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जोधपुर: परीक्षा परिणाम अच्छा नहीं रहने पर 445 शिक्षकों को थमाये 17 सीसीए के नोटिस, हड़कंप मचा

शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक प्रेमचंद सांखला ने बताया कि कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिनका पिछले 3 बरसों से परिणाम खराब आ रहा है.
शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक प्रेमचंद सांखला ने बताया कि कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिनका पिछले 3 बरसों से परिणाम खराब आ रहा है.

प्रदेश के शिक्षा विभाग (Education Department) ने खराब परीक्षा परिणाम (Result) देने वाले शिक्षकों के प्रति कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके तहत जोधपुर संभाग के 445 शिक्षकों (Teachers) को 17 सीसीए के नोटिस थमाये गये हैं.

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जोधपुर. प्रदेश की सरकारी स्कूलों में परिणाम (Result) अच्छा नहीं लाने वाले शिक्षकों पर गाज गिरना शुरू हो गई है. राज्य सरकार के शिक्षा विभाग (Education Department) ने ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करनी शुरू कर दी है।. इसी के तहत शिक्षा विभाग ने जोधपुर संभाग के 445 शिक्षकों (Teachers) को परिणाम अच्छा नहीं लाने पर 17 सीसीए का नोटिस जारी किया है. इन शिक्षकों से परिणाम खराब रहने के कारणों के बारे में पूछा गया है. शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है.

शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक प्रेमचंद सांखला ने बताया कि वर्ष 2019 व 2018 में कक्षा 1 से 12 तक विभिन्न स्कूलों के 445 शिक्षकों को परिणाम अच्छा नहीं लाने पर उन्हें 17 सीसीए का नोटिस जारी किया गया है. उन्होंने बताया कि शिक्षकों को नोटिस जारी कर उन्हें बच्चों का अच्छा परिणाम नहीं आने का कारण पूछा गया है. इनमें से कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिनका पिछले 3 बरसों से स्कूलों का परिणाम खराब आ रहा है. लिहाजा ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू की गई है. उसके बाद जिलेवार उनका पक्ष सुना जायेगा.

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बेहतर परिणाम लाने के लिये लेकर लगातार नवाचार किये जा रहे हैं


उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार पिछले काफी समय से बेहतर परिणामों को लेकर लगातार कई तरह के नवाचार कर रही है. इसके लिये कई कदम उठाये गये हैं. इसके बावजूद सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम सुधर नहीं रहा है. कई शिक्षकों की परफोर्मेंस काफी खराब है. हालांकि इस वर्ष कोरोना के कारण स्कूल खुले नहीं है और शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की तर्ज पर बच्चों को ऑनलाइन शिक्षण सामग्री मुहैया कराने का प्रयास भी कर रहा है. राज्य सरकार ने इंग्लिश मीडियम की प्राइवेट स्कूलों का मुकाबला करने के लिये गत वर्ष से सरकारी अंग्रेजी स्कूलें भी खोली हैं. सरकार का प्रयास है कि शिक्षा विभाग को तमाम सुविधायें मुहैया करवाई जाये ताकि वे निजी स्कूलों के मुकाबले पिछड़े नहीं और इन स्कूलों के बच्चों में किसी तरह की कोई हीन भावना नहीं आये.
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