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Rajasthan में कश्मीरी सेब जैसा बेर, 8 फीट लंबे पौधे पर आते हैं 80 किलो फल, जानिए खासियत

Rajasthan में कश्मीरी सेब जैसा बेर, 8 फीट लंबे पौधे पर आते हैं 80 किलो फल, जानिए खासियत

Jalore News: जालोर के किसान ने हूबहू सेब जैसे रंग और मीठास के बेर की खेती की है.

Jalore News: जालोर के किसान ने हूबहू सेब जैसे रंग और मीठास के बेर की खेती की है.

Jalori Apple of Rajasthan: राजस्थान (Rajasthan) के जालोर (Jalore) के एक किसान ने हूबहू सेब जैसे रंग और उससे भी मीठे बेर की खेती की है. किसान भीम सिंह दहिया का कहना है कि सेब से आकार में छोटे इस बेर की कीमत 50 से 80 रुपए प्रति किलो है. एक पौधे पर 70 से 80 किलो फल आते हैं. यह पौधा 18 महीनों में फल देने लगता है. एक हेक्टेयर में 500 पौधे लगा सकते हैं. पौधा 8 फीट तक लंबा होता है. इसकी खेती में 10 किलो देशी खाद और 20 किलो मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है.

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श्याम सुंदर बिश्नोई.

जालोर. राजस्थान (Rajasthan) के जालोर (Jalore) जिले के सुराणा गांव के एक किसान के खेत में हूबहू सेब जैसे रंग और उससे भी मीठी मिठास वाले बेर के 250 पौधे लगे हुए है. ऐसा रेड एपल कश्मीरी बेर सिर्फ सुराणा गांव के एक बागान में देखा जा सकता है. यहां के किसान भीम सिंह दहिया ने ऐसे 250 कश्मीरी पौधे लगाए थे, जो कड़ाके की ठंड में विकसित होकर पैदावार देने लगे हैं. सेब से आकार में छोटा 30 से 40 ग्राम के इस बेर के भाव 50 से 80 रुपए प्रति किलो है. किसान दहिया के अनुसार एक पौधे पर 70 से 80 किलो फल आते हैं. यह पौधा 18 महीनों में फल देने लगता है. एक हेक्टेयर में 500 पौधे लगा सकते हैं. अनूठे स्वाद की वजह सिर्फ आर्गेनिक खाद का उपयोग है.

भीम सिंह दहिया का कहना है कि मई से ही तैयारी कर 5 मीटर के फासले पर गड्ढा कर 10 किलो देशी खाद और 20 किलो मिट्टी को अच्छी तरह से दबा दिया जाता है. प्रति पौधे में 10 लीटर पानी देना होता है. पौधा 8 फीट तक लंबा होता है. कलम विधि से विकसित यह पौधे पश्चिमी बंगाल से 120 रुपए प्रति नग लाए थे.

पानी की कमी थी, इस वजह से बागवानी का किया रुख
सुराणा निवासी किसान भीमसिंह दहिया के अनुसार भूजल स्तर गिरने से बागवानी खेती को अपनाया है. इसमें पानी की जरूरत कम रहती है. मेहनत भी कम लगती है. तीन साल के पौधे होने से खाद व पानी की जरूरत कम रहती है. ऑर्गेनिक खाद से 18 महीने में आने लगे फल, 50 से 80 रु. प्रति किलो बिक रहे है.

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आपको बता दें कि जालोर ज़िले में गिरते भूजल स्तर के चलते अब किसान नवाचार करते हुए बाग़वानी खेती की ओर रुख़ कर रहे हैं. इसके चलते ज़िले में अनार, बेर सहित अन्य प्रकार की बाग़वानी सैकड़ों एकड़ जमीनों पर देखने को मिल रही है. इसके चलते अब किसानों की आर्थिक दिशा में भी सुधार होता दिखाई दे रही है. ऐसे में ज़िले में बाग़वानी पैदावार को लेकर किसी भी प्रकार की मंडी नहीं होने की वजह से किसानों को भी ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

Tags: Apple, Rajasthan news

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