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Rajasthan: चीन जा रहा है जालोर का ग्रेनाइट, 20 लाख रुपए में बिकता है 2 क्यूबिक मीटर का ब्लॉक

यहां इसकी करीब ढाई हजार इकाइयां हैं. इनका वार्षिक टर्नओवर करीब 300 करोड़ रुपयों का है.
यहां इसकी करीब ढाई हजार इकाइयां हैं. इनका वार्षिक टर्नओवर करीब 300 करोड़ रुपयों का है.

बिकते तो पत्थर भी है बस बेचने वाला चाहिए. यह तथ्य जालोर की ग्रेनाइट इकाइयों (Granite units) के पत्थर को लेकर एकदम सटीक साबित हो रही है. देश के हर कोने तक पहुंच रखने वाला जालोर (Jalor) क्षेत्र की पहाडिय़ों का यह ग्रेनाइट अब चीन, यूएसए और दुबई (China, USA and Dubai) सहित कई देशों तक पहुंच गया है.

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जालोर. बिकते तो पत्थर भी है बस बेचने वाला चाहिए. यह तथ्य जालोर की ग्रेनाइट इकाइयों (Granite units) के पत्थर को लेकर एकदम सटीक साबित हो रही है. देश के हर कोने तक पहुंच रखने वाला जालोर (Jalor) क्षेत्र की पहाडिय़ों का यह ग्रेनाइट अब चीन, यूएसए और दुबई (China, USA and Dubai) सहित कई देशों तक पहुंच गया है. इस ग्रेनाइट पत्थर का 2 क्यूबिक मीटर का बड़ा ब्लॉक करीब 20 लाख रुपए में बिकता है. सुनने में यह कीमत भले ही ज्यादा लगे, लेकिन यह हकीकत है. कांडला बंदरगाह के जरिए जब यह ब्लॉक चीन पहुंचता है तो उसकी कीमत करोड़ रुपए के पार की हो जाती है.

काले, भूरे और लाल रंग का है यह ग्रेनाइट
राजस्थान का जालोर अरावली पर्वत श्रृंखला का इलाका है. इस इलाके में बड़ी मात्रा में ग्रेनाइट है. यह ग्रेनाइट मार्बल का विकल्प है और उससे सस्ता भी. काले, भूरे और लाल रंग के इस ग्रेनाइट की चमक के कारण जयपुर, देहली, मुंबई और गुजरात के शहरों में तो इसकी चमक पहले बिखर गई थी. अब यह पत्थर चीन, यूएसए और दुबई जैसे देशों में भी अपनी चमक बिखेर रहा है. पत्थर की बड़ी-बड़ी शिलाओं को निकालकर ट्रक में लादकर ले बंदरगाह तक ले जाया जाता है. वर्तमान में इस ग्रेनाइट का एक मीटर का टुकड़ा भी हजारों की कीमत का है.

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करीब ढाई हजार इकाइयां हैं


स्थानीय व्यवसायी इस पत्थर को माइंस से निकालकर कांडला बंदरगाह तक पहुंचाते हैं. वहां चीन के खरीदार पहुंचकर इसको जहाज के जरिये अपने देश ले जाते हैं. जालोर का यह ग्रेनाइट काला, लाल और चमकदार होने से इसको मार्बल के विकल्प में उपयोग किया जाता है. इस पत्थर का रसोई, टॉयलेट, आंगन और सीढिय़ों में बहुतायत उपयोग किया जाता है. यहां इसकी करीब ढाई हजार इकाइयां हैं. इनका वार्षिक टर्नओवर करीब 300 करोड़ रुपयों का है.

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सरकारी प्रोत्साहन की जरुरत है
स्थानीय ग्रेनाइट एसोसिएशन के अध्यक्ष लालसिंह धानपुर ने बताया कि यहां का पत्थर चीन जा रहा है. वहां इसकी कीमत बहुत ज्यादा मिल रही है. पत्थर के इस व्यापार को अगर सरकार सही रूप से प्रोत्साहन दे तो स्थानीय लोगों को बड़ा रोजगार प्राप्त हो सकता है. ग्रेनाइट व्यवसायी बजरंग सिंह देवड़ा के अनुसार रोजगार के इस साधन को स्थानीय स्तर पर बढ़ाये जाने की जरूरत है.

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