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'दंगल' जैसी कहानी: तंगी से छूटा खेल तो बेटियों को बना दिया एथलीट, जीते गोल्ड

News18 Rajasthan
Updated: June 28, 2019, 12:48 PM IST

राजस्‍थान के सादुलपुर निवासी शिशुपाल कोठारी को आर्थिक तंगी के कारण खेलकूद से दूरी बनानी पड़ी थी. इसके बाद उन्‍होंने अपनी पांच और भाइयों की तीन बेटियों को एथलीट बना दिया.

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हरियाणा के बाद अब राजस्‍थान में 'दंगल' की कहानी दोहराई गई है. दरअसल, सादुलपुर तहसील की मुंदी ताल गांव की सरोज चौधरी ने सिरोही में चल रही 43वीं राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में 8 गोल्ड मेडल जीतकर राजस्थान पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (जोधपुर) और गांव का नाम रोशन किया है. जोधपुर आरपीसी टीम में शामिल सरोज चौधरी की कहानी 'दंगल फिल्म' की कहानी से कम नहीं है. इस फिल्म में गीता और बबीता के पिता ने देश के लिए गोल्ड जीतने के सपने को पूरा करने के लिए बेटियों को रेसलिंग में उतारा था.

ठीक वैसे ही मुंदी ताल के शिशुपाल कोठारी ने अपनी और भाई की 8 बेटियों को एथलीट बना दिया. एक बार राष्‍ट्रीय स्तर पर दौड़ में गोल्ड जीतने वाले शिशुपाल के परिवार की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वह आगे नहीं खेल सके. उनका सपना साकार होने से पहले ही टूट गया. इस बात का शिशुपाल को काफी मलाल रहा. बाद में अपने ख्‍वाब को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी और भाई की बेटियों को एथलीट बना दिया.

नेशनल लेवल पर 50 गोल्ड जीत चुकी हैं
शिशुपाल ने पहले तो गांव के खेत में बेटियों को दौड़ लगाने के लिए ट्रैक बना कर दिया. लेकिन, वहां विरोध होने पर उन्होंने खुद के खेत में दौड़ का मैदान बना लिया. पहलवान महावीर फोगाट की तरह उन्होंने भी बेटियों के मसालेदार और फ्रिज में रखा सामान खाने पर पाबंदी लगा दी. वहीं, आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से घर में टीवी, फ्रिज और मोबाइल अब तक नहीं है. इसका नतीजा यह रहा कि पांच बेटियां खुद की व तीन भाइयों की सहित 8 बेटियां नेशनल लेवल पर अब तक 50 से अधिक गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. वहीं, सरोज ने 43वीं रेंज स्तरीय टूर्नामेंट में आठ गोल्ड मेडल जीतकर पुलिस फोर्स और गांव का नाम रोशन किया है.

1984 में नेशनल लेवल पर जीता गोल्ड
सरोज के ताऊ शिशुपाल भी नेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं. सन 1984 में उन्होंने दौड़ में नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीता था. देश के लिए गोल्ड मेडल लाने का सपना था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण खेल के साथ पढ़ाई भी छूट गई. बाद में वह खेती-बाड़ी के काम में जुट गए.

सरोज ने एक ही टूर्नामेंट में जीते 8 गोल्ड
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शिशुपाल को इस बात का बेहद दुख हुआ और उन्होंने उसी दिन से ठान लिया कि वह अपने बच्चों को तैयार कर अपना सपना पूरा करवाएंगे. इसके बाद उन्होंने अपनी 5 बेटियों, छोटे भाई की दो बेटियां और सबसे छोटे भाई की एक बेटी सहित 8 लड़कियों को रोज अपने खेत में मेहनत करवाते रहे. दिन रात मेहनत का नतीजा यह रहा कि खुद की आठों बेटियां एथलीट बन गईं. अब भाई की बेटी सरोज ने एक ही टूर्नामेंट में 8 गोल्ड मेडल जीत लिए.

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First published: June 28, 2019, 11:39 AM IST
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