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Jodhpur News: कांग्रेस को चुकानी पड़ी थी 1993 में हुए प्रदर्शन की भारी कीमत, अब 27 साल बाद इस मामले में चार्जशीट दाखिल

29 सितंबर 1993 को जोधपुर कलक्ट्रेट पर उमड़ी भीड़ (File Photo)
29 सितंबर 1993 को जोधपुर कलक्ट्रेट पर उमड़ी भीड़ (File Photo)

Jodhpur News: वर्ष 1993 में भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जित करने को लेकर विवाद हुआ था. प्रशासन ने खुद ही प्रतिमा विसर्जित कर दिया था. इसके बाद कलेक्‍ट्रेट पर हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया था.

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जोधपुर. करीब 27 साल पहले कलेक्टर कार्यालय परिसर में हुए एक प्रदर्शन ने जोधपुर की राजनीतिक तस्वीर बदल कर रख दी थी. इस मामले में 27 वर्षों के बाद पुलिस ने अधूरी जांच के साथ कोर्ट में चार्जशीट (Charge sheet) पेश की है. जोधपुर पुलिस ने इस मामले में अब तक की सबसे लंबी जांच का रिकॉर्ड बनाया है. इस प्रदर्शन के आरोपी 70 साल से ज्यादा उम्र के हैं और कई तो दुनिया से रुखसत हो चुके हैं. पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है.

मामला 29 सितंबर 1993 का है. उस समय हजारों लोगों की भीड़ ने जोधपुर जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जमकर उत्पात मचाया था. कलेक्टर कार्यालय में तोड़फोड़ की गई थी. एडीएम की गाड़ी को उल्टा कर उसमें तोड़फोड़ कर दी गई. यहां तक कि एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी को चूड़ियां तक पहना दी गई थी. इसको लेकर 30 सितंबर 1993 को उदय मंदिर थाने में एक एफआईआर दर्ज करवाई गई थी. इसकी जांच 27 वर्षों तक चली जो अभी भी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि कुछ आरोपियों को पुलिस न तो गिरफ्तार कर पाई और न ही उनका बयान ले पाई है.

भगवान गणेश की मूर्ति विसर्जन का लेकर हुआ था विवाद
दरअसल, जोधपुर में वर्ष 1993 में पहली बार जालोरी गेट चौराहे पर गणेश महोत्सव समिति द्वारा भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की गई थी. इसके विसर्जन के मार्ग को लेकर विवाद हुआ तो पुलिस ने खुद ही मूर्ति को कब्जे में लेकर विसर्जन कर दिया था. उसके बाद जोधपुर के मुथा जी मंदिर में चल रहे प्रवचन के दौरान स्वामी रामसुखदास महाराज ने लोगों को आह्वान करते हुए कहा कि वे इस मामले को लेकर स्वयं ज्ञापन देने कलक्ट्रेट जायेंगे. फिर क्या था हजारों लोगों की भीड़ उनके पीछे-पीछे जिला कलेक्ट्रेट पहुंच गई. लोग अपनी मांगों को लेकर आए थे, लेकिन प्रशासन उनकी मांगें मानने को तैयार नहीं था. इस पर देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाएं अधिकारियों के साथ मारपीट तथा कार्यालय में तोड़फोड़ करने लगीं.
कैसे बदली जोधपुर की राजनीतिक तस्वीर


उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. प्रदर्शन के बाद गुस्साए संत समाज ने हजारों लोगों की भीड़ को इस बात की कसम दिला दी कि ऐसी सरकार को वोट नहीं देना है. उसके बाद साल 1993 के दिसंबर माह में हुए विधानसभा चुनाव में इस कसम का असर स्पष्ट दिखाई दिया और जोधपुर के तीनों विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमा लिया. इसमें शहर विधानसभा से सूर्यकांता व्यास चुनी गई. सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से राजेंद्र गहलोत और सूरसागर विधानसभा क्षेत्र से मोहन मेघवाल विधायक के रूप में चुने गए. पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है.
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