झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र- तीन दशक से काबिज है बीजेपी, कांग्रेस कर रही है सेंधमारी का प्रयास

झालावाड़ और बारां जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों को समेटे हुए झालावाड़-बारां लोकसभा सीट पर करीब तीन दशक से बीजेपी काबिज है. कांग्रेस लगतार यहां सेंधमारी का प्रयास कर रही है, लेकिन अभी तक सफल नहीं हो पाई है.

News18 Rajasthan
Updated: May 18, 2019, 1:52 PM IST
झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र- तीन दशक से काबिज है बीजेपी, कांग्रेस कर रही है सेंधमारी का प्रयास
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
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Updated: May 18, 2019, 1:52 PM IST
झालावाड़ और बारां जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों को समेटे हुए झालावाड़-बारां लोकसभा सीट पर करीब तीन दशक से बीजेपी काबिज है. इस क्षेत्र से पांच बार लोकसभा का चुनाव जीत चुकी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह भी यहां गत तीन बार से लगातार जीत दर्ज करा चुके हैं. इस सीट पर प्रदेश में लोकसभा के प्रथम चरण में 29 अप्रेल को चुनाव संपन्न हुए हैं. यहां इस बार बीजेपी के दुष्यंत सिंह का मुकाबला कांग्रेस के नए चेहरे प्रमोद शर्मा से हुआ है. लोकसभा क्षेत्र के 71.94 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. यह गत बार हुए मतदान से 3.29 फीसदी अधिक है.

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लोकसभा क्षेत्र में झालावाड़ जिले का झालरापाटन, डग, खानपुर और मनोहरथाना समेत बारां जिले का बारां-अटरू, किशनगंज, छबड़ा और अंता विधानसभा क्षेत्र शामिल होता है. 19,03,463 मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में किशनगंज अनुसूचित जनजाति और बारां व डग विधानसभा क्षेत्र अनूसचित जाति के लिए आरक्षित है. गत आठ लोकसभा चुनाव से इस क्षेत्र पर लगातार बीजेपी का कब्जा कायम है. यहां 1989 से 1999 तक लगातार 5 बार वसुंधरा राजे सांसद बनीं. उसके बाद 2004 से अब तक लगातार तीन बार दुष्यंत सिंह यहां से सांसद हैं.

दुष्यंत सिंह।


8 बार बीजेपी और 4 बार कांग्रेस जीती है
यहां अब तक 8 बार बीजेपी, 4 बार कांग्रेस, दो बार भारतीय जनसंघ, एक-एक बार भारतीय लोकदल और जनता पार्टी ने जीत दर्ज कराई है. इस सीट पर गुर्जरों समाज का अच्छा खास वोट बैंक हैं. गुर्जर समाज की बहुलता के बाद यहां सर्वाधिक वोट अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हैं. जैन और मुस्लिम समुदायों का वोट भी यहां निर्णायक भूमिका अदा करते हैं.

वसुंधरा राजे।

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राजे ने पुत्र को सौंपी विरासत
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने जब केन्द्र की राजनीति से प्रदेश की राजनीति में प्रवेश किया तो उन्होंने झालरापाटन को चुना और लोकसभा क्षेत्र की विरासत पुत्र दुष्यंत सिंह को सौंप दी. तब से दुष्यंत सिंह लगातार तीन चुनाव में यहां जीत का परचम लहरा चुके हैं. बीजेपी ने उनको चौथी बार चुनाव मैदान में मुकाबले के लिए उतार रखा है.

प्रमोद शर्मा।


कांग्रेस कर रही है सेंधमारी का भरसक प्रयास
वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाने के लिए इस बार यहां नए चेहरे प्रमोद शर्मा पर दांव लगा रखा है. प्रमोद शर्मा कुछ समय पहले ही बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए हैं. शर्मा पहले एबीवीपी से जुड़े हुए रहे. वे 1996 में झालावाड़ कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं. उसके बाद वे बीजेपी कंज्यूमर सेल के प्रदेश महासचिव और युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे. विधानसभा चुनाव से पहले प्रमोद शर्मा ने बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा था. यहां कांग्रेस नए ब्राह्मण चेहरे के बूते बीजेपी के गढ़ में सेंधमारी कर पाएगी या नहीं इसका निर्णय 23 मई को सामने आ पाएगा.

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