्रतीक है और प्रतापपुरी ने भी शक्ति के प्रतीक घोड़े पर बैठने में देर नहीं की. गांववाले कलश पूजा के बाद महंत को सभा स्थल पर लाए.फिर गद्दी पर बैठाकर ग्रामीणों ने एक संत के रुप में आरती उतारी और जमकर नारे लगे. नारे इस तरह है- 'देखो-देखो कौन आया बाड़मेर का योगी आया.'

    नारों के जरिए बीजेपी प्रत्याशी महंत प्रतापपुरी की तुलना यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से की जाती है. ग्रामीणों ने प्रतापपुरी को एक तराजू पर बैठाकर गुड़ से तौला. इसके बाद प्रतापपुरी के चुनाव संयोजक ने मोर्चा संभाल लिया और चुनाव को धर्म और अधर्म की लड़ाई करार दिया.


    चौपाल पर एक शख्स लोगों को समझा रहा है कि वोट देना है और लोग 'जय हो' कह रहे हैं. वह शख्‍स कह रहा है कि ये पार्टी या व्यक्ति की लड़ाई नहीं बल्कि धर्म और अधर्म की लड़ाई है. ये लड़ाई आचरण, स्वाभिमान, चरित्र और संस्कार की है. सामने वाले के चरित्र पर गौर करें, उसे लोग फकीर कहते हैं और मैं कहता हूं फकीर कहलाने के लायक भी नहीं है. ये लड़ाई योगी और भोगी की लड़ाई है.

    फिर महंत प्रतापपुरी ने खुद के चुनाव को पोकरण में तीन परमाणु परीक्षण के बाद चौथा परीक्षण करार दिया. वे कहते हैं, 'पोकरण में तीन परमाणु परीक्षण हुए. ये चौथा परीक्षण है. इस चुनाव पर देश ही नहीं दुनिया की नजर है. राष्ट्र निर्माण का काम करना है.'

    बीजेपी पश्चिम राजस्थान में महंत प्रतापपुरी के जरिए चुनाव में आस्था का तड़का लगाना चाहती है. बीजेपी की कोशिश है कि उनके मठ के प्रभाव वाले इलाके में धर्म के नाम पर वोट लिए जाएं. बाड़मेर के चौहटन में नाथ संप्रदाय का तारतरा मठ है. मठ का प्रभाव पश्चिम राजस्थान में है. पोकरण में एक लाख 94 हजार की आबादी में से 54 हजार मुस्लिम हैं. जैसलमेर ज़िले में 25% मुस्लिम आबादी है.


    पाकिस्तान से सटे इलाके में RSS का एक संगठन लंबे समय से काम कर रहा है. बॉर्डर से सटे गांवों में राष्ट्रवाद की मुहिम चलाई जा रही है. बीजेपी का मकसद केवल पोकरण सीट जीतना नहीं बल्कि बॉर्डर इलाक़े में महंत के ज़रिए हिन्दू राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद करना है. इससे पश्चिम राजस्थान की बीस सीटों पर असर हो सकता है.

    बीजेपी उम्‍मीदवार प्रतापपुरी और कांग्रेस उम्‍मीदवार सालेह मोहम्‍मद.


    बीजेपी के इस समीकरण को कांग्रेस प्रत्याशी के चलते भी लहर मिलने की संभावना है. मंहत प्रतापुरी के सामने चुनाव लड़ रहे हैं सालेह मोहम्मद. जो सिंधी मुस्लिम धर्म गुरु गाजी फकीर के बेटे हैं. सिंधी मुस्लिम धर्मपीठ पाकिस्तान के सिंध में पीर पगारों में है. बीजेपी का आरोप है कि ग़ाज़ी फ़कीर पाकिस्तान से मुसलमान वोट डलवाने का फ़तवा लाते हैं. बीजेपी इसे हिंदू धर्मगुरु से मुस्लिम धर्मगुरु के बेटे का मुक़ाबला क़रार दे रही है.

    इस इलाके में सबसे बड़ा मुद्दा रहता है पीर पगारों का फतवा इस बार किस पार्टी को वोट देने का है. फकीर परिवार की जैसलमेर की सियासत में गहरी पकड़ है. बीजेपी के पास हिन्दुत्व का कार्ड है तो सालेह मोहम्मद के सिर पर सिंधी मुसलमानों की आस्था के केन्द्र पीर पगारों का हाथ है. इसीलिए मुद्दा विकास नहीं बल्कि जातीय गोलबंदी और धार्मिक ध्रुवीकरण है. इसके आगे जनता के मुद्दे चुनाव में छूट रहे हैं.


    कांग्रेस प्रत्याशी सालेह मोहम्मद 2008 में पोकरण से विधायक रह चुके लेकिन 2013 के चुनाव मोदी लहर मे बीजेपी के शैतान सिंह से हार गए. सालेह मेहम्मद को इस बार काफी उम्मीद है लेकिन मुकाबला एक महंत से है. वे जनसभाओं में भी लोगों को समझा रहे हैं कि कैसे बीजेपी की कोशिश को नाकाम करना है. उनकी कोशिश है कि किसी तरह ध्रुवीकरण को थामकर दलित वोट बैंक में सेंध लगाई जाए. बॉर्डर जिले में सिंधी मुस्लिमों की बड़ी आबादी है.

    वे कहते हैं, 'हिंदू कार्ड नहीं चलेगा. महंत बाहरी है. मैं यहां का हूं. मुस्लिम ही नहीं दलित भी हमारे साथ है. हार के डर से बीजेपी ने महंत को उतारा.'

    वहीं इस क्षेत्र में पानी और रोजगार सबसे बड़ी समस्‍याएं हैं. मेड़वा गांव के लोगों ने बताया कि मजदूरी, पानी, रोजगार अभी ये दिक्कत है. लक्‍खूराम सुतार ने बताया, 'महंत को उतारना सही है. जनता का जो अच्छा काम करेगा उसको लाएंगे. हमारे गांव में पहले कोई काम नहीं हुआ. अभी उम्मीद है प्रतापपुरी से कुछ काम होगा. इनके(प्रतापपुरी) के तो नेता पैर पड़ते हैं तो ये विकास करेंगे. हिन्दू मुसलमान तो है थोड़ा बहुत, लेकिन हरेक की ऐसी सोच नहीं होती.'

    वहीं एक अन्‍य शख्‍स महंत के चुनाव में उतरने पर कविता के जरिए तंज कसता है. उसने कहा, 'साधु संत की ओट, मांग रहे हैं नुगरे वोट. मत देना नुगरों को वोट, नुगरे रखते मन में खोट.'

    पोकरण के बाटका गांव में महिलाओं ने बताया कि पानी की बड़ी परेशानी है. गाएं मर रही हैं. टंकिया बनी है लेकिन पानी तो आए. वहीं एक स्‍कूल जाने वाली लड़की ने बताया कि स्कूल और गांव में पानी नहीं है. महिलाओं ने कहा कि वोट धर्म के नाम पर नहीं विकास के नाम पर देंगे.

    इसी इलाके के समीर खान बताते हैं, 'पानी बहुत दूर से लाते हैं. पानी के बिना गायें मर रही हैं. जो पानी नहीं लाएगा तो वोट नहीं देंगे. नेताओं का मुद्दा पानी का नहीं है. वोट ले लेते हैं और पानी देते नहीं. जाति धर्म करके वोट छीन लेते हैं और पानी की समस्या वही की वही रहती है.'

    Tags: BJP, Congress, Hindu-Muslim, Jaisalmer news, Rajasthan Assembly Election 2018, Rajasthan elections

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