Innovation: झुंझुनूं में विकसित होगी टॉपर बेटियों के सम्मान में राजस्थान की पहली 'लाडो सम्मान वाटिका'

इसकी सार संभाल महिला अधिकारिता विभाग करेगा.
इसकी सार संभाल महिला अधिकारिता विभाग करेगा.

शिक्षा (Education) के क्षेत्र में हमेशा अव्वल रहने वाले झुंझुनूं (Jhunjhunu) जिले में टॉपर बेटियों के सम्मान में प्रदेश की पहली 'लाडो सम्मान वाटिका' (Lado Samman Vatika) तैयार की जायेगी.

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झुंझुनूं. 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान में देशभर में नाम कमा चुके राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के अहम जिले झुंझुनूं (Jhunjhunu) में अब इसको लेकर एक और बड़ नवाचार (Innovation) किया जा रहा है. इस नवाचार के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़कर टॉप करने वाली बेटियों के सम्मान के लिये झुंझुनूं में 'लाडो सम्मान वाटिका' ('Lado Samman Vatika') विकसित की जायेगी. प्रदेश में इस तरह का यह पहला प्रयास है.

ताकि सफलता का सम्मान हमेशा लोगों को याद रहे
जिला कलक्टर यूडी खान ने बताया कि मार्च माह में तय किया गया था कि सरकारी स्कूल में पढ़कर बोर्ड परीक्षाओं में टॉप करने वाली टॉपर छात्रा को 21 हजार रुपए तथा अन्य 9 छात्राओं को 11-11 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा. इस इनाम के साथ-साथ इन बेटियों की सफलता की यादें चिरस्थायी रखने के लिये झुंझुनूं के जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक कार्यालय के सामने 'लाडो सम्मान वाटिका' तैयार की जायेगी. खुद कलक्टर यूडी खान ने इसमें पौधा लगाकार इसका शुभारंभ किया।. जिला कलक्टर ने बताया कि आगे से टॉपर बेटियां खुद आकर यहां पर अपने नाम का पौधा लगाएंगी. उसकी सार संभाल महिला अधिकारिता विभाग करेगा. वहीं बेटियां भी समय-समय पर यहां आकर अपने नाम से लगे पौधे को सार संभाल कर सकती हैं. बेटियों की सफलता का सम्मान हमेशा लोगों को याद रहे इसके लिये इन पौधों की सार संभाल के विशेष प्रबंध किये जायेंगे.

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पूरे विवरण के साथ पट्टिका लगाई जायेगी


महिला अधिकारिता विभाग के उप निदेशक विप्लव न्यौला ने बताया कि जब कलक्टर यूडी खान ने लाडो सम्मान योजना जिले में लागू की थी तो सामने आया कि ऐसी प्रेरणा देने वाली टॉपर बेटियों का सम्मान एक दिन होता है. फिर लोग और खुद बेटियां भी भूल जाती हैं. इसलिए उन्होंने जिला कलक्टर यूडी खान की प्रेरणा से लाडो सम्मान वाटिका स्थापित करने का मानस बनाया और वह अब साकार रूप में आ गई है. उन्होंने बताया कि जो भी पौधा टॉपर बच्चियों के नाम से लगेगा उस पौधे के पास ही उसका नाम, उसके माता-पिता का नाम, गांव का नाम और स्कूल का नाम आदि विवरण की पट्टिका लगाई जायेगी. ताकि एक बेटी की उपलब्धि के कारण उसके माता-पिता, गांव, स्कूल और समाज भी खुद को गौरवान्वित समझे. इससे और बेटियों को अच्छा पढ़ने की प्रेरणा मिलेगी. साथ ही समाज भी बेटियों की पढ़ाई का मोल समझ पाएगा.
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