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हेलीकॉप्टर हादसाः पिता की मौत के बाद संभाली थी 5 बहनों की जिम्मेदारी, अब पसरा है सन्नाटा

फाइल फोटो.

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अरूणाचल के तवांग के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए एयरफोर्स के MI-17 हेलिकॉप्टर हादसे में झुंझुनूं जिले के कासनी गांव का जवान श ...अधिक पढ़ें

    अरूणाचल के तवांग के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए एयरफोर्स के MI-17 हेलिकॉप्टर हादसे में झुंझुनूं जिले के कासनी गांव का जवान शहीद हो गया है. खबर मिलने के बाद गांव में शोक की लहर छाई हुई है.

    जानकारी के मुताबिक, एयरफोर्स का एमआई-17 वी-5 हेलिकॉप्टर शुक्रवार सुबह छह बजे अरुणाचल के पटोगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. हेलिकॉप्टर में सवार झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ क्षेत्र के कासनी निवासी सतीश खांडा (धानक) सहित सात जवान जिंदा जल गए थे. मृतकों में सेना के दो जवान भी शामिल हैं. वहीं दो पायलट सहित एयरफोर्स के भी पांच जवान शामिल है.

    जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर सवारों को सेना की अग्रिम चौकी पर केरोसिन के कैन गिराने थे. इस दौरान एक जरीकैन खुल गया और हेलिकॉप्टर के टेल रोटर (पीछे वाले पंख) में उलझ गया और आग लगने से सात जवान शहीद हो गए. इनमें कासनी के सतीश खांडा (धानक) के अलावा जोधपुर में कार्यरत बिहार के रहने वाले एस. के. सिंह भी शामिल हैं.

    इधर, कासनी गांव के उपसरपंच और सतीश के दोस्त सांवरमल कुमावत ने बताया कि करीब 10 साल पहले सतीश धानक की एयरफोर्स में नौकरी लगी थी. 17-18 साल का होते ही वो नौकरी में लग गया था और 2013 में उसकी शादी जयपुर के सांगानेर इलाके में रहने वाली किरण के साथ हुई थी. इनके ढाई साल का बेटा हर्ष भी है.

    पांच बहनों में इकलौता होने के चलते सतीश सभी का प्यारा भी था और सबसे होशियार भी था. उसे अपनी जिम्मेदारियों का अहसास था. साथ ही उसे बखूबी निभा भी रहा था. सतीश की बड़ी तीन बहनों निर्मला, सुनिता और बनिता की शादी हो गई है, जबकि दो बहनें नीतू और दर्शना अभी एमए और नर्सिंग कर रही हैं.

    सतीश के किसान पिता ताराचंद खांडा करीब 15 साल पहले गुजर गए थे, जिसके बाद परिवार का सहारा सतीश के कंधों पर घर की जिम्मेदारियां आ गई थीं. पांच बहनों का इकलौता सहारा भाई सतीश के शहादत की सूचना गांव के सरपंच चिरंजीलाल को मिली, जिसके बाद गांव में गमगीन माहौल बना हुआ है. सूत्रों के मुताबिक जवान सतीश का शव रविवार तक पहुंचने की संभावना है.

    उप सरपंच सांवरमल ने बताया कि दो जुलाई को उनके परिवार में शादी थी. तब 25 जून के आस-पास सतीश गांव आया था और 10 जुलाई को वापस गया था. उसकी इच्छा थी कि वह गांव में युवाओं के लिए कोचिंग खोले और सेना में जाने के लिए उन्हें प्रेरित करे.

    वह खुद भी बीएसटीसी किया हुआ था, लेकिन खुद की तैयारी से ही एयरफोर्स में 10 साल पहले भर्ती हुआ था. पिता की मौत के बाद उसकी मां अंगूरी देवी ने ही उसे गरीबी में पढ़ाया-लिखाया. सतीश ने भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए कभी गरीबी को आड़े नहीं आने दिया और अपने स्तर पर भी तैयारी करने पर वह विश्वास करता था और कामयाब भी हुआ.

    Tags: Helicopter crash, Indian Airforce, Jhunjhunu news, Rajasthan news

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