जैसलमेर: पर्दाप्रथा को चुनौती देकर पोकरण विधानसभा क्षेत्र की पहली महिला डॉक्टर बनी प्रियंका कंवर

प्रियंका ने बताया कि उसने बचपन से ही डॉक्टर का लिबास पहनकर देश सेवा और मानव सेवा करने का जो सपना देखा था वह साकार हो गया है.

प्रियंका ने बताया कि उसने बचपन से ही डॉक्टर का लिबास पहनकर देश सेवा और मानव सेवा करने का जो सपना देखा था वह साकार हो गया है.

Women empowerment in Jaisalmer: राजस्थान में पिछड़े इलाकों में शुमार जैसलमेर जिले की बहू प्रियंका कंवर पर्दाप्रथा को चुनौती देकर डॉक्टर बनी है. गांव की बहू की इस उपलब्धि पर ग्रामीण में काफी खुश हैं. प्रियंका पोकरण विधानसभा क्षेत्र में डॉक्टर बनने वाली पहली महिला है.

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सांवलदान रतनू

जैसलमेर. पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर रेतीले धोरों के बीच बसे जैसलमेर जिले (Jaisalmer district) के पोकरण क्षेत्र की पहली महिला ने डॉक्टर बनकर महिला सशक्तिकरण (Women empowerment) की तरफ कदम बढ़ाया है. सदियों से चली आ रही परपंराओं से बंधा यह इलाका महिला शिक्षा की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है. ऐसे मे इस इलाके के सांकड़ा गांव (Sankra Village) की बहू जब डॉक्टर बनी तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. इस इलाके से पहली महिला डॉक्टर (First lady doctor) बनने वाली यह महिला है प्रियंका कंवर.

घूंघट और पर्दाप्रथा को चुनौती देकर डॉक्टर बनी प्रियंका अब यहां महिला शिक्षा के मामले में रोल मॉडल बनकर उभर रही है. एक समय था जब यहां राजपूत समाज के साथ साथ अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपनी बेटियों को घर के चूल्हे चौके तक ही सीमित रखते थे. यहां तक की इस इलाके में बेटी के जन्म को भी अभिशाप माना जाता था.

पति भी प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं
प्रियंका ने हाल ही में एमबीबीएस की डिग्री पूरी की है. प्रियंका ने जो मुकाम हासिल किया उससे पूरे गांव और जैसलमेर जिले को गर्व है. ऐसा मुकाम हासिल करने वाली प्रियंका पोकरण विधानसभा क्षेत्र की पहली महिला बताई जा रही है. प्रियंका के पति देरावर सिंह राठौड़ भी प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और वे जैसलमेर मुख्यालय पर ही पदस्थापित हैं.

चार साल पहले ब्याह कर आईं थी सांकड़ा गांव

डॉ. प्रियंका ने बताया कि उसने बचपन से ही डॉक्टर का लिबास पहनकर देश सेवा और मानव सेवा करने का जो सपना देखा था वह आज साकार हो गया है. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने ससुर शिक्षाविद् गिरधरसिंह राठौड़, अपने पिता जेतसिंह पड़िहार (सेवानिवृत्त एक्सईएन), मां और अपने इष्ट देव को दिया है. प्रियंका की शादी 4 वर्ष पूर्व सांकड़ा गांव में हुई थी. शादी के 4 वर्ष बाद प्रियंका ने यह सफलता हासिल की है. प्रियंका की इस उपलब्धि पर उसे बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है.

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