श्रवण कुमार-ओला परिवार का वर्चस्व तोड़ा, लेकिन अब जीत की चुनौती
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श्रवण कुमार-ओला परिवार का वर्चस्व तोड़ा, लेकिन अब जीत की चुनौती
श्रवण कुमार। फोटो एफबी।

करीब ढाई दशक तक झुंझुनूं लोकसभा सीट की राजनीति पर वर्चस्व कायम रखने वाले ओला परिवार को दरकिनार फ्रंट में आने वाले श्रवण कुमार पहले नेता हैं.

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प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले झुंझुनूं जिले में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कमान इस बार पूर्व विधायक श्रवण कुमार के हाथ में रही है. करीब ढाई दशक तक झुंझुनूं लोकसभा सीट की राजनीति पर वर्चस्व कायम रखने वाले ओला परिवार को दरकिनार फ्रंट में आने वाले श्रवण कुमार पहले नेता हैं.

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कांग्रेस की परपंरागत झुंझुनूं सीट को बीजेपी से वापस छीनने के लिए पार्टी ने श्रवण कुमार पर भरोसा तो किया है, लेकिन मोदी इफैक्ट के बीच क्या वो इसे पार्टी की झोली में वापस डाल पाएंगे या नहीं यह अभी भविष्य के गर्भ में है. इसका फैसला 23 को मतगणना के बाद ही हो पाएगा. श्रवण का मुकाबला बीजेपी के नरेन्द्र खीचड़ से हुआ है. मूलतया झुंझुनूं के सूरजगढ़ इलाके की घरडू की ढाणी निवासी श्रवण कुमार पिछले करीब चार दशक से राजनीति में सक्रिय हैं. सरपंच के पद से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले श्रवण कुमार पांच बार विधायक रह चुके हैं. उससे पहले एक बार उप प्रधान रहे हैं.




पांच बार विधायक रहे हैं
पहले तीन बार झुंझुनूं जिले के पिलानी और बाद में दो दफा सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने वाले श्रवण कुमार लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहते रहते हैं. सूरजगढ़ से वर्ष-2018 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही करीब 62 वर्षीय श्रवण कुमार ने अप्रत्यक्ष तरीके से लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी थी. दंबग छवि के श्रवण कुमार करीब ढाई दशक से झुंझुनूं लोकसभा सीट पर कायम शीशराम ओला परिवार के वर्चस्व को तोड़कर लोकसभा का चुनाव लड़ने में तो सफल हो गए, लेकिन इससे ओला खेमे की श्रवण से कड़वाहट बढ़ गई. इसका नुकसान भी उन्हें उठाना पड़ सकता है. करीब 24 साल बाद ऐसा हुआ है कि ओला परिवार लोकसभा की टिकट से वंचित हुआ है.

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


सहानुभूति की लहर का है साथ
इन सबके बीच श्रवण कुमार के लिए सुकून की बात यह है कि गत विधानसभा चुनाव में हुई हार के बाद मतदाताओं के एक वर्ग में उनके प्रति सहानुभूति भी है. मतदाताओं में पैदा हुई इस सहानुभूति की लहर ने उनको संबल प्रदान किया है. श्रवण कुमार दसवीं पास हैं. श्रवण कुमार की पुत्रवधू भी सूरजगढ़ से प्रधान रह चुकी हैं.

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