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Jodhpur: कोरोनाकाल में टूटी पैरोल की आशा तो आसाराम ने जेल में ही बनाया 'वृंदावन'
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Chandra Shekhar Vyas | News18 Rajasthan
Updated: May 22, 2020, 4:16 PM IST
Jodhpur: कोरोनाकाल में टूटी पैरोल की आशा तो आसाराम ने जेल में ही बनाया 'वृंदावन'
आसाराम अपनी आदत अनुसार सुबह 4 बजे उठ जाते हैं.

छात्रा के साथ यौन शोषण के दोषी आसाराम (Asaram) को लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान पैरोल नहीं मिली, तो जेल में समय बिताने का निकाला ये उपाय. ध्यान, योगाभ्यास और किताबें पढ़कर बिता रहे समय.

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जोधपुर. अपने ही गुरुकुल की छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में करीब 7 साल से जोधपुर सेंट्रल जेल (Jodhpur Central Jail) में बंद आसाराम (Asaram) ने लॉकडाउन (Lockdown) से पूर्व कई प्रयास किए थे कि उन्हें जमानत या पैरोल मिल जाए, लेकिन सफलता नहीं मिली. COVID-19 संक्रमण के बाद तो आसाराम ने पैरोल के लिए 2 दिन तक भूख हड़ताल भी की थी, इसमें भी वे सफल नहीं हो पाए. अंत में थक हार कर आसाराम फिर से अपने नियमित काम-काज में व्यस्त हो गए. कोरोनाकाल में आसाराम ने जेल में ही 'वृंदावन' बना लिया, जहां उनकी सुबह होती है. जेल में आसाराम नियमित तौर पर योगाभ्यास करते हैं. आपको बता दें कि आसाराम को नाबालिग से यौन शोषण के मामले में जीवन की अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई है.

सुबह 4 बजे उठ जाते हैं आसाराम

आसाराम अपनी आदत अनुसार सुबह 4 बजे ही उठ जाते हैं. लेकिन जेल के नियमानुसार बैरक सुबह 6 बजे खुलता है. इन 2 घंटों में आसाराम ध्यान लगाते हैं और योगाभ्यास करते हैं. सुबह 6 बजे जब बैरक खुलती है, आसाराम नित्यकर्म आदि से निवृत्त होकर स्नान करते है. फिर वे पूजा पाठ करने बैठ जाते हैं.



सुबह 7.30 बजे करते हैं नाश्ता



सुबह 7 बजे सभी बंदियों को जेल की तरफ से नाश्ता दिया जाता है, लेकिन आसाराम पूजा पाठ से निवृत्त होकर करीब 7.30 बजे नाश्ता करते हैं. जेल के सूत्रों ने बताया कि सुबह के नाश्ते में कभी भीगे चने, कभी पोहे और कभी मीठा दलिया दिया जाता है. जेल मैनुअल के अनुसार सुबह 9:30 बजे सभी बंदियों को खाना दिया जाता है. आसाराम भी सुबह 9:30 बजे खाना ले लेते हैं. खाने में दाल, सब्जी और रोटी शामिल होती है.

बैरक के पास वृंदावन में टहलते हैं आसाराम

आसाराम ने अपने बैरक के पास बहुत सारे तुलसी के पौधे उगा रखे हैं. इसे वृंदावन नाम दे रखा है. खाना खाने के बाद आसाराम इस वृंदावन में करीब 1 घंटे टहलते हैं. जेल के कैदियों को रोजाना पांच पत्ती तुलसी की खाने की सलाह देते हैं. आसाराम खुद भी प्रतिदिन तुलसी के पत्तों का सेवन करते हैं. वहीं जेल के अन्य कैदियों को भी इसके सेवन की सलाह देते हैं.

जेल बैरक को बंद कर दिया जाता है 11 बजे

आसाराम को सुबह 11 बजे फिर बैरक में सभी कैदियों की तरह बंद कर दिया जाता है. अन्य कैदी हालांकि आराम करते हैं लेकिन आसाराम इस दौरान कुछ धार्मिक पुस्तकें पढ़ते हैं और फिर आराम करते हैं. दोपहर 3 बजे वे फिर जेल से बाहर आते हैं. इस दौरान सभी कैदियों को चाय दी जाती है, लेकिन आसाराम चाय नहीं पीते. वे विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों से बने एक काढ़े का प्रतिदिन सेवन करते हैं.

सूर्यास्त से पहले करते हैं भोजन

आसाराम जब से जेल में आए हैं, तब से सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लेते हैं. वे सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करते. जेल के नियमानुसार 5.30 बजे सभी कैदियों को खाना मिलता है और आसाराम समय पर अपना भोजन कर लेते हैं. संध्या भोजन के बाद फिर अपने वृंदावन में चले जाते हैं और कुछ देर टहलते हैं. शाम 7.30 पर फिर से सभी कैदियों को बैरक में भेज दिया जाता है. वहां दूसरे कैदी बैरक में जाने के बाद अपने अन्य काम करते हैं, वहीं आसाराम बैरक में जाते ही धार्मिक पुस्तकें लेकर उन्हें पढ़ने लग जाते हैं. करीब 2 घंटे स्वाध्याय के बाद आसाराम 9 बजे सो जाते हैं.

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First published: May 22, 2020, 3:00 PM IST
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