संस्कृत स्कूल में दो साल से एक भी छात्र नहीं, शिक्षक ले चुके हैं करीब करोड़ रुपए वेतन

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक संस्कृत स्कूल में दो साल से एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है. इस स्कूल में पदस्थ शिक्षक इस दौरान करीब करोड़ रुपए वेतन ले चुके हैं.

Imtiyaz Bhati | News18 Rajasthan
Updated: July 31, 2019, 12:24 PM IST
संस्कृत स्कूल में दो साल से एक भी छात्र नहीं, शिक्षक ले चुके हैं करीब करोड़ रुपए वेतन
इस स्कूल में नहीं दो साल से नहीं हुआ एक भी दाखिला
Imtiyaz Bhati
Imtiyaz Bhati | News18 Rajasthan
Updated: July 31, 2019, 12:24 PM IST
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में ऐसे भी स्कूल चल रहे हैं जहां एक भी बच्चा नहीं है लेकिन स्कूल में शिक्षकों को वेतन के नाम पर हर साल 50 लाख रुपए का चूना लगाया जा रहा है. झुंझुनूं जिले के पदमपुरा गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत स्कूल का उदाहण लें. यहां स्कूल का आलीशान भवन भी है और यहां पर स्टाफ भी पूरा है. प्रधानाध्यापिका के साथ-साथ में चार टीचर है. दो पुरुष और दो महिला टीचर हैं पर इस स्कूल में बीते दो साल में एक भी बच्चे ने एडमिशन नहीं लिया. शिक्षकों के झगड़ालू स्वभाव को इसका कारण बताया जा रहा है. स्कूल की प्रधानाध्यापिका तो अपनी साथी शिक्षिकाओं पर आरोप लगा रही हैं कि वे आने वाले लोगों से अभद्रता करती हैं और उनकी अनुपस्थिति में सरपंच व अन्य ग्रामीणों से हाथापाई तक कर चुकी हैं. इसके बाद ग्रामीणों ने स्कूल से मुंह मोड़ लिया है. प्रधानाध्यापिका ने अपने उच्चाधिकारियों पर भी आरोप लगाया है कि वे उनके पत्रों का जवाब नहीं देते. अपनी पीड़ा फोन पर बताती हैं तो उनके फोन को भी ब्लॉक कर दिया है.

रामनिवास बाजला, सरपंच किशोरपुरा ने बताई स्कूल की दयनीय स्थिति की वजह


पदमपुरा गांव का यह स्कूल किशोरपुरा पंचायत के तहत आता है. सरपंच रामनिवास और वार्ड पंच संजय झाझडिय़ा ने का कहना है कि यह स्कूल नहीं, बल्कि शिक्षक और पूरी शिक्षा व्यवस्था पर धब्बा है. यहां के स्टाफ को लडऩे से फुर्सत मिले तो अभिभावकों से संपर्क कर बच्चे लाएं. उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में पंचायत ने प्रस्ताव लेकर ज्वाइंट डायरेक्टर तक पत्र लिखा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब तो दो साल से स्कूल में एक बच्चा भी नहीं है. लाखों रुपए की तनख्वाह ये शिक्षक तमाशा कर ही ले जाते हैं.

संस्कृत शिक्षा विभाग के संभागीय प्रभारी राजेंद्रप्रसाद शर्मा भी कार्रवाई करने में बेबस


संस्कृत शिक्षा विभाग के चूरू स्थित कार्यालय में सेवारत संभागीय प्रभारी राजेंद्रप्रसाद शर्मा भी कार्रवाई करने में बेबस नजर आए. उन्होंने कहा कि स्कूल को लेकर उनके पास भी पत्र आए हुए हैं. जिन्हें लेकर निदेशालय को भेजा गया है. कार्रवाई या फिर कोई भी कदम निदेशालय ही उठाता है. कुल मिलाकर चिट्ठियों के चक्कर में ही सरकार के के लाखों रुपए पानी में बह रहे हैं और विद्यार्थियों को भी शिक्षा नहीं मिल रही.

पांच साल का स्कूल का नामांकन
2014-15 में 58
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2015-16 में 45
2016-17 में 34
2017-18 में 33
2018-19 में शून्य
2019-20 में शून्य (अब तक)

बिना पढ़ाए सब लेते है मोटी तनख्वाह
प्रधानाध्यापिका राजपति आर्या  12 साल से इसी स्कूल में हैं और महीने का वेतन  72 हजार 334 रुपए
है. दो साल में बिना पढ़ाए 17 लाख 36 हजार 16 रुपए ले चुकी हैं. अध्यापक बजरंग लाल शर्मा की तनख्वाह 72 हजार 510 रुपए है और दो साल में बिना पढ़ाए 17 लाख 40 हजार 240 रुपए ले चुके हैं.12 साल से इसी स्कूल में कार्यरत अध्यापिका सरोज का मासिक वेतन 70 हजार 210 रुपए है और दो साल में बिना पढ़ाए 16 लाख 85 हजार 40 रुपए ले चुकी हैं.शिक्षिका अनुजा की तनख्वाह 67 हजार 378 रुपए है और दो साल में बिना पढ़ाए 16 लाख 17 हजार 72 रुपए ले चुकी हैं. शिक्षक राम सिंह का वेतन करीब 70 हजार 210 रुपए है और दो साल में बिना पढाए लिए 16 लाख 85 हजार 40 रुपए ले चुके हैं. इस स्कूल में दो साल में स्टाफ को 84 लाख 63 हजार 408 रुपए मिलेंगे. गत साल तो एक भी बच्चा न होने से ये टीचर आधी से ज्यादा तनख्वाह ले चुके हैं जो करीब 50 लाख रुपए है. वहीं इस बार भी एक बच्चा भी स्कूल नहीं आया है.ऐसे में इतनी राशि फिर से ले जाने को तैयार है.

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First published: July 31, 2019, 12:24 PM IST
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