झालावाड़ नगर परिषद के उपचुनाव में BJP ने किया उलटफेर, ऐसे हासिल की सत्‍ता
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झालावाड़ नगर परिषद के उपचुनाव में BJP ने किया उलटफेर, ऐसे हासिल की सत्‍ता
19 पार्षदों के साथ भाजपा आई बहुमत में.

भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने झालावाड़ नगर परिषद (Jhalawar Nagar Parishad) के 24 रिक्त वार्डों के लिए हुए उपचुनाव में 19 सीटें जीतकर बाजी पलट दी है. अब 35 पार्षदों वाली नगर परिषद में वह बहुमत में है तो कांग्रेस सत्‍ता से बाहर हो गई है.

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झालावाड़. झालावाड़ नगर परिषद (Jhalawar Nagar Parishad) के 24 रिक्त वार्डों के लिए हुए उपचुनाव में जनता ने बड़ा फेरबदल किया है. जी हां, नगर परिषद के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने 19 सीटें जीतकर बाजी मारी है. जबकि कांग्रेस को 5 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा है. ऐसे में अब 35 पार्षदों वाली झालावाड़ नगर परिषद में 19 पार्षदों के साथ भाजपा ने बहुमत प्राप्त कर लिया है, तो वहीं कांग्रेस ने नगर परिषद बोर्ड से अपना बहुमत खो दिया है. यही नहीं, भाजपा नेताओं ने जिला कलेक्टर सिद्धार्थ सिहाग से मिलकर सभापति के पद पर अपना दावा किया है.

ऐसे मिली भाजपा को जीत
गौरतलब है कि झालावाड़ नगर परिषद के 35 वार्डों में से 24 के पार्षदों ने नगर परिषद सभापति मनीष शुक्ला की कार्यशैली से नाराज होकर लंबे समय से इस्तीफे दिए हुए थे, जिससे नगर परिषद बोर्ड अल्पमत में चल रहा था. इसके बाद सरकार ने नगर परिषद के 24 रिक्त वार्डों में उपचुनाव कराने की घोषणा की थी और इसके लिए 16 फरवरी को मतदान हुआ था. जबकि उपचुनाव में जनता ने अपना फैसला सुनाते हुए 24 रिक्त पदों में से 19 पर भाजपा प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा बांधा है, तो वहीं कांग्रेस को 5 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है.

भाजपा की जीत की रही ये वजह



भाजपा नेताओं ने इस जीत को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के झालावाड़ में करवाए गए विकास कार्यों और कांग्रेस की हार के लिए कांग्रेस की गुटबाजी को जिम्मेदार ठहराया है. भाजपा जिला अध्यक्ष संजय जैन ताऊ ने कहा कि सूबे की सरकार ने लोकतंत्र की हत्या करते हुए इस चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया है, लेकिन उसके बावजूद भी जनता ने अपना फैसला सुना दिया है. उन्होंने कहा कि झालावाड़ नगर परिषद का करीब साढे 4 साल का समय कांग्रेसी पार्षद व सभापति के बीच खींचतान में ही निकल गया. ऐसे में अब भी यदि सरकार बहुमत में आने के बाद भी भाजपा के सभापति को पद पर आसीन नहीं करती तो उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी.



(रिपोर्ट-तरुण कुमार शर्मा)

 

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