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आयूष ने दादा की परेशानी देख बनाई ब्रेन ट्यूमर की टेस्ट किट, बने बाल वैज्ञानिक नंबर-1
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Imtiyaz Bhati | News18 Rajasthan
Updated: February 3, 2020, 10:16 PM IST
आयूष ने दादा की परेशानी देख बनाई ब्रेन ट्यूमर की टेस्ट किट, बने बाल वैज्ञानिक नंबर-1
आयूष ने बताया कि इस एक कैप को बनाने में उसके करीब 1500 रुपए खर्च हुए हैं.

राजस्थान में ऐसे ही दो हजार आइडिया पहुंचे थे. अब इनमें से पहले नंबर पर आयूष अग्रवाल (Aayush Agarwal) पहले स्थान पर आए.

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झुंझुनूं. केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय (Central Science And Technical Ministry) के नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (National Innovation Foundation) के तत्वावधान में बाल वैज्ञानिकों (Child Scientist) की खोज की जा रही है. विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए आइडिया लिए जा रहे हैं. राजस्थान में ऐसे ही दो हजार आइडिया पहुंचे थे. अब इनमें से 18 आइडिया का चयन कर राष्ट्रीय स्तर पर भेजा गया है, जिनमें से पहले नंबर पर आयूष अग्रवाल (Aayush Agarwal) पहले स्थान पर आए.

दरअसल, आयूष अग्रवाल के दादा को ब्रेन ट्यूमर हुआ था. ब्रेन ट्यूमर का टेस्ट बहुत महंगा पड़ रहा था. आयूष ने 1500 रुपये की कैप बना डाली. आयूष की बनाई यह कैप ब्रेन ट्यूमर को एक हफ्ते पहले ही डिडेक्ट कर लेती है. आयूष ने एसएमएस के डॉक्टर के सुपरविजन में काम किया. इस कैप से मिले रिजल्ट काफी पॉजीटिव रहे हैं. आयूष का मानना है कि यदि कैप का प्रोडक्शन बड़े पैमाने पर किया जाए तो यह बहुत सस्ती हो सकती है.

इंस्पायर अवार्ड मानक में रहा प्रदेश स्तर पर पहला नंबर

जयपुर के आयूष अग्रवाल कैंब्रिज कोर्ट हाई स्कूल में पढ़ाई करते हैं. आयूष के दादा कुछ समय पहले गिर गए थे और उन्हें ब्रेन ट्यूमर हो गया था. उन्हें समय पर पता नहीं चला और जब पता चला तो यह भी जानकारी मिली कि इसकी जांच काफी महंगी होती है. आयूष ने अपने दादा को काफी परेशान होते देखा. आयूष उनकी परेशानी देखकर काफी परेशान होता रहा. यही वजह है कि उसने एक ऐसा इनोवेशन करने की सोची कि हर कोई अपने ब्रेन ट्यूमर की जांच आसानी से और सस्ते में करवा सके.

कैप बनाने में आयूष को लगे छह महीने

आयूष ने अब करीब छह-सात महीने में एक ऐसी कैप इजाद की है, जिससे ब्रेन ट्यूमर के बारे में एक हफ्ते पहले तक पता चल सकेगा. आयूष ने बताया कि उन्होंने यह उपकरण एसएमएस अस्पताल के न्यूरोलोजिस्ट की देखरेख में बनाया है. उसने बताया कि यह जांच ऑनलाइन भी उपलब्ध होगी.

एक कैप बनाने की 1500 रुपये आई लागतआयूष ने बताया कि इस एक कैप को बनाने में उसके करीब 1500 रुपए खर्च हुए हैं, जबकि एक साथ बनाने पर यह पैसा कम किया जा सकता है. इसके बाद यह कैप हर कोई अपने पास भी रख सकता है और समय-समय पर ही अपने ब्रेन ट्यूमर के बारे में खुद ही जांच कर सकता है. यही नहीं ब्रेन से जुड़ी अन्य बीमारियों को भी जांचने में यह कैप काम आ सकती है.

आयूष की इस आविष्कार पर मां-पिता को नहीं हो रहा था विश्वास

आयूष के पिता विनोद अग्रवाल और मां शालिनी ने बताया कि उन्हें तो पहले खुद को विश्वास नहीं था, लेकिन जब आयूष ने किया तो वे खुद हैरत में पड़ गए. आपको यहां यह भी बता दें कि आयूष के पास खुद का मोबाइल तक नहीं है. वह अपने पिता और मां के मोबाइल से ही यहां तक पहुंचा है. उसने अपनी टीचर ऋचा शर्मा की गाइडेंस को भी बड़ा हेल्पफुल बताया है.

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First published: February 3, 2020, 1:29 PM IST
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