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Big Achievement: जोधपुर डिफेंस लैब ने फाइटर प्लेन के लिए बनाया सुरक्षा कवच, दुश्मन के रडार को देगा चकमा

यह तकनीक फाइबर से बनी है. इंसानों के बाल से भी पतले इस फाइबर की मोटाई महज 25 माइक्रोन होती है. फाइबर से इसके छोटे-छोटे टुकड़ों को दागा जाता है.

यह तकनीक फाइबर से बनी है. इंसानों के बाल से भी पतले इस फाइबर की मोटाई महज 25 माइक्रोन होती है. फाइबर से इसके छोटे-छोटे टुकड़ों को दागा जाता है.

Good News: जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला में भारतीय लड़ाकू विमानों के लिये बेहतरीन चैफ तकनीक विकसित (Chaff technique) की गई है. तकनीक के माध्यम से भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम हो जाएंगे.

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जोधपुर. भारत के फाइटर प्लेन (Indian Fighter Plane) को अब दुश्मन की मिसाइल अपना निशाना नहीं बना पाएगी. इसके साथ ही दुश्मन देश के रडार भी अब भारत के फाइटर प्लेन को ट्रेस नहीं कर पाएंगे. भारतीय रक्षा अनुसंधान केंद्र (Indian Defense Research Center) ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है, जिसके बाद दुश्मन की मिसाइल भारतीय फाइटर प्लेन को छू तक नहीं पाएगी. हमारे लड़ाकू विमान से छोड़े गए पार्टिकल्स दुश्मन की मिसाइल को चकमा देंगे. इससे दुश्मन की मिसाइल हमारे विमान से छोड़े गए पार्टिकल्स से भिड़ जाएगी. डीआरडीओ ने इस चैफ तकनीक (Chaff Technique) को महज ढाई वर्ष में ही पूरा कर इसकी तकनीक भारतीय कंपनियों को ट्रांसफर कर दी है.

भारतीय रक्षा अनुसंधान के जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने एयरफोर्स के फाइटर प्लेन को दुश्मन के रडार से बचाने के लिए स्वदेशी तकनीक तैयार कर ली है. जोधपुर में इस विशेष मेटल फाइबर विकसित किया गया है. इसको चैफ फाइबर के माध्यम से विमान दुश्मन के रडार को चकमा देगा. इससे राडार बेस्ट मिसाइल विमान को ट्रैक नहीं कर सकेगी. हमारे विमान से डीआरडीओ द्वारा विकसित छोटे पार्टिकल दुश्मन की मिसाइल को रास्ता भटका अपनी ओर खींच लेगी. इससे भारतीय फाइटर प्लेन को कोई नुकसान नहीं होगा.

चैफ तकनीक आत्मनिर्भर भारत अभियान को समर्पित
जोधपुर रक्षा प्रयोगशाला के निदेशक रविंद्र कुमार ने बताया कि यह तकनीक फाइबर से बनी है. इंसानों के बाल से भी पतले इस फाइबर की मोटाई महज 25 माइक्रोन होती है. फाइबर से इसके छोटे-छोटे टुकड़ों को दागा जाता है. इससे करोड़ों-अरबों टुकड़े आसमान में जाकर आपस में एक बादल के समान समूह बन जाते हैं. इस समूह से दुश्मन के रडार में फाइबर का आभास होता है. ऐसे में दुश्मन द्वारा दागी जाने वाली मिसाइल अपना लक्ष्य भटक कर इस समूह से टकरा जाएगी.

फाइटर प्लेन के पिछले हिस्से में लगता है चैफ
चैफ को दागने के लिए इसे हमारे फाइटर प्लेन के पिछले हिस्से में लगाया जाएगा. भारतीय फाइटर प्लेन दुश्मन की तरफ से मिसाइल अटैक होते ही इसे आसमान में दाग देंगे. फाइटर प्लेन से छोड़ते ही यह थोड़ी देर में आसमान में बिखर जाते हैं. फिर सभी पार्टिकल्स आपस में मिलकर एक समूह का रूप धारण कर लेते हैं. इस दौरान हमारे फाइटर प्लेन की तरफ आ रही दुश्मन की मिसाइल इन समूह को अपना लक्ष्य मान दिशा बदल इन पर टूट पड़ती है और हमारे फाइटर प्लेन को कोई नुकसान नहीं होगा.

पहले जगुआर फाइटर प्लेन में लगेगा चैफ
डीआरडीओ की चैफ तकनीक को पहले जगुआर फाइटर प्लेन में लगाया जाएगा. इसके बाद सुखोई, मिराज और मिग सीरीज के फाइटर प्लेन में इस चैफ तकनीक को स्थापित किया जाएगा. भारतीय वायुसेना को यह तकनीक महज 50 करोड़ रुपए में ही मिल जाएगी, जबकि विदेशी तकनीक को खरीदने में पहले 100 करोड़ रुपए खर्च होते थे. आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दो भारतीय कंपनियों को यह तकनीक ट्रांसफर की गई है. अब भारतीय वायुसेना इन दो कंपनियों से स्वदेशी चैफ की खरीद करेगी.

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