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देश में ग्रेनाइट सिटी के नाम से जाना जाता है जालोर

जालोर के पत्थरों ने दिलाई शहर को एक अलग पहचान
फोटो-ईटीवी
जालोर के पत्थरों ने दिलाई शहर को एक अलग पहचान फोटो-ईटीवी

भारत में ही नहीं विदेश में भी जालोर को ग्रेनाइट सिटी के नाम से जाना जाता है. यहां ग्रेनाइट की करीब 1200 इकाइयां हैं. यहां के पहाड़ों से निकलने वाले पत्थर की पूरे विश्व में मांग है.

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अरावली पर्वत शृंखलाओं के पहाड़ जालोर के लिए अमूल्य धरोहर के रूप में है. इन पहाड़ों से निकलने वाले ग्रेनाइट ने देश ही नहीं विदेश में भी जालोर को पहचान दी है. 1200 के करीब ग्रेनाइट इकाइयों के कारण आज जालोर देश में ग्रेनाइट सिटी के नाम से जाना जाता है. इन पहाड़ों से निकलने वाले पत्थर की पूरे विश्व में मांग है. यहां के पहाड़ों में जिप्सम भी प्रचूर मात्रा में है. बाहरी राज्यों में व्यापार करने वाले यहां के लोगों ने पूरे विश्व में जिले का नाम किया है. तेल उत्पादन व जिप्सम लिग्राइट निकलने से देश में पहचान बनाने वाला बाड़मेर जिला जालोर की सीमा से सटा हुआ है. ऐसे में जालोर की सीमा पर भी तेल एवं प्लोराइट व जिप्सम समेत अन्य बहुमूल्य खनिजों की प्रचूर संभावनाओं को देखते हुए सर्वे कार्य तेजी से चल रहा है. जीरा व ईसबगोल के उत्पादन में जालोर न केवल राजस्थान बल्कि देश में भी अव्वल है.

शौर्य का इतिहास रहा है जालोर का

जालोर की स्वर्णगिरी नामक इस पहाड़ी पर स्थित जालोर दुर्ग आन, बान व शान का प्रतीक रहा है. राजस्थान के सबसे ऊंचे तीन दुर्गों में शामिल इस दुर्ग पर जन्मे  कान्हड़देव व वीरमदेव ने अलाउद्दीन खिलजी तक के आक्रमण का सामना किया है. सबसे मजबूत दुर्ग के रूप में पहचान रखने वाले इस दुर्ग पर चढ़ाई करने के लिए अलाउद्दीन खिलजी को कई महीनों तक यहां डेरा डाले बैठना पड़ा. आज कई शताब्दियों के बीत जाने के बावजूद यह दुर्ग अपनी उसी स्थिति में है, जो दर्शनीय स्थलों में से एक है.



देश का पहला भालू अभ्यारण्य
जसवंतपुरा उपखंड मुख्यालय पर के आसपास के जंगलों और पहाड़ों पर देश का पहला भालू अभ्यारण्य है. 400 के करीब भालुओं के यहां पर होने के कारण इसे देश का पहला भालू अभ्यारण्य घोषित किया गया है.

( रिपोर्ट- हरिपाल)
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