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झुंझुनूं लोकसभा सीट: यहां पांच दशक से 'नहर' पर चल रही है राजनीति

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

शौर्य और वीरों की इस वीर भूमि पर अधिकतर समय कांग्रेस का ही कब्जा रहा है. बीच-बीच में बीजेपी ने यहां हाथ पैर मारने की कोशिश जरूर की, लेकिन उसे आशातीत सफलता नहीं मिल पाई.

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देशभर में सैनिकों के जिले के नाम से पहचाने जाने वाले झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र की राजनीति भी अपने आप में अलग किस्म की रही है. शौर्य और वीरों की इस वीर भूमि पर अधिकतर समय कांग्रेस का ही कब्जा रहा है. बीच-बीच में बीजेपी ने यहां हाथ पैर मारने की कोशिश जरूर की, लेकिन उसे आशातीत सफलता नहीं मिल पाई. गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में शहीदों की मूर्तियों वाले इस जिले में लंबे समय तक कांग्रेस के दिग्गज नेता शीशराम ओला का वर्चस्व रहा है. ओला करीब पांच दशक तक जिले की राजनीति में छाए रहे हैं.

हरियाणा राज्य की सीमा से सटे इस संसदीय क्षेत्र में झुंझुनूं जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों झुंझुनूं, खेतड़ी, मंडावा, सूरजगढ़, पिलानी उदयपुरवाटी और नवलगढ़ समेत समीपवर्ती सीकर जिले का फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है. आठ विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बनने वाले इस लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान में बीजेपी की संतोष अहलावत सांसद हैं. इस संसदीय क्षेत्र की राजनीति करने वाले ओला ने करीब पांच दशक तक जिले में नहर लाने के वादे के साथ राजनीति की. यह बात दीगर है आज तक नहर आ नहीं आई. ओला पांच बार सांसद रहने के अलावा कई विधायक रहे थे.

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जाट बहुल संसदीय क्षेत्र है झुंझुनूं
जाट बहुल झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र में आबादी के लिहाज से दूसरे नंबर पर मुस्लिम आबादी आती है. माली मतदाता भी यहां बड़ी तादाद में है. यही वजह रही है कि बीजेपी ने यहां कई बार माली प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है. वर्ष 2011 में झुंझुनूं की जनसंख्या 21,37,045 थी. इनमें पुरुष 10,95,896 पुरुष और 10,41,149 महिलाएं थी. झुंझुनूं के सात विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान में 16,64,565 कुल मतदाता हैं. इनके अलावा फतेहपुर में वर्तमान में 1,69,359 मतदाता हैं. आठों विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की संख्या 18,33,924 है.

मोदी लहर में बीजेपी की संतोष अहलावत ने तोड़ा कांग्रेस का वर्चस्व
लोकसभा चुनाव-2014 में यहां से बीजेपी की संतोष अहलावत ने मोदी लहर में कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री रहे शीशराम ओला की पुत्रवधू राजबाला ओला को भारी मतों के अंतर से हराया था. संतोष अहलावत को 4,88,182 मत मिले थे. वहीं राजबाला को महज 2,54,347 मतों से संतोष करना पड़ा था.

लोकसभा चुनाव-2009 में कांग्रेस के शीशराम ओला ने बीजेपी के दशरथ सिंह शेखावत को हराया था. इस चुनाव में ओला ने 3,06,330 मत प्राप्त किए थे. जबकि दशरथ सिंह शेखावत को 2,40,999 मत मिले थे.

लोकसभा चुनाव-2004 में कांग्रेस के शीशराम ओला ने यहां जीत दर्ज कराई थी. इस चुनाव में ओला को 2,74,168 वोट मिले थे. उनके सामने चुनाव मैदान में डटी बीजेपी की संतोष अहलावत को 2,50,813 मत मिले थे.

लोकसभा चुनाव-1999 में भी शीशराम ओला ही यहां से सांसद चुने गए थे. इस चुनाव में ओला ने 3,30,198 मत लेकर बीजेपी के बनवारीलाल सैनी को हराया था. सैनी को 2,53,850 वोट मिले थे.

लोकसभा चुनाव-1998 में शीशराम ओला ने 3,38,526 मत लेकर कांग्रेस का परचम लहराया था. इस चुनाव में उनके सामने बीजेपी के मदनलाल सैनी थे. सैनी को 3,00,667 मत मिले थे.

लोकसभा चुनाव-1996 में कांग्रेस के शीशराम ओला ने कांग्रेस (तिवाड़ी) से चुनाव लड़कर बीजेपी के मातूराम सैनी को हराया था. इस चुनाव में ओला को 2,70,489 और मातूराम सैनी को 2,57,250 मत मिले थे.

नहर ही रहा है हमेशा मुद्दा
झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र के मुद्दों की बात की जाए तो यहां पिछले पांच दशक से नहर ही बड़ा मुद्दा बनकर छाया रहा है. चाहे कांग्रेस हो या फिर बीजेपी सभी पार्टियां हर बार क्षेत्र की जनता को नहर का दिवास्वप्न दिखाती हैं. कभी किसी समझौते की बात की जाती है तो कभी किसी समझौते, लेकिन नहर आज तक नहीं आई. इसके अलावा अन्य मुद्दों में जिले को एनसीआर क्षेत्र में शामिल करने और हवाई पट्टी का विस्तार ज्यादा चर्चित रहे हैं, लेकिन ये दोनों मुद्दे भी अभी तक अटके हुए हैं.
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