मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के गृहक्षेत्र जोधपुर में ASI ने फंदा लगाकर दी जान, जानिए क्या है वजह

नरेन्द्र सिंह के साथ काम करने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार भी वे डिप्रेशन के शिकार थे.

नरेन्द्र सिंह के साथ काम करने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार भी वे डिप्रेशन के शिकार थे.

ASI commits suicide in Jodhpur: सनसिटी जोधपुर में राजस्थान पुलिस के सहायक उप निरीक्षक नरेन्द्र सिंह ने अपने घर पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली.

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जोधपुर. राजस्थान में पुलिसकर्मियों के आत्महत्या (Suicide) करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बार सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के गृहक्षेत्र जोधपुर में राजस्थान पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक (Assistant Sub Inspector) ने घर में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. हालांकि, अभी तक आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है. परिजनों की मानें तो एएसआई काफी दिनों से डिप्रेशन (Depression) में थे. इसी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.

जानकारी के अनुसार, एएसआई नरेन्द्र सिंह ने गुरुवार को दोपहर में अपने घर में फांसी का फंदा लगा लिया. पुलिस लाइन में तैनात एएसआई नरेन्द्र सिंह शहर के खेजड़ी चौक में रहते थे. इन दिनों वे पुलिस लाइन में तैनात थे. गुरुवार दोपहर में नरेन्द्र सिंह अपने घर में अकेले थे. उनके परिजन होली के बाद अपने रिश्तेदारों से मिलने घर से बाहर गए हुए थे.

डिप्रेशन का चल रहा था इलाज

बताया जाता है कि नरेन्द्र सिंह ने अपने कमरे में लगे पंखे से रस्सी बांध फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. सिंह के परिजन जब वापस घर पहुंचे तो वहां के हालात देखकर हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत नरेन्द्र सिंह को नीचे उतारा और पास के अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. नरेन्द्र सिंह का शव एमजीएच अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया. नरेन्द्र सिंह के परिवार में दो पुत्र व पत्नी है. परिजनों के अनुसार नरेन्द्र सिंह डिप्रेशन में चल रहे थे. इसके लिए उनका इलाज भी चल रहा था.
साथियों ने भी बताया डिप्रेशन में थे नरेन्द्र सिंह

नरेन्द्र सिंह के साथ काम करने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार भी वे डिप्रेशन के शिकार थे. पुलिसकर्मियों का कहना था कि नरेंद्र सिंह काफी मिलनसार व्यक्ति थे. उन्होंने बताया कि नरेन्द्र सिंह कई बार बात करते करते चुप्पी साध लेते थे. थोड़ी देर चुप रहने के बाद वह रोना शुरू कर देते थे. साथियों ने बताया उन्होंने कई बार उनसे पूछा कि क्या समस्या है, लेकिन उन्होंने कभी कोई समस्या नहीं बताई. उनके अनुसार कुछ तो ऐसा था जो उनको मन ही मन खाए जा रहा था. इसी के चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली. उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भी कई पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया था. उसके बाद सीएम गहलोत ने चिंता भी जताई थी.
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