अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार-2020 के लिए जोधपुर की जसोदा प्रजापत नामांकित, अब तक रूकवा चुकी है कई बाल विवाह

अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार-2020 की तैयारी (सांकेतिक तस्वीर)
अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार-2020 की तैयारी (सांकेतिक तस्वीर)

जसोदा प्रजापत (Jasoda Prajapat) ने पिताओं को संदेश देते हुए कहा कि वे अपनी बच्चियों को खूब पढ़ाएं. उन्हें हर परिस्थिति का सामना करना सिखाएं और जबतक बच्चियां सफल नहीं हो जाती तबतक उन्हें रोके नहीं.

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जोधपुर. नीदरलैंड की किड्स राइट संस्था की ओर से दिए जाने वाला अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार- 2020 (International Children's Peace Prize - 2020) के लिए जोधपुर के ओसिया की भैरव सागर निवासी जसोदा प्रजापत (Jasoda Prajapat) का नाम नामांकित हुआ है. जिससे परिवार सहित पूरे ओसिया तहसील में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. जसोदा प्रजापत एक सामान्य किसान परिवार में पैदा होकर महिलाओं और बच्चियों के उत्थान के लिए काम कर रही है. छोटी सी उम्र में ही जसोदा ने चार बाल विवाह रुकवाए. उर्मूल ट्रस्ट के साथ मिलकर जीवन कौशल शिक्षा सचिवों के माध्यम से उसने 130 से अधिक लड़कियों को प्रशिक्षित किया. जसोदा ने चुप्पी तोड़ो कार्यक्रम के माध्यम से मासिक धर्म स्वच्छता के बारे जागरुकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

जसोदा प्रजापत के परिवार उसके इस सफलता से बहुत खुश हैं. पिता कुशाल प्रजापत का कहना है कि उनकी बच्ची ने उनका नाम रोशन किया. वह चाहते हैं कि उनकी बेटी जीवन में खूब पढ़े और आगे बढ़े. इसके अलावा सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन करती रहे.

पिताओं से अपील 



जसोदा ने कहा कि अभी तो सिर्फ उसका नाम नामांकित हुआ है. जबकि उसकी इच्छा है कि वह इसमें नंबर वन बनकर अवार्ड जीत पाए. उसने बच्चियों के पिताओं को संदेश देते हुए कहा कि अपनी बच्चियों को खूब बढ़ाएं. उन्हें हर परिस्थिति का सामना करना सिखाएं. जब तक बच्चियां सफल नहीं हो जाती तब तक उन्हें रोके नहीं.
नीदरलैंड की किड्स राइट संस्था द्वारा इस वर्ष 42 देशों के 142 बच्चों को अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है. पुरस्कार की अंतिम घोषणा 13 नवंबर को होगी. भारत से दो बच्चियों का नाम इसके लिए नामांकित हुआ है.
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