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पांच साल तक सरपंचों को मिली 'खुली छूट', सरकार के 150 करोड़ का नहीं मिल रहा हिसाब
Jhunjhunu News in Hindi

Imtiyaz Bhati | News18 Rajasthan
Updated: December 5, 2019, 4:13 PM IST
पांच साल तक सरपंचों को मिली 'खुली छूट', सरकार के 150 करोड़ का नहीं मिल रहा हिसाब
झुंझुनूं जिला परिषद सीईओ रामनिवास जाट इन दिनों एक्शन मोड में हैं.

झुंझुनूं जिला (Jhunjhunu District) परिषद सीईओ रामनिवास जाट (Ramniwas Jat) ने जबसे कार्यभार संभाला है, तब से उनके सामने जो चीजें सामने आई हैं, उनकी तो आंखें फटी की फटी रह गई है. हुआ यह है कि यहां के सरपंचों (Sarpanch) के पास से केंद्र से मिलने वाली राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है.

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झुंझुनूं. पिछले पांच सालों में सरपंचों को खुली छूट मिलने के बाद हालात ये बने हैं कि अकेले झुंझुनूं जिले (Jhunjhunu District) में सरपंचों के पास 150 करोड़ रुपए (One Hundred Fifty Crore) का कोई हिसाब किताब नहीं है. जी, हां! 14वें वित्त आयोग की ओर से हर पंचायत को उसकी जनसंख्या के आधार पर केंद्र सरकार सीधे पैसा भेजती है. इन पैसों को पंचायत से जुड़े कुछ विशेष कार्यों के लिए खर्च करना होता है. लेकिन, झुंझुनूं जिला परिषद सीईओ रामनिवास जाट (Ramniwas Jat) ने जबसे कार्यभार संभाला है, तब से उनके सामने जो चीजें सामने आई हैं, उनकी तो आंखें फटी की फटी रह गई है. हुआ यह है कि यहां के सरपंचों के पास से केंद्र से मिलने वाली राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है.

झुंझुनूं जिला परिषद सरपंचों के खिलाफ कर रहा है कार्रवाई

यही वजह है कि झुंझुनूं जिला परिषद सीईओ रामनिवास जाट इन दिनों एक्शन मोड में हैं. यही कारण है कि झुंझुनूं जिले के सरपंचों खासकर उदयपुरवाटी पंचायत समिति क्षेत्र के रातों की नींद उड़ी हुई है. केंद्र सरकार की ओर से पंचायतों को भेजे जाने वाले पैसे का कोई भी हिसाब-किताब सरपंचों के पास नहीं है. अब तक 150 करोड़ रुपए का हिसाब किताब अकेले झुंझुनूं जिले के सरपंच नहीं दे पाए हैं. सरपंच का कार्यकाल खत्म होने को है. यदि ऐसे हालात पूरे प्रदेश के हैं तो यह आंकड़ा हजार करोड़ रुपये से भी कहीं ज्यादा का होगा.



उदयपुरवाटी के 40 पंचायतों का 75 करोड़ का नहीं मिल रहा है हिसाब



अब झुंझुनूं जिला परिषद के सीईओ ने सभी पंचायत समिति के बीडीओ को पाबंद कर दिया है कि जब तक सरपंच अपने पुराने पैसों का हिसाब किताब नहीं दे, तब तक उन्हें केंद्र से आई अगली किस्त की राशि प्रदान नहीं की जाए. आपको बता दें कि अकेले उदयपुरवाटी पंचायत समिति की 40 पंचायतों का करीब 75 करोड़ रुपए का हिसाब किताब ही नहीं मिल रहा है.

सरपंचों का कार्यकाल हो रहा है खत्म

सीईओ द्वारा केंद्र की किश्त रोकने के बाद सरपंचों की नींद उड़ी हुई है. एक ओर तो उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, तो दूसरी ओर किस्त रोकने के साथ-साथ उनसे पुराना हिसाब मांगा जा रहा है. यही वजह है कि सरपंच भी घबराए हुए हैं. सबसे ज्यादा घबराहट उदयपुरवाटी में इसलिए हो रही है क्योंकि सर्वाधिक हिसाब किताब भी यहीं का बाकि है. खुद सीईओ रामनिवास जाट भी मानते है कि पिछले दिनों उदयपुरवाटी विधायक राजेंद्रसिंह गुढ़ा जिस तरह से 30-40 लोगों को लेकर उनके पास आए और उनके साथ अभद्रता के साथ बातचीत की.

सरकार का पैसा है, हिसाब तो देना पड़ेगा: रामनिवास जाट, सीईओ, जिला परिषद

जिला परिषद के सीईओ रामनिवास जाट को अंदेशा है कि केंद्र से आए इस पैसे की निगरानी नहीं होने के कारण जिले के करीब 150 करोड़ रुपए का कोई हिसाब किताब नहीं है. उन्हें अंदेशा है कि जिस तरह से अब परतें खुल रही हैं. उस लिहाज से इस पैसे का उपयोग सरपंचों ने निजी कामों में किया है या तो उन्होंने अपने खुद के यहां काम करवा लिया या फिर परिचितों के यहां. सरपंच इसलिए डरे हुए हैं और हिसाब नहीं दे रहे हैं जबकि यह पैसा सार्वजनिक कामों में खर्च होना था. जाट ने कहा है कि यदि सरपंच हिसाब नहीं देते है तो उनसे वसूली तो होगी ही साथ ही आने वाले चुनावों में उन्हें अयोग्य घोषित करवाने की भी कोशिश की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार का पैसा है, हिसाब तो देना पड़ेगा.

जिला परिषद हिसाब-किताब ढूंढने के लिए लगाएगी कैंप

जिला परिषद ने इस हिसाब किताब को ढूंढने के लिए अब कैंप लगाने का भी फैसला लिया है. इसके साथ ही सरपंचों और ग्रामसेवकों को बैठकों के जरिए यह बताया जा रहा है कि वे किस तरह से इसका हिसाब-किताब दें और इसका हिसाब किताब देना कितना जरूरी है. जिला परिषद इस पैसे की उपयोगिता को मालूम करने के लिए भी पूरा सहयोग भी कर रहा है. लेकिन यह भी तय है कि अब झुंझुनूं में तो कम से कम पंचायतों का पैसा बिना हिसाब किताब दिए नहीं मिलेगा. यही कारण है कि सभी पंचायत समितियों के खातों में पंचायतों में दिया जाने वाला पैसा पड़ा है.

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First published: December 5, 2019, 4:13 PM IST
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