कांग्रेस की गुटबाजी: 'गुरु का आशीर्वाद लेने पहुंचे 'चेले' को रोका
Jhunjhunu News in Hindi

झुंझुनूं में कांग्रेस की गुटबाजी चरम पर है. झुंझुनूं लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार अपने राजनीतिक गुरु शीशराम ओला का आशीर्वाद लेने उनके समाधि स्थल पहुंचे लेकिन ताला नहीं खुलवा सके.

  • Share this:
झुंझुनूं लोकसभा सीट अधिकतर कांग्रेस के कब्जे में ही रही हैं. लगतार पांच बार शीशराम ओला झुंझुनूं से सांसद रहे हैं. दिग्गज जाट नेता शीशराम ओला के इस दुनिया के जाने से कांग्रेस के हाथ से यह सीट चली गई थी. इतिहास में पहली बार वर्ष 2014 के चुनाव में झुंझुनूं में कमल खिला था. करीब 24 साल बाद ऐसा हुआ है कि लोकसभा की सीट से ओला परिवार को टिकट नहींं दिया गया हैं. शीशराम ओला के देहांत के बाद वर्ष 2014 में ओला की पुत्रवधु राजबाला ओला का टिकट दिया गया था, लेकिन वे चुनाव हार गई थीे. अब शीशराम ओला और उसके परिवार के बिना ही कांग्रेस को झुंझुनूं में अपनी नाव को पार लगानी होगी. मगर ओला परिवार और कांग्रेस के उम्मीदवार श्रवण कुमार के बीच रिश्तों में कड़वाहाट नजर आ रही है. कांग्रेस में बिखराव के कारण कांग्रेस के लिए यह सीट निकालना इतना आसान नहींं होगा. कांग्रेस के दिग्गज नेता शीशराम ओला 1996 में पहली मर्तबा झुंझुनूं से सांसद बने थे.

नजर आ गई संबंधों की कड़वाहट

ओला परिवार और कांग्रेस के उम्मीदवार में कड़वाहट शुक्रवार को नजर आ गई. बीती रात को झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक श्रवणकुमार को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किया गया है. एक तरफ श्रवणकुमार और अन्य कांग्रेसियों का दावा है कि कांग्रेस एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी. लेकिन पहले ही दिन जो घटनाक्रम सामने आया, उससे नहींं लगता कि कांग्रेस एकजुट है. एक बार फिर विधायक बृजेंद्र ओला की तरफ से ऐसे संकेत मिले है कि वे श्रवणकुमार के पक्ष में प्रचार तो क्या, उनके साथ भी कभी दिखाई नहींं देंगे.



 स्मृति स्थल पर लटका मिला ताला 
चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले कांग्रेस प्रत्याशी श्रवणकुमार कांग्रेस के जाट दिग्गज नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. शीशराम ओला के स्मृति स्थल पहुंचे. जहां पर नमन कर वे अपना चुनाव प्रचार शुरू करने वाले थे. लेकिन इस स्मृति स्थल पर पहुंचते ही श्रवणकुमार को एक बड़ा ताला गेट पर लगा हुआ मिला. जिसके बाद उनके समर्थक विधायक बृजेंद्र ओला के घर पर चाबी लाने भी गए. लेकिन करीब 15 से 20 मिनट बाद समर्थक वापिस आए तो उन्होंने चाबी नहींं मिलने की बात कही.

बंद गेट पर माला चढ़ाकर लौटे प्रत्याशी श्रवण कुमार

इसके बाद श्रवणकुमार ने बंद पड़े गेट पर ही माला चढ़ाई और नमन कर उनका आशीर्वाद लिया. इसके बाद श्रवणकुमार ने कहा कि स्व. शीशराम ओला न केवल उनके लिए आदर्श थे बल्कि उनके राजनीतिक गुरु थे. वे उनका आशीर्वाद लेने आए थे. लेकिन ताला नहींं खोला गया. वो ताला बंद करने वालों की ड्यूटी है. वे अपना कर्म कर रहे है. वो भी समर्पित और सच्ची श्रद्धा से. इधर, जब मीडियाकर्मी ओला के आवास पर मामले की सच्चाई जानने पहुंचे तो कैमरे के सामने कोई नहींं आया. लेकिन एक व्यक्ति ने आकर मीडिया से बात न करने की बात कही. साथ ही कहा कि श्रवणकुमार आए ही नहींं और कार्यकर्ता कुछ भी कहेंगे उससे उनको कोई मतलब नहींं.

 

ये भी पढ़ें-
लोकसभा चुनाव: ओला परिवार को बाहर करने के लिए एक जाजम पर आया विरोधी खेमा

झुंझुनूं लोकसभा सीट: यहां पांच दशक से 'नहर' पर चल रही है राजनीति
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading