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राकेश झुनझुनवाला के सरनेम के पीछे की दिलचस्प कहानी, राजस्थान से रहा खास कनेक्शन, जानें कहां से शुरू हुआ सफर

राकेश झुनझुनवाला के सरनेम के पीछे की दिलचस्प कहानी, राजस्थान से रहा खास कनेक्शन, जानें कहां से शुरू हुआ सफर

Rajasthan News: राकेश झुनझुनवाला के परिवार का राजस्थान से गहरा रिश्ता रहा है.

Rajasthan News: राकेश झुनझुनवाला के परिवार का राजस्थान से गहरा रिश्ता रहा है.

Rakesh Jhunjhunwala News: शेयर मार्केट के बिग बुल कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला का रविवार को निधन हो गया. उनके परिवार का राजस्थान (Rajasthan News) से गहरा रिश्ता रहा है. दरअसल, उनके पूर्वज झुंझुनू के मलसीसर गांव में रहता था. झुंझूनूं में रहने के कारण उनके परिवार ने अपने सरनेम झुनझुनवाला रख लिया था. दरअसल, उनका परिवार मारवाड़ी अग्रवाल है. राजस्थान के कई फेमस घराने अपने जन्म स्थल के नाम पर सरनेम रखा करते हैं.

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    कृष्ण शेखावत

    झुंझुनूं.  शेयर मार्केट के बिग बुल कहलाने वाले दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला 62 साल की उम्र में निधन हो गया. उनका परिवार मूलतः राजस्थान के झुंझुनू जिले के मलसीसर गांव का रहने वाला था. उनके पूर्वज झुंझूनूं के रहने वाले थे, इसलिए परिवार ने अपना सरनेम झुनझुनवाला रखा था. जानकारी के मुताबिक  इनका परिवार मारवाड़ी अग्रवाल है. राजस्थान में कई फेमस घराने अपने जन्म स्थल के नाम को अपना सरनेम बना लिया है.  मलसीसर गांव में उनकी पुश्तैनी हवेली थी जहां अब एक मार्केट बन चुका है. स्थानीय लोगों ने बताया कि राकेश झुनझुनवाला कभी मलसीसर नहीं आए. मलसीसर से उनके पूर्वज व्यापार करने के लिए कानपुर चले गए थे. राकेश झुनझुनवाला अपने पूर्वजों की जन्मस्थली के लिए कुछ करना चाहते थे. उनकी और उनके परिवार की राणी सती मंदिर से गहरी आस्था थी. उनका परिवार राणीसती मंदिर में बच्चों के जात जडूले उतारने आता रहता था.

    राणी सती मंदिर के कार्यकारिणी सदस्य मनीष अग्रवाल ने बताया कि राकेश झुनझुनवाला की राणी सती में गहरी आस्था के चलते वे अपनी अकाशा एयरलाइंस कि झुंझुनू में पूजा अर्चना करवाना चाहते थे. मगर हवाई पट्टी का रनवे छोटा होने के कारण यह संभव नहीं हो सका. राकेश झुनझुनवाला 2009 में झुंझुनू राणी सती मंदिर में आए थे और राणी सती को धोक लगाते हुए दर्शन किए थे. मलसीसर के जीएल शर्मा ने बताया करीब 30 साल पहले राष्ट्रीयकृत कंपनियों का विनिवेश शुरू हुआ तब राकेश झुनझुनवाला ने शेयर बाजार में भाग्य आजमाया.

    5000 रुपये से झुनझुनवाला ने की थी शुरुआत

    सीए करने के बाद राकेश झुनझुनवाला जॉब कर रहे थे. शुरुआत में झुनझुनूवाला के पास में 5000 हजार रुपये थे. उसी से उन्होंने शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट किया. झुनझुनूवाला के दिमाग में ब्लॉक बुकिंग के आईडिया से शेयर की पहचान करते हुए शेयरों की खरीदारी में जुटे. उन्होंने जिन कंपनियों के शेयर खरीदे उनके दाम बढ़े 1997 के बाद लगातार शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट करते रहे. राकेश झुनझुनवाला के पिता का जन्म मलसीसर गांव में हुआ था. वह इनकम टैक्स में आईएआरएस पोस्ट पर थे  मुंबई रहे उसके बाद हैदराबाद ट्रांसफर हुआ. वहां वे असिस्टेंट कमिश्नर रहे. फिर मुंबई दोबारा वापस आए तो डायरेक्टर इंटेलिजेंस की पोस्ट पर आए.

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    नेपेंसी रोड पर राकेश झुनझुनवाला के पिता का मकान था. सिल्वर किंग मोतीलाल के परिवार से भी इनका गहरा नाता रहा है. जीएल शर्मा ने बताया कि करीब 2 साल पहले राकेश झुनझुनवाला से मलसीसर को लेकर बातचीत हुई थी. राकेश झुनझुनवाला ने कहा था कि एक बार व्यापार संगठित कर ले उसके बाद पूर्वजों की जन्मस्थली पर भी ध्यान देंगे. झुंझुनू के मोतीलाल ग्रुप की न्यू मुंबई में सेठ मोतीलाल कॉलेज स्थापित है. इस कॉलेज में सेठ मोतीलाल आर्ट्स कॉलेज , सेठ मोतीलाल कॉमर्स कॉलेज सेठ मोतीलाल साइंस कॉलेज उस कॉलेज में गरीब बच्चों की 40 प्रतिशत  1संख्या पर राकेश झुनझुनवाला लाखों रुपए की आर्थिक मदद करते हुए बच्चों को पढ़ाने में जुटे हुए थे.

    राकेश झुनझुनवाला के छोटे भाई राजेश झुनझुनवाला इन कॉलेजों का काम देखते हैं. राकेश झुनझुनवाला पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. उन्होंने अपनी एयरलाइंस को शुरू करने को लेकर ही डॉक्टर की सलाह से ही अस्पताल से छुट्टी ली. मलसीसर का दुर्भाग्य रहा कि किसी ने राकेश झुनझुनवाला को मलसीसर की ओर आकर्षित नहीं कर पाया. जीएल शर्मा के निवेदन के बाद उनका रूख  मलसीसर की ओर हुआ था, मगर अफसोस है कि वह अपने पूर्वजों की जन्मस्थली नहीं आ पाए. जीएल शर्मा ने राकेश झुनझुनवाला के निधन को देश की बड़ी क्षति बताया.

    Tags: Jhunjhunu news, Rajasthan news, Rakesh Jhunjhunwala

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