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Dussehra 2022: राम को मानते हैं आदर्श, लेकिन रामलीला में 44 साल से लगातार बन रहे रावण

बगड़ की रामलीला की बात सबसे अलग है. यहां रामलीला के आयोजन का जिम्मा कोई एक संस्था नहीं बल्कि पूरा गांव मिलकर संभाल रहा ह ...अधिक पढ़ें

    इम्तियाज अली

    झुंझुनूं. नवरात्र में राजस्थान के झुंझुनू जिले के हर कस्बे में रामलीलाओं का मंचन हो रहा है. हर रामलीला किसी ने किसी वजह से अनूठा है, लेकिन बगड़ की रामलीला की बात सबसे अलग है. यहां रामलीला के आयोजन का जिम्मा कोई एक संस्था नहीं बल्कि पूरा गांव मिलकर संभाल रहा है. इसमें नौकरीपेशा लोग अभिनय करते हैं. खास बात है कि इस रामलीला के 48 वर्षों के इतिहास में 44 साल से रावण का किरदार एक ही व्यक्ति निभाता आ रहा है. गांव के रहने वाले शिव भगवान शर्मा 44 वर्षों से रावण का किरदार निभा रहे हैं. उनकी दहाड़ सुनकर लोग रोमांचित हो उठते हैं. उनका अभिनय देखने के लिए बगड़ ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों से भी लोग यहां जुटते हैं.

    कस्बे के अध्यापक, वकील, दुकानदार से लेकर चिकित्सक रामलीला में कलाकार बनकर अभिनय करते हैं. अड़तालीस वर्ष पहले शुरू हुई इस रामलीला में 44 साल से शिव भगवान शर्मा रावण बनकर अट्टाहास लगा रहे हैं. श्री राम को अपना आदर्श मानने वाले शिव भगवान शर्मा के रावणरूपी किरदार की क्षेत्र में अलग पहचान है.

    वर्ष 1975 में शुरू हुई थी बगड़ की रामलीला
    वर्ष 1975 में यहां रामलीला की शुरूआत हुई थी जिसमें कस्बे के युवाओं और पुरुषोत्तम लाल रुंगटा ने प्रमुख भूमिका निभाई थी. दिल्ली से पात्रों के लिए पोशाक मंगवाकर रामलीला शुरू की गई. बाद में बीएल चौक पर मांगीलाल रूंगटा की धर्मशाला में रामलीला का मंचन शुरू हुआ. इसके बाद धर्मशाला के पीछे नोहरे में मंचन किया जाने लगा, तब से लेकर आज तक यहां रामलीला मंचन होता आ रहा है.

    रामलीला में नौकरीपेशा करते हैं अभिनय
    खास बात है कि बगड़ की रामलीला में एक भी पेशेवर कलाकार को नहीं बुलाया जाता है. सभी नौकरीपेशा वाले लोग इसमें अभिनय करते हैं. रामलीला में राधेश्याम शर्मा, अशोक अड़ीचवाल, सीताराम कानोडिय़ा अशोक दाधीच, शिवभगवान शर्मा, अजय कानोडिय़ा, रमाकांत शर्मा, महेंद्र शास्त्री, चांद सोनी, मनु सोनी, शशि टेलर, लक्ष्मीनारायण गोस्वामी, ओम प्रकाश चौमाल, प्रदीप कनोडिया, दिलीप सिंह काका, गौतम कनोडिया, राकेश शर्मा, भागीरथ सिंह भाग्य, कैलाश शर्मा, विजय कनोडिया, जितेंद्र कनोडिया, बंटी दधीच, रमाकान्त स्वामी, मनोज सहल, मीनू चौमाल, निहित सहल, अशोक दधीच, सुशील पुरोहित, अनिल जांगिड़, किशन जांगिड़, संदीप अड़ीचवाल, रोहिताश सैनी, शीशराम बुंदेला, तुलसीकान्त ओझा, शशिकांत शर्मा, मुरली जांगिड़, महेन्द्र सोनी, चांद सोनी, ऋषिकांत, राधेश्याम, विपुल, अशोकराज राठौड़, दयाशंकर, मुरारीलाल बागोरिया, जयसिंह शेखावत का प्रमुख योगदान रहा है.

    पीरामल ने करवाया रंगमंच का निर्माण
    बगड़ की रामलीला संस्था के पास खुद की जगह और पक्का स्टेज है. इसका श्रेय दलीप पीरामल को जाता है जिन्होंने पीरामल शताब्दी वर्ष पर अपने दादा पीरामल की स्मृति में रंगमंच (स्टेज) का निर्माण करवाया. वहीं, जमीन के लिए कस्बे कई लोगों का सहयोग रहा.

    Tags: Durga Puja festival, Historical Ramlila, Jhunjhunu news, Navratri festival, Rajasthan news in hindi, Ramlila Staged

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