'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ' अभियान: राष्ट्रीय स्तर पर तीसरी बार सम्मानित होगा झुंझुनूं
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'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ' अभियान: राष्ट्रीय स्तर पर तीसरी बार सम्मानित होगा झुंझुनूं
फाइल फोटो।

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर 24 जनवरी को झुंझुनूं जिला ना केवल एक बार फिर सम्मानित होगा, बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी बनाएगा. 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ' अभियान में लगातार तीसरे साल झुंझुनूं जिले को राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा जाएगा.

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राष्ट्रीय बालिका दिवस पर 24 जनवरी को झुंझुनूं जिला ना केवल एक बार फिर सम्मानित होगा, बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी बनाएगा. 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ' अभियान में लगातार तीसरे साल झुंझुनूं जिले को राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा जाएगा. इस अभियान को शुरू हुए अभी चार साल हुए हैं और तीन साल से लगातार जिले का देश के टॉप 25 जिलों का चयन हो रहा है. देश में झुंझुनूं के अलावा कोई ऐसा जिला नहीं है, जिसे दूसरी बार भी यह सम्मान मिला हो.

यह झुंझुनूं की जागरूकता का ही प्रमाण है कि जो जिला 2011-12 में सबसे खराब लिंगानुपात के लिए प्रदेश के निचले स्तर पर था, वह महज छह बरसों में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में शुमार हो गया है. यहां पर हर स्तर पर किए गए प्रयासों पर देश का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय मुहर लगा रहा है.

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तीन कैटेगरी में 25 श्रेष्ठ जिलों का चयन होता है
जिला कलेक्टर रवि जैन ने बताया कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान में तीन कैटेगरी में 25 श्रेष्ठ जिलों का चयन होता है. इसमें सामुदायिक सहभागिता, बालिका शिक्षा और पीसीपीएनडीटी की प्रभावी क्रियान्विति शामिल है. झुंझुनूं जिले ने 2017 में सबसे पहले सामुदायिक सहभागिता में अपनी जगह बनाई. उससे अगले साल 2018 में बालिका शिक्षा में झुंझुनूं को यह पुरस्कार देने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद झुंझुनूं आए. इस मौके पर पीएम मोदी ने झुंझुनूं की जमकर तारीफ भी की थी.

इस बार पीसीपीएनडीटी एक्ट की प्रभावी क्रियान्विति के लिए मिलेगा सम्मान
झुंझुनूं को इस बार यह पुरस्कार पीसीपीएनडीटी एक्ट की प्रभावी क्रियान्विति के लिए दिया जा रहा है. प्रदेश में अब तक हुए 141 डिकॉय ऑपरेशन में 40 फीसदी ऑपरेशंस में झुंझुनूं की प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष भागीदारी रही है. झुंझुनूं की पीसीपीएनडीटी सेल ने या तो खुद कार्रवाई की है या फिर झुंझुनूं की गर्भवती महिलाओं ने निडरता के साथ दूसरे राज्यों में जाकर कोख के कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है.

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