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धनूरी के 18 बेटों ने दी है देश के लिए शहादत, सैनिकों की खान है झुंझुनूं का यह गांव

धनूरी गांव।
धनूरी गांव।

देश में सर्वाधिक सैनिकों के लिए पहचाने जाने वाले झुंझुनूं जिले में स्थित इस छोटे से गांव के बेटे देश के लिए मर मिटना गर्व की बात समझते हैं. पीओके में भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद इस गांव में जमकर जश्न मनाया गया.

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पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायु सेना की ओर से पीओके में की गई एयर स्ट्राइक से देशभर में लोग जश्न मना रहे हैं. आमजन सेना को धन्यवाद देते हुए नहीं थक रहा है. अपने शौर्य और पराक्रम से दुश्मन के दांत खट्टे करने वाली इस भारतीय सेना में शेखावाटी के सपूत अहम भूमिका निभाते हैं. प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं, जहां के परिवारों की पांच-पांच पीढ़ियां देश सेवा में सेवारत हैं. ऐसा ही एक गांव हैं धनूरी. पीओके में भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद इस गांव में जमकर जश्न मनाया गया.

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देश में सर्वाधिक सैनिकों के लिए पहचाने जाने वाले झुंझुनूं जिले में स्थित इस छोटे से गांव के बेटे देश के लिए मर मिटना गर्व की बात समझते हैं. देश को सबसे अधिक सैनिक और शहीद देने वाली झुंझुनूं की मिट्टी के कण कण में वीरता टपकती है. यहां की माताएं लोरी में अपने बच्चों को वीरों की कहानी सुनाती है. शेखावाटी का झुंझुनूं जिला राजस्थान में ही नहीं पूरे देश में शूरवीरों, बहादुरों के लिए अपनी एक विशेष पहचान रखता है. झुंझुनूं जिला मुख्यालय से महज 20 किमी. की दूरी पर स्थित धनूरी गांव फौजियों की खान है. बहादुरी की मिसाल है. धनूरी गांव का रिकॉर्ड आपको चौंका सकता है. यहां के हर दूसरे घर में फौजी है. धनूरी गांव के 18 बेटों ने देश के लिए कुर्बानी दी है.
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वर्तमान में 600 फौजी हैं धनूरी में
प्रथम विश्व युद्ध से लेकर पड़ोसी देशों से भारत के अब तक हुए हर युद्ध में दुश्मन के खिलाफ इस गांव के बेटों ने दिया है अपने साहस का परिचय. यहां की पांच पांच पीढ़ियों ने देश सेवा की परंपरा को निभाया है. करीब 1500 घरों की आबादी वाला धनूरी गांव कायमखानी मुस्लिम बहुल है. यहां की करीब 90 फीसदी आबादी कायमखानियों की है. वर्तमान में भी सबसे ज्यादा फौजी इसी गांव में हैं. गांव के करीब 600 बेटे अभी सेना में रहकर देश सेवा कर रहे हैं. धनूरी गांव के पूर्व फौजी मोहम्मद हुसैन खां बताते हैं कि गांव में लगभग 600 फौजी हैं. इस गांव के 18 बेटे विभिन्न युद्धों में व सरहद की रक्षा करते हुए शहादत दी है.

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शहीदों की संख्या में अव्वल है
कहा तो यहां तक जाता है कि सैनिकों व शहीदों की संख्या के लिहाज से धनूरी अव्वल है. दूसरे नम्बर पर झुंझुनूं जिले की बुहाना तहसील का भिर्र व तीसरे नंबर पर चिड़ावा तहसील का किठाना गांव आता है.

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पांच पांच पीढ़ियां सेना में
धनूरी के शहीद मो. इलियास खान आठ भाई हैं. आठ में से सात भाइयों ने फौज में भर्ती होकर देश सेवा की. मो. इलियास खान 1962 की लड़ाई में शहीद हो गए थे. इनके भाई सूबेदार निसार अहमद खान, सरवर खां, कैप्टन नियाज माहम्मद खां, मो. इकबाल खां, शब्बीर अली खां व अब्दुल अजीज खां हैं. इसके अलावा शहीद कुतुबुद्दीन खां के बेटे कैप्टन मोइनुदीन खां, इनके बेटे कर्नल जमील खां और जमील खां का बेटा वर्तमान में लेफ्टिेनेंट के पद पर फौज में है. इनकी पांच पीढ़ियां देश सेवा कर रही है. इसके अलावा गांव के बिग्रेडियर अहमद अली खां के बेटे सत्तार खां और इनके भाई निसार खां देश सेवा में हैं. सत्तार खां का बेटा गफ्फार खान व जब्बार खान तथा निसार खां का बेटा इरसाद खां सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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