जोधपुर एम्स की बड़ी उपलब्धि: रोबोट के जरिये किया पित्त की दुर्लभ बीमारी का राजस्थान में पहला ऑपरेशन

ऑपरेशन केवल 8 मिमी के चार छोटे चीरों के माध्यम से किया गया. (Photo-Jodhpur AIIMS)

ऑपरेशन केवल 8 मिमी के चार छोटे चीरों के माध्यम से किया गया. (Photo-Jodhpur AIIMS)

Big achievement of Jodhpur AIIMS: जोधपुर एम्स में पित्त की दुर्लभ बीमार से पीड़ित मरीज का रोबोट (Robot) के जरिये ऑपरेशन किया है. एम्स का दावा है कि राजस्थान में पहली बार (First time in rajasthan) ऐसा हुआ है. मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है. उसे छुट्टी दे दी गई है.

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जोधपुर. एम्स जोधपुर  (AIIMS Jodhpur) के सर्जिकल गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में 21 साल की महिला की पित्त की दुर्लभ बीमारी का ऑपरेशन रोबोट (Robot) के जरिये किया गया है. एम्स का दावा है कि इस बीमारी का रोबोट के जरिये प्रदेश में पहली बार (First time in rajasthan) ऑपरेशन किया गया है. यह जटिल सर्जरी सिर्फ 8 मिमी के चार छोटे चीरे लगाकर की गई है. इस ऑपरेशन के बाद एम्स की टीम में खुशी की लहर है.

एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एम. के. गर्ग ने बताया कि नोखा निवासी 21 वर्षीय महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर आई थी. एम्स में जांच करने पर पता चला कि वह कोलेडोकल सिस्ट बीमारी से पीड़ित है. यह बीमारी एक लाख लोगों में से एक में होती है. पहले ऐसी बीमारियों के लिये पेट पर एक लंबे और गहरे चीरे की आवश्यकता होती थी. उसका निशान मरीज के शरीर पर जीवन भर के लिए रहता है. इस लंबे चीरे के कारण रोगी को दीर्घकालिक जटिलताएं भी हो सकती हैं. केस की जटिलता और रोबोटिक सर्जरी में एम्स के सर्जिकल गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अनुभव की वजह से उसे डॉ. वैभव कुमार वार्ष्णेय की देखरेख में भर्ती कराया गया.

इस टीम ने किया यह जटिल ऑपरेशन

एम्स के निदेशक प्रोफेसर डॉ. संजीव मिश्रा की सलाह और मार्गदर्शन में ऑपरेशन को पूरी तरह से रोबोट के माध्यम से करने की योजना डॉ. वैभव वार्ष्णेय और डॉ. सुभाष सोनी के द्वारा बनाई गई. कोलेडोकल सिस्ट को काटने और आंतों को वापस जोड़ने का जटिल ऑपरेशन पूरी तरह से रोबोट के जरिये किया गया. इसके अलावा सर्जरी में इंडो-सायनिन ग्रीन (आई सी जी) तकनीक का उपयोग भी किया गया था जो भारत में बहुत सीमित केंद्रों में उपलब्ध है. सर्जरी डॉ. वैभव वार्ष्णेय के द्वारा की गई. इसमें डॉ. सुनीता सुमन, डॉ. आशीष स्वामी, निश्चेतना विभाग के डॉ. प्रदीप भाटिया, डॉ. निखिल कोठारी, डॉ. अंकुर शर्मा और नर्सिंग संतोष कुरी और लोकेन्द्र ने सर्जरी में सहयोग किया.
8 मिमी के चार छोटे चीरों के माध्यम से किया गया ऑपरेशन

ऑपरेशन न केवल 8 मिमी के चार छोटे चीरों के माध्यम से किया गया, बल्कि रोबोट विधि के कारण कम से कम रक्त का प्रवाह हुआ. छोटे चीरे और कुशल सर्जरी के कारण रोगी को सर्जरी के बाद दर्द भी कम हुआ. सर्जरी के अगले दिन मरीज ने मुंह से खाना खाना शुरू कर दिया. सर्जरी के 4 दिन ही बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई.

रोबोटिक सर्जरी के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा



एम्स के निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा ने इसकी सराहना करते हुये बताया कि भारत में रोबोटिक सर्जरी के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने यह भी कहा कि रोबोट के माध्यम से एम्स में सर्जिकल गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में फूडपाइप, पेट, अग्न्याशय, यकृत, आंत की अन्य जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा चुकी है.
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