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राजस्‍थान विधानसभा चुनाव: मारवाड़ में जीत के लिए बीजेपी-कांग्रेस की किस पर है नजर?

Jodhpur News: पिछले चुनाव में गहलोत ने कांग्रेस को बढ़त दिलाई थी

Jodhpur News: पिछले चुनाव में गहलोत ने कांग्रेस को बढ़त दिलाई थी

Jodhpur News: राजस्थान में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी ह ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

राजस्थान में 50 से ज्यादा सीटों पर ओबीसी विधायक, इनमें से 15 मारवाड़ संभाग से चुनकर आते हैं
पिछले विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत ने मुकाबला में कांग्रेस को 22 सीटें जिताकर बढ़त दिलाई

जोधपुर. राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Assembly Election) के इस साल होने जा रहे चुनाव में राजधानी के बाद जोधपुर सियासी समीकरणों का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) और उनके धुर विरोधी केंद्र्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra singh Shekhawat) जोधपुर से ही हैं. इसके अलावा मारवाड़ संभाग (Marwar Division) में सियासी पैठ बनाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने ओबीसी सीटों (OBC Seats) फोकस करना शुरू कर दिया है. जोधपुर डिवीजन की 33 में से 15 सीटें ओबीसी हैं.

प्रदेश में सभी दलों द्वारा ओबीसी वोट बैंक को साधने की तैयारी की जा रही है. इसकी बड़ी वजह यह है कि राजस्थान में 50 से ज्यादा सीटों पर ओबीसी विधायक चुनकर आते हैं.

राजे की सक्रियता से 2013 में 39 सीटें मिलीं
मारवाड़ की बात करें तो जोधपुर संभाग के जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, जालौर, सिरोही और जोधपुर जिले की कुल 33 तथा नागौर जिले की दस सीटें मिलाकर मारवाड़ में कुल 43 विधानसभा सीटें हैं. कभी यह कांग्रेस का गढ़ रहा, लेकिन 2013 में वसुंधरा राजे की सक्रियता ने यहां की सियासी बाजी पलट दी. तब इस अंचल के सात जिलों की 43 सीटों में 39 भाजपा के कब्‍जे में आई. भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि किसी भी राज्य और केन्द्र में सरकार बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ओबीसी वर्ग की होती है. कुल आबादी का 54 फीसदी हिस्सा ओबीसी का है. माना जाता है कि यह वर्ग बहने वाली हवा के आधार पर मतदान कर राजनीतिक पार्टियों के सारे समीकरण गड़बड़ा देता है.

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पिछले चुनाव में गहलोत ने कांग्रेस को बढ़त दिलाई
पिछले चुनाव में अशोक गहलोत ने मुकाबला में कांग्रेस को बढ़त दिला दी. तब कांग्रेस को 22और बीजेपी को 16 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था. पिछले चुनाव में जोधपुर डिविजन की 15 ओबीसी सीटें में से 11 कांग्रेस और चार बीजेपी ने जीती थीं. बीजेपी इसके लिए पिछले साल जोधपुर में ओबीसी का सम्मेलन कर चुकी है. ऐसे में कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों को ओबीसी के महत्व का अहसास हो चला है. ऐसे में वे उन्हें साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.

नागौर: पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं
इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी अभी से तैयारी में जुटी है. दरअसल, वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में नागौर जिले की 10 में से 9 सीटें भाजपा के पास थीं. लेकिन 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी केवल 2 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी. कांग्रेस ने 6 विधानसभा क्षेत्रों नावां, लाडनू, परबतसर, डेगाना, डीडवाना और जायल में जीत का बिगुल बजाया. नागौर विधानसभा से मोहनलाल चौधरी और मकराना से रूपाराम मुरावतिया ही बीजेपी को जिता पाए. खींवसर और मेड़ता में हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के विधायक बने.

मारवाड़ के ये दिग्गज नेता जीत के आधार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर की सरदारपुरा सीट से जीते हैं. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी जोधपुर के सासंद हैं. इसके अलावा पूर्व मंत्री गजेन्द्र सिंह खीवंसर, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र गोयल, पुष्पेंद्र राणावत, ओटाराम देवासी, पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, जोगेश्वर गर्ग, वर्तमान मंत्री हेमाराम चौधरी, पंजाब कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, अमीन खां, अर्जुन लाल गर्ग, कर्नल सोनाराम, विधायक दिव्या मदेरणा औ महेन्द्र विश्नोई आदि मारवाड़ संभाग के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं.

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