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103 वर्षीय वीरांगना सायरा बानो ने कहा दुनिया को 'अलविदा', 90 साल शौहर की याद में गुजारे

Imtiyaz Bhati | News18 Rajasthan
Updated: November 8, 2019, 7:41 PM IST
103 वर्षीय वीरांगना सायरा बानो ने कहा दुनिया को 'अलविदा', 90 साल शौहर की याद में गुजारे
धनूरी गांव के ताज मोहम्मद खां शादी से पहले फौज में भर्ती हो गए थे. ताज मोहम्मद खां का निकाह सायरा बानो के साथ 1939 में हुआ था.

झुंझुनूं (Jhunjhunu) जिले में सैनिकों की खान धनूरी गांव (Dhanuri village of soldiers mine) की सबसे वयोवृद्ध 103 वर्षीय वीरांगना सायरा बानो (Veerangana Saira Banu) ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. सायरा बानो ऐसी वीरांगना थी, जिसने 81 बरस पूर्व अपने हाथों से शादी की मेहंदी सूखने से पहले ही पति को बेहिचक देश सेवा (Service to nation) के लिए भेज दिया था.

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झुंझुनूं. जिले में सैनिकों की खान धनूरी गांव (Dhanuri village of soldiers mine) की सबसे वयोवृद्ध 103 वर्षीय वीरांगना सायरा बानो (Veerangana Saira Banu) ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. सायरा बानो ऐसी वीरांगना थी, जिसने 81 बरस पूर्व अपने हाथों से शादी की मेहंदी सूखने से पहले ही पति को बेहिचक देश सेवा (Service to nation) के लिए भेज दिया था. पति द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) में शहीद (Martyr) हो गए थे. उसके बाद सायरा बानो ने 90 साल अपने शौहर की याद में ही बिता दिए. शुक्रवार (Friday) को सायरा बानो को उनके पैतृक गांव धनूरी में सुर्पुद-ए-खाक (Funeral) कर दिया गया.

फौजियों की खान है धनूरी गांव
झुंझुनूं के धनूरी गांव को फौजियों की खान कहा जाता है. यहां औसतन हर घर में फौजी हैं. धनूरी गांव के ताज मोहम्मद खां शादी से पहले फौज में भर्ती हो गए थे. ताज मोहम्मद खां का निकाह सायरा बानो के साथ 1939 में हुआ था. उस समय सायरा बानो महज 13 वर्ष की थी. निकाह के बाद बारात वापस धनूरी गांव पहुंची ही थी कि ताज मोहम्मद खां को तार मिल गया था कि तुरंत ही यूनिट में पहुंचे. सायरा बानो ने अपने शौहर का मुंह भी नहीं देखा था. उन्होंने एक पल भी अपने पति के साथ नहीं बिताया था.

पति की महज कैप, वर्दी और बेल्ट को ही देखा था

ग्रामीणों के मुबाबिक तार मिलते ही ताज मोहम्मद खां उसी शाम को अपनी यूनिट के लिए रवाना हो गए. इस युद्ध में ताज मोहम्मद खां शहीद हो गए. तब तक सायरा बानो की हाथों की मेहंदी भी नहीं सूखी थी. सायरा बानो सरहद पर दुश्मन से युद्ध करने तो नहीं गई, लेकिन उनका जीवन किसी युद्ध से कम नहीं था. सायरा ने अपने शौहर को नहीं, बल्कि महज उनकी कैप, वर्दी और बेल्ट को ही देखा था. उसी के सहारे सायरा बानों ने अपना पूरा जीवन बिता दिया.

शहीद पति के माता पिता की सेवा ही करती रही
वे हमेशा इस बात पर गर्व करती रहीं कि उसके सुहाग ने देश सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. इसलिए वह वीरांगना है. सायरा बानो ने दूसरा घर भी नहीं बसाया और अपने शहीद पति के माता पिता की सेवा ही करती रही. गुरुवार रात को सायरा बानो का इंतकाल हो गया. इसकी सूचना पर धनूरी में शोक की लहर छा गई. मलसीसर एसडीएम भी शुक्रवार को गांव पहुंचे और अकीदत के फूल पेश किए.
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First published: November 8, 2019, 7:34 PM IST
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