जोधपुर: IIT ने बनाया ‘कैम्पस रक्षक कवच’, 4 प्रोजेक्ट से स्टूडेंट्स होंगे कोरोना 'फ्री', जानिये कैसे?

अन्य एज्युकेशनल कैम्पस भी इसे लागू कर स्टूडेंट्स को कोरोना से बचा सकते हैं. 
दावा है कि इससे कोरोना संक्रमण काल में कैम्पस संचालन किया जा सकता है.

अन्य एज्युकेशनल कैम्पस भी इसे लागू कर स्टूडेंट्स को कोरोना से बचा सकते हैं. दावा है कि इससे कोरोना संक्रमण काल में कैम्पस संचालन किया जा सकता है.

Intiative of Jodhpur IIT: आईआईटी मेंं 'कैम्पस रक्षक प्लान' (Campus Raksha Kavach Plan) लागू कर स्टूडेंट्स को ‘कोरोना कवच’ प्रदान किया है. इस मॉडल को अन्य शिक्षण संस्थानों में भी अपनाया जा सकता है.

  • Share this:

जोधपुर. कोरोना संक्रमण (Corona infection) के चलते देशभर में स्कूल और कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद पड़े हैं. कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के बाद स्कूल और कॉलेज खुल भी जाएंगे. लेकिन स्टूडेंट्स में कोरोना संक्रमण का खतरा लगातार बरकरार रहेगा. इन हालातों में स्टूडेंट्स को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जोधपुर आईआईटी (Jodhpur IIT) ने 'कैम्पस रक्षक प्लान' (Campus Rakshak Plan) लागू कर अपने स्टूडेंट्स को ‘कोरोना कवच’ प्रदान किया है. देश के 5 इंस्टीट्यूट की रिसर्च के बाद यह प्लान बनाया गया है. इससे कोरोना संक्रमण के बाद भी आराम से कैम्पस संचालन किया जा सकता है.

जोधपुर आईआईटी में कोरोना विस्फोट के बाद आईआईटी ने देश के पांच इंस्टीट्यूट में इस रिसर्च को करना शुरू किया. 5 संस्थानों में रिसर्च कर पोस्ट कोविड में कैम्पस चलाने का तरीका निकाला गया है. आईआईटी के प्लान में बताया गया है कि कैम्पस में व्यवस्थाएं खास तरह से लागू की जाएं तो कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है. आईआईटी के इस प्लान के बाद कैम्पस में कोरोना संक्रमण का खतरा तो कम हुआ ही है, इसके बाद अब कोई दूसरा स्टूडेंट कोरोना की चपेट में नहीं आया है.

4 प्रोजेक्ट लागू कर बनाया ‘कैम्पस रक्षक कवच’

आईआईटी जोधपुर ने चार प्रोजेक्ट बनाकर उसे लागू कर दिया है. इन चार प्रोजेक्ट में रेंडम सेम्पलिंग, गो कोरोना गो एप, फ्यूचर सिमुलेशन और बैजिंग 4 प्रोजेक्ट लागू किये है. इन प्रोजेक्ट्स में टेस्टिंग, ट्रेसिंग, टेक्नोलॉजी और ट्रेकिंग होगी. इससे स्टूडेंट्स को कोरोना से बचाया जाएगा.
जानिये कैसे काम करेंगे ये 4 प्रोजेक्ट्स

पहला रैंडम सेम्पलिंग- इसमें कैम्पस में आने के बाद 10 फीसदी स्टूडेंट्स की रैंडम सेम्पलिंग कराई जाएगी, ताकि कोई पॉजिटिव सामने आता है तो उसके परिवार,आसपास रहने वाले सहपाठी और फैकल्टी की भी जांच हो सकेंगी. पॉजिटिव आने वाले को क्वारेंटाइन किया जाएगा.

दूसरा गो कोरोना गो एप- आईआईटी जोधपुर और आईआईटी बेंगलुरु के एप गो कोरोना गो एप को डाउनलोड कर मोबाइल में ब्लू टूथ ऑन रखना होता है. वह कैम्पस के सर्वर से जुड़ा रहता है. कोई भी पॉजिटिव आता है तो इस एप से पता चल जाता है. इसके साथ ही यह भी पता चल जाता है कि वह पॉजिटिव किस किस के संपर्क में आया था.



तीसरा फ्यूचर सिमुलेशन- इस व्यवस्था में कैम्पस का मैप और लोगों की जानकारी डाल दी जाती है. यदि कोई पॉजिटिव आता है तो मैप में बताया जा सकेगा की पॉजिटिव अगले 30 दिन में कहां जाने वाला है. उसकी मुलाकात किस-किससे हो सकती है. उसकी जानकारी उन सभी को दी जा सकेगी कि यह स्टूडेंट्स पॉजिटिव है.

चौथा बैजिंग- कोरोना संक्रमण की जांच के बाद आईआईटी स्टूडेंट्स को रेड,ऑरेंज और ग्रीन बैज जारी करेगा. यह बैज उनके मोबाइल पर रहेंगे. रेड का मतलब कोरोना पॉजिटिव है तो क्लास ऑनलाइन अटेंड करनी होगी. ऑरेंज बैज का मतलब है वह कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आ चुका है. उसका कोरोना टेस्ट करवाना होगा. इसके साथ ही ग्रीन बेज का मतलब वह स्टूडेंट सुरक्षित है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज