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राजस्थान के इस 'गोपीनाथ मंदिर' का इतिहास, जहां रात में कोई नहीं रुकता! जानें रहस्य

Jhunjhunu News: जयपुर के गोविंद देव मंदिर जैसी ही गोपीनाथ जी की प्रतिमारमेश पुजारी के अनुसार हाथीसिंह ने मंदिर का निर्म ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- इम्तियाज अली

झुंझुनूं. झुंझुनूं जिले के सुलताना कस्बे में स्थित गोपीनाथ मंदिर का निर्माण करीब 260 साल पहले तत्कालीन शासक हाथी सिंह की रानी की इच्छा पर करवाया गया था. यहां के बारे में एक कहावत है कि मंदिर में रात के समय कोई नहीं रुक सकता. यदि कोई रुकना भी चाहे तो उसके साथ ऐसी घटनाएं होती हैं कि उसे रात को ही मंदिर से बाहर जाना पड़ता है. गांव के बुजुर्ग व मंदिर पुजारी इसके पीछे दैवीय शक्ति बताते हैं. मंदिर जितना पुराना है, इसका इतिहास भी उतना ही अनूठा है. किवदंति के अनुसार गांव में 250 साल पहले ध्यानदास जी महाराज रहते थे. वे बड़े तपस्वी थे. एकबार उनके पास दूसरे संत आए और आश्रम किया. वे गोपीनाथजी भक्त थे.

कहते हैं कि संत की भगवान गोपीनाथ जी की प्रतिमा से बातें होती थी. इसकी चर्चा पूरे गांव में फैल गई. इस बीच एक दिन तत्कालीन राजा हाथी सिंह का पुत्र बीमार हो गया. जान बचने की कोई संभावना नहीं थी. तब हाथी सिंह ने अपने पुत्र को ले जाकर ध्यानदास जी के पास रुके, और साधु के चरणों में डाल दिया. कहते हैं कि ध्यानदासजी ने जैसे ही हाथी सिंह के बेटे के सिर पर हाथ फेरा, वह खड़ा हो गया. उस दिन से ध्यानदास जी के प्रति श्रद्धा बढ़ गई. हाथी सिंह की रानी ने भी उनके बारे में सुना था. वे ध्यानदासजी के पास गईं और उन्हें गुरु बना लिया.

सपने में दिखे थे गोपीनाथजी
हाथीसिंह का बेटा ठीक होने के बाद वह और उनकी रानी दोनों की बाबा ध्यानदास के प्रति श्रद्धा बढ़ गई. बाबा ध्यानदास कहते थे वे कुछ नहीं करते. जो भी करते हैं सब गोपीनाथजी ही करते हैं. गोपीनाथजी के प्रति श्रद्धा भाव बढ़ गया. एक दिन हाथीसिंह को सपने में गोपीनाथ जी ने दर्शन दिया और कहा कि उनकी मूर्ति की कोई गृहस्थी स्थापना करवाकर पूजा करे तो इलाके में दुख तकलीफ नहीं होगी. तब दूसरे दिन राजा हाथीसिंह बगीची में ठहरे साधु के पास गए और मूर्ति स्थापना की इच्छा जताई, लेकिन संत ने मना कर दिया और रात को वहां से चले गए. उस रात फिर हाथीसिंह को सपने में गाेपीनाथ जी ने कहा कि मैं आज जहां हूं, वहां से आकर मुझे ले जाइए. तब हाथी सिंह उस संत से मूर्ति लेकर आए उसकी स्थापना करवाई.

मैं जब तक जिंदा रहूंगा…
पंडित निरंजन शर्मा व रमेश पुजारी कहते हैं कि संत गोपीनाथजी की मूर्ति हाथीसिंह को देना नहीं चाहते. लेकिन हाथीसिंह ले आए और उसकी स्थापना करवा दी. तब साधु ने हाथीसिंह को खरी खोटी सुनाई ताे राजा ने कहा कि वापस ले जाओ अपनी मूर्ति. कहते हैं कि जो संत गोपीनाथजी की मूर्ति को हमेशा साथ लेकर चलते थे, वे स्थापना के बाद मूर्ति को उठा भी नहीं सके. तब साधु ने कहा कि आप मेरे साथ नहीं चलना चाहते, कोई बात नहीं, लेकिन मैं जब तक जिंदा रहूंगा, मुझे दर्शन देने होंगे.

चमत्कारों से प्रभावित
जयपुर के गोविंद देव मंदिर जैसी ही गोपीनाथ जी की प्रतिमारमेश पुजारी के अनुसार हाथीसिंह ने मंदिर का निर्माण कराया. मरोल गांव के पुजारियों को लाकर बसाया, ताकि वे इसकी पूजा अर्चना कर सकें. जयपुर के गोविंद देव जी की तरह यहां भी काले पत्थर की मूर्ति है. बाद में चमत्कारों से प्रभावित होकर सुलताना के लाठ परिवार ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था.

पहले मंदिर नीचे था. जिसे लाठ परिवार ने जीर्णोद्धार करवा ऊंचाई पर प्रतिमा स्थापित करवाई.

Tags: CM Rajasthan, Hindu Temples, Jhunjhunu news, Rajasthan news, Rajasthan Tourism Department

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