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फ्रीडम फाइटर देवरोड़ ने कहा, 'एक व्यक्ति और एक पार्टी की चल रही है तानशाही'
Jhunjhunu News in Hindi

Imtiyaz Bhati | News18 Rajasthan
Updated: January 25, 2020, 5:24 PM IST
फ्रीडम फाइटर देवरोड़ ने कहा, 'एक व्यक्ति और एक पार्टी की चल रही है तानशाही'
झुंझुनूं जिले से स्वतंत्रता सेनानी सत्यदेव देवरोड़ ने देश की वर्तमान हालातों पर चिंता जताई है.

झुंझुनूं जिले से स्वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighters) सत्यदेव देवरोड़ ने देश की वर्तमान हालातों पर चिंता जताई है. देवरोड़ ने कहा कि देश में धार्मिक कट्टरता (Religios fanatics) को बढ़ावा दिया जा रहा है.

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झुंझुनूं. राजस्थान के झुंझुनूं जिले से स्वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighter) सत्यदेव देवरोड़ (Satyadev Devrod) ने देश की वर्तमान हालातों पर चिंता जताई है. झुंझुनूं के सत्यदेव कुलहार के निवासी सत्यदेव देवरोड़ ने कहा कि देश में धार्मिक कट्टरता (Religious Fanatics) को बढ़ावा दिया जा रहा है. 95 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी ने कहा कि भारत देश की कल्पना हमेशा एक समुद्र की तरह थी. इसमें कई तरह की नदियां आती हैं और मिलकर मीठा पानी बन जाती हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया के सभी धर्म के लोगों को अपनाया है. सभी को भारत मेें अपने-अपने ढंग से रहने की आजादी है. बावजूद इसके अब धार्मिक कट्टरता पैदा कर हालातों को बदला जा रहा है. उन्होंने आजादी के वक्त देश के विभाजन पर भी कहा कि बापू ने कभी भी नहीं सोचा था कि देश के टुकड़े होंगे, लेकिन उस समय मजबूरी हो गई थी.

'देश में अब स्वार्थ की राजनीति शुरू हो गई है'

स्वतंत्रता सेनानी सत्यदेव देवरोड़ ने बिना किसी के नाम लिए कहा कि देश में अब स्वार्थ की राजनीति शुरू हो गई है. अब केवल सत्ता प्राप्ति के लिए ही सभी लड़ रहे हैं. वर्तमान में देश में एक पार्टी और एक व्यक्ति तानाशाह के रूप में काम कर रहा है, जिससे देश का भला होने वाला नहीं है. उन्होंने जेएनयू में हो रहे आंदोलनों पर भी कहा कि जो आंदोलन हो रहे है, वो अच्छे संस्कार नहीं है. सबसे बड़ा काम है मां-बाप, परिवार और समाज की सेवा. उन्होंने कहा कि अब शिक्षा का ढर्रा बदल गया है, जिसके चलते अच्छे संस्कारवान युवा नहीं निकल रहे हैं.



Satyadev Devrod
स्वतंत्रता सेनानी सत्यदेव देवरोड़ ने बिना किसी के नाम लिए कहा कि देश में अब स्वार्थ की राजनीति शुरू हो गई है.




'सभी को रोजगार की कल्पना आज बेमानी हो गई है'

सत्यदेव देवरोड़ ने कहा कि आजादी के बाद यह कल्पना थी कि सभी स्वावलंबी बनें और सभी को रोजगार मिले. लेकिन अब तो फैशन और विदेशी वस्त्र आ गए है, जिससे स्वावलंबन और रोजगार, दोनों ही गायब हो गए हैं. सभी को रोजगार की कल्पना तो अब बेमानी हो गई है. उन्होंने कहा कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है शिक्षा. शिक्षा नौकरी के लिए अर्जित करते हैं, वह भी नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों की शिक्षा पद्धति काफी सही थी, जिसने देश को महापुरुष और कई बड़ी हस्तियां दी. वे ना केवल देश के लिए सोचते थे? बल्कि वे व्यवहार से भी संजीदा थे.

आज भी चरखा पर बने खादी के कपड़े ही पहनते हैं देवरोड़

आपको बता दें कि सत्यदेव देवरोड़ आज भी चरखा काटते है और खादी से बने कपड़े ही पहनते हैं. लेकिन उन्हें इस बात का भी दुख है कि ग्रामोद्योग बंद होने के कारण अब उन्हें हाथ से बनीं जूतियां पहनने को नहीं मिल रही हैं. मजबूरन वह कंपनियों के जूते पहनते हैं. सत्यदेव देवरोड़ आज इस उम्र में भी पुराने आजादी के लम्हों को याद करते है और गांव के लोगों को भी, खासकर युवाओं के साथ साझा करते हैं.

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First published: January 25, 2020, 5:20 PM IST
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