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स्टांप ड्यूटी घोटाला: जांच में बड़ा खुलासा, अधिकारियों ने अपने फायदे के लिए सरकार को लगाया 52 लाख का चूना
Jhunjhunu News in Hindi

Imtiyaz Bhati | News18 Rajasthan
Updated: February 17, 2020, 6:51 PM IST
स्टांप ड्यूटी घोटाला: जांच में बड़ा खुलासा, अधिकारियों ने अपने फायदे के लिए सरकार को लगाया 52 लाख का चूना
एडीएम राजेंद्र अग्रवाल ने की थी जांच.

राजस्‍थान (Rajasthan) के झुन्झुनू में जमीनों की होने वाली रजिस्ट्रियों की जांच में बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसके लपेट में कई बड़े अधिकारी आने वाले हैं. यह घोटाला करीब 52 लाख रुपये का है.

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झुन्झुनू. राजस्‍थान सरकार (Rajasthan Government) को चूना लगाने में खुद उसके अधिकारी भी पीछे नहीं है. जब लोगों की शिकायत पर जमीनों की होने वाली रजिस्ट्रियों की जांच करवाई तो झुन्झुनू में बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसके लपेट में कई बड़े अधिकारी आने वाले हैं. यकीनन
सब रजिस्ट्रार ऑफिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने खुद के फायदे के सरकार को लाखों रुपए की चपत लगा दी. शिकायत के बाद तत्कालीन सब रजिस्ट्रार दमयंति कंवर समेत कई लोगों के इस खेल में शामिल होने की बात सामने आयी है.

ऐसे खुला मामला
आपको बता दें कि शिकायत के बाद तत्कालीन कलेक्टर रवि जैन ने एडीएम राजेंद्र अग्रवाल से जांच करवाई. एडीएम की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जमीनों को कम कीमत की दिखाकर स्टांप ड्यूटी चोरी की गई है. हैरानी की बात ये है कि कई जमीनें ऐसी भी सामने आई हैं जो व्यवसायिक थीं, लेकिन उन्हें आवासीय बताकर चोरी की गई है. अपनी रिपोर्ट में एडीएम ने यह भी कहा है कि पिछले दो साल में जितनी भी रजिस्ट्रियां हुई हैं. उनकी जांच करवाई जाए. साथ ही इसके लिए अलग से एक कमेटी बनाई जाए, जिसमें मुद्रांक व पंजीयन से जुड़े अधिकारी भी शामिल हों, ताकि असलियत सामने आए. इसके साथ ही सरकार को भी लाखों रुपयों का फायदा होगा.



52 लाख रुपये की लगी चपत
एडीएम राजेंद्र अग्रवाल ने कहा है कि इसमें तत्कालीन भू अभिलेख निरीक्षक की भी लापरवाही सामने आई है. साथ ही उन्होंने मौके पर निरीक्षण नहीं किया, जिसके चलते यह खेल चलता रहा. आपको बता दें कि यह मामला झुन्झुनू में वर्ष 2019 में हुई विभिन्न रजिस्ट्रियों से जुड़ा हुआ है. इसमें 52 लाख रुपयों का स्टांप ड्यूटी घोटाला सामने आया था. मामले में एक शिकायत के बाद पंजीयन व मुद्रांक विभाग अजमेर के महानिरीक्षक ने जांच करवाई थी. इस दौरान तत्कालीन रजिस्ट्रार दमयंति कंवर और तहसीलदार सुमनदेवी को दोषी माना गया था. जांच के दौरान बिना मौका देखे, व्यवसायिक संपत्तियों को आवासीय दिखाने और कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री करवाने समेत कई गंभीर कमियां पाई गई थीं.



 

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First published: February 17, 2020, 6:47 PM IST
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