Good News: मिलिए झुंझुनू के 'पीपल बाबा' से, 46 साल से तैयार कर रहे पीपल के पौधे

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक शख्स 46 सालों से अपने घर पर पीपल के पौधे तैयार कर रहे हैं.

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक शख्स 46 सालों से अपने घर पर पीपल के पौधे तैयार कर रहे हैं.

Jhunjhunu News: राजस्थान के झुंझुनूं के खेतड़ी निवासी गोपालकृष्ण शर्मा 46 साल से अधिक वर्षों से घर पर ऑक्सीजन का भण्डार पीपल के पौधे तैयार कर रहे हैं. वह लोगों को इन पौधों का निशुल्क वितरित करते हैं.

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झुंझुनूं. आज ऑक्सीजन की कमी के चलते लोगों की जान जा रही है. ऑक्सीजन के लिए सरकारों के पास कोई इंतजाम नहीं है, हमें विदेशों से आक्सीजन के मदद लेनी पड़ रही है. कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत हो रही है. अब हमें प्रकृति और पेड़ों के बारे में सोचना चाहिए. ये कहना है राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी गांव निवासी गोपालकृष्ण शर्मा का. गोपाल शर्मा 46 साल से अधिक वर्षों से घर पर ऑक्सीजन का भण्डार पीपल ( Ficus religiosa ) के पौधे तैयार कर रहे हैं. वह इन्हें लोगों को निशुल्क वितरित करते हैं.

ऑक्सीजन के भण्डार पीपल के पौधे लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. हर वर्ष तीन सौ से 400 पौधे तैयार करते हैं. झुंझुनूं के इसी पीपल बाबा ने अभी तक एक 30 से 40 हजार पौधे तैयार कर निशुल्क वितरित कर चुके हैं. गोपालकृष्ण शर्मा अपने घर में ये पौधे तैयार करते हैं. वह पौधा का पालन-पोषण खुद ही करते हैं. इनकी बेटी और बेटा पूरा साथ देते हैं. इनका पूरा खर्चा अपने पास से ही वहन करते हैं. गोपाल शर्मा एक प्राइवेट कम्पनी में काम करते हैं, इनको इतना वेतन नहीं मिलता कि ये रुपए खर्च कर सकें. लेकिन फिर गोपाल शर्मा को पीपल के पौधे लगाने जज्बा इतना है कि अपने खर्चों में से कटौती करते हैं और ये पौधे तैयार करते हैं.

गोपाल कृष्ण शर्मा जिले में और जिले के बाहर भी हजारों पौधे लगाने की बात कहते हैं. जिला प्रशासन के सहयोग से इन पीपल के पौधों का वितरण करते हैं. उनके तैयार किए गए पौधे तीन से चार फीट के होते हैं. इसलिए लगाने कोई दिक्कत नहीं होती है. गोपाल शर्मा कहते हैं हर व्यक्ति को पौधे लगाने चाहिए. जन्म दिन, पुण्यतिथि, शादी, सहित अन्य कार्यक्रमों में ऐसे पौध लगाएं, जिससे जिन्दगी भर याद बनी रही.

पिता से मिली थी प्रेरणा 
गोपाल शर्मा बताते है कि ऐसा करते हुए मुझे एक चीज समझ आ गई कि पेड़ हमारे परिवार हैं. अब बच्चें भी प्रेरणा लेने लगे हैं और पूरा साथ देते हैं. गोपाल शर्मा बताते है कि उनके पिता जी से उन्हें ये प्रेरणा मिली थी. इसके बाद उन्होंने किसी भी वर्ष ऐसा नहीं किया है कि उन्होंने पौधे तैयार नहीं किए हो. पिता जी की प्रेरणा से मैंने पेड़ लगाने को ही अपना जीवन बना लिया. पीपल आक्सीजन  का भण्डार है. वहीं धार्मिक रूप से भी पीपल का बड़ा महत्व हैं. पौधे तो लोग लगा देते हैं, लेकिन परवरिश के अभाव में जल जाते हैं, लोग काट भी देते हैं. इसके बाद उन्होंने पीपल का सहारा लिया. पीपल भारतीय संस्कृति और धर्म से जुड़ा हुआ है. पीपल लगाने के बाद लोग खुद ही इसका ध्यान रखते थे.

पीपल का पौधा 22 घंटे ऑक्सीजन देता है

पौध तैयार करने में खर्चा भी बहुत होता है, इन पौध को तैयार करने के लिए वक्त भी बहुत देना पड़ा हैं. फिर भी जज्बा कम नहीं हुआ. उनके प्रदान किए पौधों को जब वे पूरा पेड़ हुए देखते हैं तो बहुत खुशी मिलती है. जो पेड़ लगाए थे, उनको बड़ा होते देखता था तो फिर आगे बढऩे का मन होता था. पौधे तैयार करने का अभियान प्रशासनिक अधिकारियों को पसंद आया. लोग पीपल के पौधों की डिमांड करने लगे, प्रशासनिक अधिकारी भी पौधों के डिमांड करने लगे हैं. इससे उनका हौसला बढ़ता गया.



पीपल का पेड़ बहुत विशाल होता है और उसकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं। इसकी उम्र भी ज्यादा होती है. यह 22 घंटे से अधिक समय तक ऑक्सीजन देता है. पीपल के पेड़ में जल्दी कीड़े नहीं लगते. इसमें अधिक पानी भी नहीं लगता. ये जल्दी से नष्ट नहीं होते. पर्यावरण के लिहाज से ये संकट की घड़ी है. इससे मौजूदा ऑक्सीजन की समस्या तो सीधे तौर पर दूर नहीं होगी, लेकिन इसका स्थाई उपाय यही है.

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