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जालोर के किसान आज भी देख रहे हैं राहत की बाट

नहीं खुले थे गेट और बांध टूटने से तबाह हो गई थी फसल
फोटो- ईटीवी
नहीं खुले थे गेट और बांध टूटने से तबाह हो गई थी फसल फोटो- ईटीवी

अतिवृष्टि से जालोर जिले का जेतपुरा बांध क्षतिग्रस्त हो गया. इससे कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा. मानसून के चार माह बीत गए, लेकिन किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला.

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अतिवृष्टि से जालोर जिले का जेतपुरा बांध क्षतिग्रस्त हो गया. इससे कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा. मानसून के चार माह बीत गए, लेकिन किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला. क्षेत्र में किसानों के हालात दिनोंदिन खराब होते जा रही है.

राजस्थान के जालोर जिले के रानीवाड़ा उपखंड क्षेत्र से 14 किलोमीटर दूर जेतपुराबांध 23 जुलाई मध्यरात्रि को डैमेज हो गया था. बांध में से एक साथ निकले पानी ने हजारों किसानों के खेतों को चपेट में ले लिया था. जिससे अधिकतर खेत बह गए और फसलें चौपट हो गईं. बाढ़ में किसानों के पशुधन से लेकर घरेलू सामान व अनाज, नकदी आभूषण तक छोड़कर जान बचाने के लिए भाग गए.

प्रशासन की लापरवाही के कारण इतना बड़ा बांध डैमेज हो गया. बांध के गेट समय पर नहीं खुल पाए, और बांध टूट गया. जिसके बाद पानी जैतपुरा के खेतों से निकलकर गुजरात के धानेरा में तबाही मचा दी और करीब 50 लोगो की मौत हो गई. वहां पर सरकार ने किसानों को हाथोंहाथ मुआवजा दिया गया, लेकिन राजस्थान के जालोर जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र के जेतपुरा गांव के किसान अभी भी सरकार से आस लगाए बैठे हैं.



अतिवृष्टि का दौर थमने के बाद जनप्रतिनिधियों व प्रशासन ने क्षेत्र का दौरा कर तहसीलदारों व पटवारियों ने सर्वे रिपोर्ट भी तैयार कर सरकार को भेज दी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से किसानों को अभी तक राहत के नाम पर कुछ नहीं मिला.
( रिपोर्ट: - हरिपाल सिंह)
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