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Rajasthan: मरुधरा का एक और बेटा विक्रम सिंह नरूका देश के लिये हुआ शहीद, आज पहुंचेगी पार्थिव देह

विक्रम सिंह 12वीं पास कर 2002 में सेना में भर्ती हुए थे.

विक्रम सिंह 12वीं पास कर 2002 में सेना में भर्ती हुए थे.

शहादत को नमन: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के भोड़की गांव निवासी विक्रम सिंह नरूका (Vikram Singh Naruka) लद्दाख में ड्यूटी के दौरान शहीद (Martyr) हो गये हैं. शहीद की पार्थिव देह आज देर रात तक उनके पैतृक गांव पहुंचने की संभावना है. बुधवार को शहीद की पार्थिव देह को पंचतत्व में विलीन किया जायेगा.

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झुंझुनूं. वीरों की धरा राजस्थान (Rajasthan) का एक और बेटा देश की सरहद पर शहीद (Martyr) हो गया है. प्रदेश के शेखावाटी इलाके के झुंझुनूं जिले के भोड़की गांव के विक्रम सिंह नरूका (Vikram Singh Naruka) लद्दाख में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गये. शहीद की पार्थिव देह मंगलवार देर रात तक उनके पैतृक गांव लाये जाने की संभावना जताई जा रही है. उसके बाद बुधवार को सैन्य सम्मान (Military honor) के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी जाएगी.

जानकारी के अनुसार विक्रम सिंह 90 आर्मड रेजीमेंट में नायक के पद पर कार्यरत थे. वर्तमान में लद्दाख में ड्यूटी पर तैनात थे. शनिवार रात को पेट्रोलिंग के दौरान उनका टैंक नाले में गिर गया. हादसे में विक्रम सिंह शहीद हो गए. उसके बाद सोमवार रात को कमांडिंग ऑफिसर ने इसकी सूचना परिजनों को फोन पर दी. इसकी सूचना गांव में फैलते ही सन्नाटा पसर गया. मंगलवार को गांव में घरों में चूल्हें भी नहीं जले हैं.

2002 में सेना में भर्ती हुए थे
शहीद विक्रम के बड़े भाई कान सिंह ने बताया कि विक्रम सिंह 12वीं पास कर 2002 में सेना में भर्ती हुए थे. उनके दो पुत्र हैं. इनमें एक चौथी कक्षा में और दूसरा एलकेजी में पढ़ता है. परिवार में उनकी माता प्रेम कंवर और पत्नी प्रिया कंवर हैं. विक्रम के शहीद होने का पता चलते ही घर में कोहराम मच गया. पत्नी प्रिया सूचना मिलते ही बेहोश हो गई. गांव माहौल गमगीन हैं.
30 जनवरी को 2 महीने की छुट्टी काट कर वापस ड्यूटी पर गए थे


ग्रामीणों अपने लाडले की शहादत पर गर्व तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उसे खोने गम भी साल रहा है. विक्रम सिंह छह भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. वे 30 जनवरी को 2 महीने की छुट्टी काट कर वापस ड्यूटी पर गए थे. ग्रामीणों का कहना है विक्रम सिंह बहुत ही मिलनसार व्यक्तित्व का धनी थे. गांव के युवाओं को सेना में जाने के लिए हमेशा प्रेरित करते थे. वहीं ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बेटे की शहादत से उन्हें बहुत गर्व महसूस हो रहा है.
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