जोधपुर जेल में बंद आसाराम ने परोल की पुरानी अर्जी ली वापस, अब लगाएंगे नई, यह है वजह
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जोधपुर जेल में बंद आसाराम ने परोल की पुरानी अर्जी ली वापस, अब लगाएंगे नई, यह है वजह
जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है आसाराम।

मंगलवार को आसाराम (Asaram) के वकील प्रदीप चौधरी ने याचिका को पुनः पेश करने की कोर्ट से अनुमति लेने के बाद इस याचिका को वापस ले लिया यानी विड्रोल कर लिया

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जोधपुर. अपने ही गुरुकुल की नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम (Asaram) की परोल याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट (High Court) ने निस्तारण (रद्द) कर दिया है. मंगलवार को आसाराम के वकील प्रदीप चौधरी ने याचिका को पुनः पेश करने की कोर्ट से अनुमति लेने के बाद इस याचिका को वापस ले लिया यानी विड्रोल कर लिया.

2019 में लगाई गई थी याचिका
दरअसल वर्ष 2019 में आसाराम के भांजे रमेश भाई की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट पिटिशन पेश कर आसाराम को 15 दिन की परोल देने की मांग की गई थी. मंगलवार को राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस देवेंद्र कच्छवाह की खंडपीठ में आसाराम का यह मामला सूचीबद्ध (लिस्टेड) था. सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील प्रदीप चौधरी ने खंडपीठ से याचिका को पुनः पेश करने की अनुमति देने की गुहार करते हुए पुरानी याचिका वापस लेने की प्रार्थना की. उसको खंडपीठ द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद आसाराम के वकील ने इस याचिका को विड्रॉ कर लिया.

जिला परोल कमेटी से दो बार अर्जी खारिज 
बता दें कि आसाराम के भांजे रमेश ने पूर्व में जिला परोल कमेटी के समक्ष भी दो बार आसाराम की परोल अर्जी लगाई थी, लेकिन जिला परोल कमेटी ने उन अर्जियों को खारिज कर दिया था. उसके बाद आसाराम की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका पेश की गई थी. आसाराम के वकील ने बताया कि आसाराम पर गुजरात में मामला लंबित है. उसमें आसाराम को फिलहाल कोई राहत या आंशिक राहत नहीं मिली है. इसके चलते उन्होंने यह याचिका वापस ली है. गुजरात मामले में आंशिक राहत या राहत मिलने के बाद आसाराम की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में यह याचिका पुनः पेश की जाएगी.



करीब सात साल से जेल में बंद है आसाराम
आसाराम को यौन उत्पीड़न के मामले में जोधपुर पुलिस एक सितंबर, 2013 को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा आश्रम से गिरफ्तार कर जोधपुर लाई थी. तब से आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है. इस दौरान आसाराम ने अधीनस्थ न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक से जमानत लेने का प्रयास किया, लेकिन कहीं भी राहत नहीं मिली. यौन उत्पीड़न के मामले में करीब पांच साल तक चली लंबी ट्रायल के बाद 25 अप्रैल, 2018 को एससी-एसटी कोर्ट के तत्कालीन पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा की कोर्ट ने आसाराम को प्राकृतिक जीवन यानी अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई थी.

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