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दूसरे विश्व युद्ध में गंवाए पैर, फिर बलवंत सिंह ने सिस्टम से लड़ी जंग, अब 50 साल बाद मिलेगी पेंशन

दूसरे विश्व युद्ध में गंवाए पैर, फिर बलवंत सिंह ने सिस्टम से लड़ी जंग, अब 50 साल बाद मिलेगी पेंशन

Balwant Singh jhunjhunu: दूसरे विश्व युद्ध के सिपाही बलवंत सिंह को 50 साल बाद मिलेगा पेंशन.

Balwant Singh jhunjhunu: दूसरे विश्व युद्ध के सिपाही बलवंत सिंह को 50 साल बाद मिलेगा पेंशन.

Balwant Singh World War II veteran get pension: राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनूं (jhunjhunu) के 97 साल के भूतपूर्व सैनिक ने बड़ी जंग जीत ली है. लंबी लड़ाई के बाद अब बलवंत को 50 साल बाद पेंशन मिलेगी. सैन्य न्यायाधिकरण ने उन्हें सरकार की युद्ध विकलांगता पेंशन की अनुमति दी है

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झुंझुनूं. राजस्थान के झुंझुनूं के 97 साल से एक भूतपूर्व सैनिक ने बड़ी जंग जीत ली है. 50 साल से वह लड़ाई लड़ रहे थे. युद्ध के मैदान में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले बलवंत सिस्टम के सामने लाचार नजर आए. उन्हें अपना हक लेने के लिए पांच दशक लग गए, लेकिन आखिकार जंग जीत ली. अब उनके चेहरे पर जीत की खुशी झलक रही है. सैन्य न्यायाधिकरण ने उन्हें सरकार की युद्ध विकलांगता पेंशन की अनुमति दी है. सिपाही बलवंत सिंह को 1943 में 3/1 पंजाब रेजिमेंट में शामिल किया गया था.

15 दिसंबर, 1944 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इटली पर हमले के दौरान, एक खदान विस्फोट में उनका बायां पैर उड़ गया था. 1946 में राजपुताना राइफल्स में स्थानांतरित होने के बाद वे अमान्य हो गए और बुनियादी विकलांगता पेंशन के साथ सेवा छोड़ दी.  1972 में केंद्र ने उन सभी लोगों को युद्ध चोट पेंशन देने का प्रावधान किया, जो विभिन्न युद्धों के दौरान घायल हुए थे. लेकिन विश्व युद्धों के दौरान घायल हुए लोगों को इससे वंचित कर दिया गया. इस फैसले के खिलाफ ये जांबाज सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी), जयपुर की शरण में गए और अब लंबीी लड़ाई के बाद न्याय मिल गया है. अब उन्हें पेंशन मिलेगी.

लखनऊ में भी आया था ऐसा मामला

अभी हाल ही में इसी तरह के एक मामले में लखनऊ एएफटी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान घायल हुए एक अन्य सैनिक को युद्ध विकलांगता पेंशन देने का आदेश दिया था. बलवंत के कानूनी वकील कर्नल एसबी सिंह (सेवानिवृत्त) ने बताया कि सरकार ने युद्ध विकलांगता पेंशन का प्रावधान किया है, जो कि 1947 के बाद की लड़ाई में घायल हुए लोगों और दुनिया में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों को दिए जाने वाले अंतिम वेतन का 100 प्रतिशत है.  बलवंत सिंह की विकलांगता 100 प्रतिशत है. अब फैसला बलवंत सिंह के पक्ष में हो गया है.

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परिवार लंबे समय तक पेंशन के लिए प्रयास कर रहा था. अपना गुजरा चलाने के लिए राज्य सरकार से भी मदद की मांग करता, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली. बेटे सुभाष सिंह ने कहा कि हमें कारगिल युद्ध के बाद ही इसका एहसास हुआ.  हम को अब न्याय मिल गया है.

Tags: Jhunjhunu news, Pension scheme, Rajasthan news

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