सफलता के रथ पर सवार नरेन्द्र खीचड़ क्या झुंझुनूं में फिर खिला पाएंगे कमल ?
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सफलता के रथ पर सवार नरेन्द्र खीचड़ क्या झुंझुनूं में फिर खिला पाएंगे कमल ?
नरेन्द्र खीचड़। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

शेखावाटी की अहम झुंझुनूं लोकसभा सीट से बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले नरेन्द्र खीचड़ की नैया मोदी लहर के सहारे है. अब तक मंडावा की राजनीति तक सीमित रहने वाले खीचड़ को पहली बार राजनीति के बड़े मैदान में खुलकर खेलने का मौका मिल पाया है.

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शेखावाटी की अहम झुंझुनूं लोकसभा सीट से बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले नरेन्द्र खीचड़ की नैया मोदी लहर के सहारे है. लोकसभा चुनाव से पहले तक मंडावा की राजनीति तक सीमित रहने वाले खीचड़ को पहली बार राजनीति के बड़े मैदान में खुलकर खेलने का मौका मिल पाया है. झुंझुनूं में इस बार गत बार के मुकाबले 1.85 फीसदी वोटिंग ज्यादा हुई है.

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झुंझुनूं के मंडावा विधानसभा क्षेत्र के कमालसर निवासी नरेन्द्र खीचड़ ने इस बार विधानसभा चुनाव में वाकई में कमाल कर दिखाया था. आजादी के बाद पहली बार मंडावा विधानसभा क्षेत्र में कमल खिलाने वाले नरेन्द्र को पार्टी ने लोकसभा चुनाव लड़वाकर इसका ईनाम दिया है. इसके लिए बीजेपी ने आजादी के बाद पहली बार गत लोकसभा चुनाव में झुंझुनूं में पार्टी का झंडा बुलंद करने वाली मौजूदा सांसद संतोष अहलावत को टिकट काटने में जरा भी गुरेज नहीं किया. करीब दो दशक से राजनीति में सक्रिय नरेन्द्र पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. इससे पहले 2013 में वे निर्दलीय चुनाव जीते थे.



फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

मंडावा में तोड़ चुके हैं कांग्रेस का वर्चस्व
नरेन्द्र खीचड़ कांग्रेस के गढ़ रहे मंडावा से गत पांच बार से लगातार चुनाव लड़ते आ रहे हैं. पहले तीन चुनाव हारने के बाद चौथी बार 2013 में उन्होंने मंडावा की राजनीति में एकछत्र राज करते रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता रामनारायण चौधरी की बेटी रीटा चौधरी को हराकर उनके वर्चस्व को तोड़ दिया था. उसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की नाव में सवार होकर वहां कमल खिलाकर पार्टी नेताओं का दिल खुश कर दिया. मंडावा की जीत से उत्साहित पार्टी ने जब खीचड़ को अपना प्रत्याशी घोषित किया तो सांसद संतोष अहलावत सकते में आ गई.

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


अहलावत समर्थकों का आक्रोश बना हुआ है परेशानी
अहलावत का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों में उपजा आक्रोश ही खीचड़ की नैया को डगमगाए हुए है. अलसीसर पंचायत की प्रधानी कर चुके नरेन्द्र की नैया अब राष्ट्रवाद के नारे और मोदी के सहारे ही है. लगातार संघर्ष करते हुए सफलता के रथ पर सवार नरेन्द्र खीचड़ क्या लोकसभा चुनाव भी पार्टी की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे या नहीं यह 23 मई को ही पता चल पाएगा.

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