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आज भी बेटियों को कई जगहों पर प्यार और सम्मान नहीं मिलता है: जस्टिस लोढ़ा

आज भी बेटियों को कई जगहों पर प्यार और सम्मान नहीं मिलता है: जस्टिस लोढ़ा

जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि आज भी बहुत सी जगहों पर बालिकाओं को प्यार और सम्मान नहीं मिलता है.

जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि आज भी बहुत सी जगहों पर बालिकाओं को प्यार और सम्मान नहीं मिलता है.

जस्टिस लोढ़ा justice Lodha) ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Strugle) के दौरान ना जाने कितनी महिलाओं ने बलिदान दिया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग भी लिया, लेकिन यह दु:ख का विषय है कि आज के जमाने में भी बेटे और बेटियों को कई जगह प्यार और समान नहीं मिलता है.

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जोधपुर. राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर राजकीय उम्मेद स्टेडियम में शुक्रवार को बैलून शो (Baloon Show) और पेंटिंग व पोस्टर प्रतियोगिता (Painting and Poster Competition) का आयोजन किया गया. इस मौके पर राजस्थान हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत राज लोढ़ा (Justice Sangeet Raj Lodha) व जस्टिस संदीप मेहता को मुख्य आतिथि बनाया गया था. इस मौके पर राजस्थान हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश मौजूद थे. अपने संबोधन के दौरान राजस्थान हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत राज लोढ़ा ने अपनी बचपन को याद करते हुए कहा कि आज से करीब 50 वर्ष पूर्व में भी एक छात्र के रूप में हाथों में तख्तियां लिए गलियों में नारे लगाते हुए घूमता था. उन्होंने कहा आज भी बच्चे हाथों में तख्तियां लिए हुए जब रैली निकालते हैं और यह जागरूकता फैलाते हैं कि हर बच्चा पढ़े और आगे बढ़े तो यह देखकर बहुत सुखद लगता है. उन्होंने कहा कि लेकिन यह बहुत बड़ी विडंबना है कि शिक्षा के अधिकार को मूलभूत अधिकार बनाने में हमें आजादी के बाद 52 वर्ष लग गए.

'स्वतंत्रता संग्राम में कई महिलाओं ने दिया योगदान'

जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि हमारी संसद ने साल 2009 में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का कानून पारित किया और शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार बन गया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ना जाने कितनी महिलाओं ने बलिदान दिया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग भी लिया, लेकिन यह दु:ख का विषय है कि आज के जमाने में भी बेटे और बेटियों को कई जगह प्यार और समान नहीं मिलता है. आज भी देश में अधिकांश बेटियां शिक्षा से वंचित है.

'सभी बेटियां जिस दिन शिक्षित हो जाएंगी, उस दिन देश तरक्की करने लग जाएगा'

उन्होंने कहा कि जिस दिन हमारे देश में सभी महिलाएं और बेटियां पूर्ण शिक्षित हो जाएंगी, तब हम यह कह सकेंगे कि अब महिलाओं को समानता का अधिकार मिल गया है. इसके बाद ही शिक्षा के क्षेत्र में हमारा देश खुद-ब-खुद तरक्की करने लगेगा.

आज बैलून शो के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने स्कूली बच्चों और गुब्बारों के साथ सेल्फी भी ली. इस मौके पर हाई कोर्ट जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस डॉक्टर पुष्पेंद्र सिंह भाटी, जस्टिस विजय विश्नोई, जस्टिस मनोज कुमार गर्ग, जस्टिस दिनेश मेहता सहित राजस्थान हाई कोर्ट के कई न्यायाधीश मौजूद थे. इसके अलावा जिला एवं सेशन जज नरसिंह दास व्यास तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव सिद्धेश्वर पुरी मौजूद थे.

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Tags: Jodhpur News, Rajasthan news

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